रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
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हरिद्वार/रुड़की। साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों और ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों को देखते हुए हरिद्वार पुलिस की ओर से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के निर्देश पर क्षेत्राधिकारी भगवानपुर ने रुड़की स्थित सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI) में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर उपस्थित लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी दी।
कार्यक्रम में डिजिटल अरेस्ट, फर्जी APK फाइल, कॉल फॉरवर्डिंग और कॉल मर्जिंग स्कैम जैसे साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से बताया गया। लोगों को समझाया गया कि साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से विश्वास जीतकर या डर दिखाकर निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति के फोन, लिंक या संदेश पर बिना जांच भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन कॉल या वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर गिरफ्तारी का डर दिखाए और पैसे की मांग करे तो सतर्क रहें। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय संबंधित जानकारी की आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।
रुड़की स्थित सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को डिजिटल माध्यमों से होने वाली धोखाधड़ी के प्रति जागरूक करना और उन्हें सुरक्षित इंटरनेट इस्तेमाल के तरीके बताना रहा। हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्राधिकारी भगवानपुर ने उपस्थित लोगों को साइबर अपराधों के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इंटरनेट और स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठग भी धोखाधड़ी के नए तरीके अपना रहे हैं।
कई बार ठग बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी, पुलिसकर्मी या किसी परिचित के नाम पर संपर्क करते हैं। इसके बाद वे लोगों से ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी, निजी दस्तावेज या अन्य गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। लोगों को ऐसे किसी भी अनुरोध पर तुरंत भरोसा न करने की सलाह दी गई।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने वालों से रहें सावधान
कार्यक्रम में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर विशेष रूप से जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि साइबर ठग फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से खुद को किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे किसी कथित मामले में नाम आने, गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर व्यक्ति को लगातार कॉल पर बनाए रखने और पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बना सकते हैं।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की कॉल आती है तो उसे घबराकर पैसे नहीं भेजने चाहिए और न ही अपनी निजी जानकारी साझा करनी चाहिए। ऐसी कॉल की सत्यता की जांच संबंधित विभाग के आधिकारिक संपर्क माध्यम से करनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी पुलिस को देना भी जरूरी है।
फर्जी APK फाइल और अनजान लिंक से बचने की सलाह
कार्यक्रम में फर्जी APK फाइल और संदिग्ध लिंक के माध्यम से होने वाली साइबर ठगी के बारे में भी बताया गया। APK फाइल एंड्रॉयड मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल होती है। साइबर अपराधी कई बार नकली ऐप या फाइल के जरिए मोबाइल में अनधिकृत पहुंच हासिल करने अथवा निजी जानकारी चुराने का प्रयास कर सकते हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की कि किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइल डाउनलोड न करें। किसी बैंक, सरकारी विभाग या अन्य संस्था के नाम से आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें। मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने के लिए आधिकारिक ऐप स्टोर का इस्तेमाल करना और ऐप को दी जाने वाली अनुमतियों पर ध्यान देना भी जरूरी है। किसी संदिग्ध फाइल को डाउनलोड करने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि करनी चाहिए।
साइबर जागरूकता कार्यक्रम में कॉल फॉरवर्डिंग और कॉल मर्जिंग के जरिए होने वाली धोखाधड़ी के बारे में भी लोगों को बताया गया। कॉल फॉरवर्डिंग के मामले में ठग लोगों को किसी विशेष नंबर या कोड को डायल करने के लिए कह सकते हैं। इसके जरिए मोबाइल पर आने वाली कॉल किसी दूसरे नंबर पर भेजे जाने का जोखिम हो सकता है। इसी तरह कॉल मर्जिंग के बहाने लोगों को ऐसी कॉल प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है, जिसका इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है।
पुलिस ने लोगों को सलाह दी कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई कोड डायल न करें और न ही बिना जानकारी के कॉल मर्ज करें। यदि मोबाइल में कॉल फॉरवर्डिंग से संबंधित कोई संदिग्ध बदलाव दिखाई दे तो उसकी जांच करें और जरूरत पड़ने पर मोबाइल सेवा प्रदाता से संपर्क करें।
ठगी होने पर 1930 और साइबर क्राइम पोर्टल पर करें शिकायत
कार्यक्रम में साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी समझाई गई। पुलिस ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है तो उसे जल्द से जल्द 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करना चाहिए।
इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत जितनी जल्दी दर्ज कराई जाएगी, संबंधित एजेंसियों को लेनदेन और उपलब्ध डिजिटल जानकारी के आधार पर कार्रवाई करने का उतना ही बेहतर अवसर मिल सकता है। पुलिस ने लोगों को सलाह दी कि साइबर ठगी होने पर बैंक खाते, ट्रांजेक्शन आईडी, मोबाइल नंबर, संदेश और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से संबंधित जानकारी सुरक्षित रखें। शिकायत दर्ज कराने में देरी न करें और किसी अनजान व्यक्ति को शिकायत के नाम पर अतिरिक्त भुगतान न करें।
U.G.I.N. सिद्धांत से समझाया साइबर ठगी का तरीका
कार्यक्रम में साइबर अपराधों के पीछे इस्तेमाल होने वाली मनोवैज्ञानिक रणनीतियों को समझाने के लिए U.G.I.N. (Urgency, Greed, Ignorance, Need) सिद्धांत की जानकारी दी गई। इसके माध्यम से बताया गया कि साइबर ठग आमतौर पर लोगों की चार स्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं—Urgency (जल्दबाजी): तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाकर व्यक्ति को सोचने और जांच करने का समय नहीं दिया जाता। Greed (लालच): इनाम, नौकरी, निवेश में अधिक लाभ या सस्ते सामान का लालच देकर ठगी की जा सकती है। Ignorance (जानकारी का अभाव): डिजिटल सुरक्षा की पर्याप्त जानकारी न होने का फायदा उठाकर लोगों को फर्जी लिंक और ऐप के जाल में फंसाया जाता है। Need (जरूरत): नौकरी, पैसे, मदद या किसी जरूरी सेवा की आवश्यकता का फायदा उठाकर व्यक्ति को धोखाधड़ी का शिकार बनाया जा सकता है। पुलिस ने समझाया कि किसी भी ऑनलाइन प्रस्ताव या संदेश पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय उसकी जांच करना जरूरी है। असामान्य लाभ, तुरंत भुगतान की मांग या गोपनीय जानकारी मांगने वाले संदेशों के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
रुड़की के CBRI में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से हरिद्वार पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट, फर्जी APK फाइल, कॉल फॉरवर्डिंग, कॉल मर्जिंग और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी जैसे विषयों पर जानकारी दी। पुलिस ने लोगों से अपील की कि किसी भी अनजान लिंक या फाइल को डाउनलोड न करें, ओटीपी और निजी जानकारी साझा न करें तथा सरकारी एजेंसी के नाम पर डराने वाली कॉल से सावधान रहें। साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 पर संपर्क करने और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि जागरूकता, सतर्कता और समय पर शिकायत साइबर अपराध से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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