उत्तराखंड एसटीएफ की बॉट ब्रो गैंग के खिलाफ कार्रवाई, 1200 करोड़ रुपये की कथित ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी में दो आरोपी गिरफ्तार।उत्तराखंड एसटीएफ की बॉट ब्रो गैंग के खिलाफ कार्रवाई, 1200 करोड़ रुपये की कथित ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी में दो आरोपी गिरफ्तार।

रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

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देहरादून। उत्तराखंड में ऑनलाइन निवेश के नाम पर बड़े पैमाने पर कथित साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। करीब 1200 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े बॉट ब्रो गैंग के नेटवर्क पर उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसटीएफ की विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले में गैंग से जुड़े दो प्रमुख आरोपियों नवीन सिंह नेगी और कविता परमार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य लोगों को ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश में मोटा मुनाफा दिलाने के साथ विदेश यात्रा कराने का लालच देकर अपने नेटवर्क से जोड़ते थे। इस कथित निवेश योजना में पूर्व सैनिकों सहित कई लोगों की जमापूंजी भी लगाए जाने की बात सामने आई है।

आईजी अपराध एवं कानून व्यवस्था नीलेश आनंद भरणे ने गुरुवार को आयोजित प्रेसवार्ता में कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस नेटवर्क का कथित सरगना लविश चौधरी उर्फ नवाब अली है, जो विदेश में बैठकर गिरोह का संचालन कर रहा है। एसटीएफ की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

एसटीएफ की एसआईटी ने बॉट ब्रो गैंग से जुड़े नवीन सिंह नेगी और कविता परमार को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार, नवीन सिंह नेगी देहरादून के रायपुर क्षेत्र स्थित सिद्धि विनायक कॉलोनी का निवासी है। वह मूल रूप से रुद्रप्रयाग जिले के बासुकेदार क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। वहीं, दूसरी आरोपी कविता परमार देहरादून के बालावाला क्षेत्र की निवासी है।

दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन और डोईवाला थाने में दर्ज अलग-अलग मुकदमों के संबंध में की गई है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, निवेश की रकम और कथित लेनदेन से संबंधित जानकारियां जुटाने में लगी है। एसटीएफ की इस कार्रवाई को कथित निवेश धोखाधड़ी के बड़े नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क के माध्यम से कितने लोगों को निवेश के नाम पर जोड़ा गया और कथित तौर पर एकत्र की गई रकम कहां-कहां भेजी गई।

2022 से अलग-अलग कंपनियों के नाम पर चल रहा था नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि आरोपी वर्ष 2022 से अलग-अलग कंपनियों और निवेश प्लेटफॉर्म के नाम पर लोगों को जोड़ रहे थे। इनमें क्यूएफएक्स (QFX), बॉट ब्रो (Bot Bro), बॉट अल्फा (Bot Alpha), क्रॉस मार्केट (Cross Market), माइन क्रिप्टो (Mine Crypto), मेटा ट्रेड-5 (Meta Trade-5) और टीएलसी कॉइन (TLC Coin) जैसे नाम शामिल बताए गए हैं।

आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के क्षेत्र में आकर्षक रिटर्न का भरोसा दिलाया जाता था। निवेशकों को बताया जाता था कि उनकी रकम से बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके साथ ही विदेश यात्रा जैसे आकर्षक प्रलोभन देकर भी लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था। vजांच एजेंसी के अनुसार, संबंधित कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) में पंजीकृत नहीं थीं। ऐसे में इन कंपनियों के माध्यम से निवेश का प्रस्ताव देने और वित्तीय गतिविधियां संचालित करने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

बॉट ब्रो बंद होने के बाद भी जारी रहा निवेश का काम

एसटीएफ की जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। बताया गया है कि बॉट ब्रो कंपनी बंद होने के बाद भी नवीन सिंह नेगी ने कथित तौर पर राइजनवेज (Risenways) नाम से नई कंपनी शुरू कर दी। इसके माध्यम से लोगों को निवेश नेटवर्क से जोड़ने का काम जारी रखा गया।

जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि नई कंपनी के माध्यम से कितने निवेशकों को जोड़ा गया और क्या पुराने निवेशकों की रकम को नए प्लेटफॉर्म से जोड़ने का प्रयास किया गया था। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इन कंपनियों के संचालन में कौन-कौन लोग शामिल थे और इनके बीच वित्तीय लेनदेन किस प्रकार होता था। मामले में केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक जांच सीमित नहीं है। एसटीएफ नेटवर्क के अन्य सदस्यों और कथित तौर पर विदेश से इसका संचालन करने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

एसटीएफ के अनुसार, बॉट ब्रो गैंग से संबंधित कुल 10 मुकदमों की जांच की जा रही है। इनमें साइबर अपराध और निवेश के नाम पर कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामले शामिल हैं। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम (BUDS Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

जांच टीम अब इन मुकदमों में सामने आए तथ्यों का आपस में मिलान कर रही है। इसके साथ ही निवेशकों की शिकायतों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब 1200 करोड़ रुपये की कथित ठगी का आंकड़ा इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि, वास्तविक प्रभावित निवेशकों की संख्या और प्रत्येक व्यक्ति को हुए नुकसान का विस्तृत ब्योरा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

एसटीएफ के अनुसार, बॉट ब्रो गैंग से संबंधित कुल 10 मुकदमों की जांच की जा रही है। इनमें साइबर अपराध और निवेश के नाम पर कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामले शामिल हैं। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम (BUDS Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

जांच टीम अब इन मुकदमों में सामने आए तथ्यों का आपस में मिलान कर रही है। इसके साथ ही निवेशकों की शिकायतों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब 1200 करोड़ रुपये की कथित ठगी का आंकड़ा इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि, वास्तविक प्रभावित निवेशकों की संख्या और प्रत्येक व्यक्ति को हुए नुकसान का विस्तृत ब्योरा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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By ATHAR

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