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प्रयागराज।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में करोड़ों रुपये मूल्य की एक कोठी की रजिस्ट्री में कथित तौर पर लाखों रुपये के स्टाम्प शुल्क की चोरी का मामला सामने आया है। जांच के बाद जिलाधिकारी ने खरीदार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 20 लाख रुपये से अधिक की वसूली, जुर्माना और ब्याज जमा कराने के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन की जांच में यह पाया गया कि संपत्ति का वास्तविक मूल्य रजिस्ट्री में दर्शाए गए मूल्य से काफी अधिक था, जिसके कारण स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क कम जमा किया गया। जिलाधिकारी ने आदेश में स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय के भीतर राशि जमा नहीं करने पर इसकी वसूली भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह की जाएगी। इस कार्रवाई को संपत्ति पंजीकरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और राजस्व की हानि रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
करोड़ों की कोठी की रजिस्ट्री में लाखों की स्टाम्प चोरी डीएम ने दिए 20 लाख की वसूली के आदेश प्रयागराज,18 जुलाई (आरएनएस )। प्रयागराज में करोड़ों रुपए की एक कोठी की रजिस्ट्री में लाखों रुपए की स्टाम्प शुल्क चोरी का मामला सामने आया है। जांच के बाद जिलाधिकारी ने खरीदार पर 20 लाख रुपये से अधिक की वसूली, जुर्माना और ब्याज लगाने का आदेश दिया है। जांच में पता चला कि 3.62 करोड़ रुपए में दर्ज की गई कोठी का वास्तविक मूल्य करीब 5.23 करोड़ रुपए था। इसी वजह से 18.54 लाख रुपए का स्टाम्प शुल्क और 1.61 लाख रुपए का पंजीकरण शुल्क कम जमा किया गया।
मामला प्रयागराज के प्रतिष्ठित म्योर रोड स्थित पुराने बंगला नंबर 20 (नया नंबर 38) से जुड़ा है। दस्तावेजों के अनुसार यह कोठी 20 फरवरी 2021 को 3.62 करोड़ रुपये में बेची गई थी। रजिस्ट्री के समय स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क भी इसी घोषित मूल्य के आधार पर जमा किया गया। कुछ समय बाद स्थानीय स्तर पर शिकायत मिली कि संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य कहीं अधिक था और कम मूल्य दिखाकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू की।
मामले की जांच सहायक महानिरीक्षक निबंधन द्वारा की गई। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और आसपास की संपत्तियों के मूल्य का तुलनात्मक अध्ययन किया। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि उसी परिसर के एक हिस्से की अलग रजिस्ट्री अधिक मूल्य पर की गई थी। इससे अधिकारियों को संदेह हुआ कि पूरी संपत्ति का मूल्य भी वास्तविकता से कम दर्शाया गया है। इसके बाद जमीन, भवन, बाउंड्रीवाल, मुख्य गेट और अन्य निर्माणों का अलग-अलग मूल्यांकन किया गया।
नोटिस के बावजूद खरीदार सुनवाई में पेश नहीं हुआ, जिसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया गया। आदेश के मुताबिक 15 दिन में राशि जमा नहीं करने पर भू-राजस्व की तरह वसूली की जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला म्योर रोड स्थित पुराने बंगला नंबर 20 (नया नंबर 38) का है। 20 फरवरी 2021 को यह कोठी 3.62 करोड़ रुपए में बेची गई थी। रजिस्ट्री के समय उसी आधार पर स्टाम्प शुल्क जमा कराया गया था। कुछ स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि संपत्ति का मूल्य कम दिखाकर स्टाम्प शुल्क बचाया गया है। इसके बाद सहायक महानिरीक्षक निबंधन ने मौके पर जाकर जांच की। जांच में पता चला कि इसी परिसर के एक हिस्से की दूसरी रजिस्ट्री ज्यादा दर पर हुई थी। इससे लगा कि पूरी संपत्ति का मूल्य भी अधिक होना चाहिए था। जांच के बाद अधिकारियों ने जमीन, बने हुए मकान, बाउंड्रीवाल और गेट सहित पूरी संपत्ति का मूल्य करीब 5.23 करोड़ रुपए माना। इस हिसाब से स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क पहले जमा की गई राशि से काफी ज्यादा बनता था।
विस्तृत जांच और मूल्यांकन के बाद अधिकारियों ने संबंधित कोठी का वास्तविक मूल्य लगभग 5.23 करोड़ रुपये निर्धारित किया। यानी रजिस्ट्री में दर्शाए गए 3.62 करोड़ रुपये और वास्तविक मूल्य के बीच करीब 1.61 करोड़ रुपये का अंतर पाया गया। यही अंतर आगे चलकर स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क की कम वसूली का कारण बना।
जांच में पाया गया कि रजिस्ट्री के समय 18.54 लाख रुपए का स्टाम्प शुल्क और 1.61 लाख रुपए का पंजीकरण शुल्क कम जमा किया गया था। इसी आधार पर मामला जिलाधिकारी के सामने भेजा गया। जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार खरीदार को नोटिस भेजा गया था, लेकिन उन्होंने न तो कोई जवाब दिया और न ही सुनवाई में उपस्थित हुए। इसके बाद उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया गया।
जिलाधिकारी ने खरीदार को 18.54 लाख रुपए का अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क, 1.61 लाख रुपए का पंजीकरण शुल्क, 50 हजार रुपए का जुर्माना और फरवरी 2021 से भुगतान की तारीख तक 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज जमा करने का आदेश दिया है। तय समय में भुगतान नहीं होने पर पूरी राशि की वसूली भू-राजस्व की तरह की जाएगी।
जांच रिपोर्ट के अनुसार रजिस्ट्री के समय—18.54 लाख रुपये का स्टाम्प शुल्क कम जमा किया गया। 1.61 लाख रुपये का पंजीकरण शुल्क भी कम जमा हुआ। मामला जांच पूरी होने के बाद जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां उपलब्ध दस्तावेजों और रिपोर्ट के आधार पर अंतिम निर्णय लिया गया। प्रशासन की ओर से खरीदार को विधिवत नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। हालांकि प्रशासन के अनुसार खरीदार न तो सुनवाई में उपस्थित हुए और न ही कोई लिखित जवाब प्रस्तुत किया। इसके बाद जिलाधिकारी ने उपलब्ध अभिलेखों और जांच रिपोर्ट के आधार पर एकतरफा निर्णय पारित किया।
जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार खरीदार को निम्न राशि जमा करनी होगी—18.54 लाख रुपये अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क 1.61 लाख रुपये पंजीकरण शुल्क 50 हजार रुपये जुर्माना फरवरी 2021 से भुगतान की तिथि तक 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज प्रशासन ने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर राशि जमा नहीं की गई तो पूरी रकम की वसूली भू-राजस्व की तरह की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति की खरीद-फरोख्त में वास्तविक मूल्य छिपाकर कम स्टाम्प शुल्क जमा करना सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में जिला प्रशासन जांच के बाद अतिरिक्त शुल्क, जुर्माना और ब्याज वसूल सकता है। आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। प्रयागराज का यह मामला संकेत देता है कि अब संपत्ति पंजीकरण से जुड़े मामलों में प्रशासन तकनीकी और दस्तावेजी जांच के माध्यम से अनियमितताओं पर लगातार नजर रख रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि संपत्ति का सही मूल्यांकन और वैध स्टाम्प शुल्क जमा कराना प्रत्येक खरीदार और विक्रेता की जिम्मेदारी है। यदि किसी भी स्तर पर कम मूल्य दर्शाकर रजिस्ट्री कराई जाती है तो बाद में जांच होने पर अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क, पंजीकरण शुल्क, जुर्माना और ब्याज की वसूली की जा सकती है। प्रयागराज में करोड़ों रुपये की कोठी की रजिस्ट्री में कथित स्टाम्प शुल्क चोरी का यह मामला प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है। जांच के बाद जिलाधिकारी द्वारा 20 लाख रुपये से अधिक की वसूली का आदेश यह स्पष्ट करता है कि संपत्ति पंजीकरण में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता को गंभीरता से लिया जा रहा है। यह कार्रवाई भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगाने और सरकारी राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
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