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नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से सक्रिय सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली में कानूनी और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर करीब 20 दिनों तक अनशन पर बैठे वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में उन्होंने सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से तत्काल रिहा करने या किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में रखा गया है और उन्हें परिवार, वकीलों तथा निजी चिकित्सकों से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही। वहीं प्रशासनिक पक्ष का कहना है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मामले पर अब दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। उनका प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक जैसे मुद्दों से जुड़ा था। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित कई मांगें उठाई थीं। बताया गया कि 18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लेकर गई, जहां उनकी स्वास्थ्य जांच और उपचार शुरू किया गया। इसके बाद से ही अस्पताल में उनके रहने को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
सोनम वांगचुक की पत्नी ने हाईकोर्ट का किया रुख, कहा- सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं, कहीं और करें शिफ्ट
नई दिल्ली,19 जुलाई(आरएनएस)। जंतर-मंतर पर करीब बीस दिनों तक अनशन पर बैठने वाले सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सफदरजंग अस्पताल से उन्हें तुरंत रिहा करने या किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है. गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि वांगचुक को उनके परिवार, वकीलों और उनके निजी डॉक्टरों से अलग रखकर अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है.
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि उनके पति को बिना सहमति के अस्पताल में रखा गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि—उन्हें परिवार के सदस्यों से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही। निजी डॉक्टरों से जांच कराने की इजाजत नहीं है। किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग पर भी विचार नहीं किया गया। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और न ही किसी न्यायालय ने गिरफ्तारी या निरोधात्मक आदेश जारी किया है। याचिका में अस्पताल में लगातार रखे जाने को “अवैध हिरासत” बताया गया है।
याचिका पर 19 जुलाई रविवर को ही तुरंत सुनवाई करने की मांग की गई है.
याचिका में कहा गया है कि सोनम वांगचुक को 18 जुलाई की सुबह जंतर-मंतर से दिल्ली पुलिस ने उठा लिया और बिना उनकी सहमति के उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. याचिका में कहा गया है कि सोनम वांगचुक के खिलाफ बिना किसी आपराधिक केस दर्ज किए या किसी कोर्ट से गिरफ्तारी या निरोधात्मक कार्रवाई करने के आदेश के अस्पताल में लगातार रखना गैरकानूनी है. उन्हें चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आड़ में हिरासत में रखा गया है. ऐसा केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन से हटाने के लिए किया गया है.
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में दिल्ली पुलिस ने ऐसा किया है. जबकि दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए रखने का आदेश दिया था. गीतांजलि की याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट में जो याचिका दायर की गई है उसमें न तो सोनम वांगचुक को पक्षकार बनाया गया है और न ही अंजलि को पक्षकार बनाया गया है. ऐसे में बिना सोनम वांगचुक की सहमति के उन्हें लगातार अस्पताल में हिरासत में कैसे रखा जा सकता है.
याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि पूर्व में हाईकोर्ट ने केवल सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर नजर रखने के निर्देश दिए थे। उनका कहना है कि स्वास्थ्य निगरानी का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में रखा जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित याचिका में न तो सोनम वांगचुक और न ही उनकी पत्नी को पक्षकार बनाया गया था। बता दें कि सोनम वांगचुक 28 जून से लगातार अनशन पर थे. ये अनशन नीट पेपर समेत दूसरी परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक होने की घटनाओं के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के लिए किया जा रहा है. सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को जंतर-मंतर से हटाने के बाद भी वहां धरना जारी है. अब वहां छात्र संगठनों के नेताओं ने अनशन शुरु कर दिया है जिनमें जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष शामिल हैं.
सोनम वांगचुक ने 28 जून से अनशन शुरू किया था। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और विभिन्न परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो। उनके समर्थन में विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी प्रदर्शन किया। सोनम वांगचुक के अस्पताल ले जाए जाने के बाद भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन समाप्त नहीं हुआ। जानकारी के अनुसार कई छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने अनशन जारी रखा है। प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक और छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हैं और वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को चिकित्सकीय कारणों से अस्पताल में भर्ती किया जाता है तो उसके अधिकारों और सहमति का भी ध्यान रखना आवश्यक होता है। हालांकि यदि प्रशासन यह मानता है कि किसी व्यक्ति की जान को खतरा है तो परिस्थितियों के अनुसार चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जा सकता है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होता है। अब इस पूरे मामले पर सबकी नजर दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत यह तय करेगी कि—सोनम वांगचुक को अस्पताल में रखने की प्रक्रिया कानूनसम्मत है या नहीं। उन्हें किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए या नहीं। परिवार और निजी चिकित्सकों से मिलने की अनुमति दी जाए या नहीं। अदालत के निर्देश के बाद ही मामले की अगली स्थिति स्पष्ट होगी।
सोनम वांगचुक के अनशन, अस्पताल में भर्ती किए जाने और उनकी पत्नी द्वारा दायर याचिका ने इस पूरे मामले को नया कानूनी मोड़ दे दिया है। फिलहाल मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है। अदालत के आदेश के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। इस बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी जारी है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
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