जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े कथित टिप्पणी मामले में नोएडा युवती के खिलाफ FIRजंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े कथित टिप्पणी मामले में नोएडा युवती के खिलाफ FIR

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नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर नोएडा की एक युवती के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी का कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने विरोध किया है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे आपराधिक कानून के इस्तेमाल का अनुचित उदाहरण बताया है। वहीं, पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ CJP की ओर से युवती के खिलाफ दर्ज मामले को वापस लेने की मांग की जा रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की बात कह रही है।

प्रधानमंत्री मोदी को गाली देने वाली नोएडा की युवती के खिलाफ एफआईआर पर सीजेपी का विरोध नई दिल्ली,31 जुलाई(आरएनएस)। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी करने वाली युवती रुचिका सिंह के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी का कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने विरोध किया है। 

जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है मामला

जानकारी के अनुसार, 23 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इसी प्रदर्शन के दौरान नोएडा निवासी युवती रुचिका सिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया है। बाद में इस कथित टिप्पणी से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो सामने आने के बाद गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह ने नोएडा के एक्सप्रेस-वे थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत को आधार बनाते हुए जीरो एफआईआर दर्ज की। जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले को आगे की जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित थाना क्षेत्र को भेजा गया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।

पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने सामाजिक माध्यम एक्स पर पुलिस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए इसे आपराधिक न्याय व्यवस्था का दुरुपयोग करार दिया। bसौरव दास ने अपने संदेश में लिखा कि रुचिका सिंह के खिलाफ आपराधिक कानून का गलत इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा अपशब्द कहने मात्र से आपराधिक मामला नहीं बनता। उन्होंने यह भी दावा किया कि लोकसभा के लगभग 50 प्रतिशत सांसदों के विरुद्ध आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें करीब 100 सांसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हैं। उनके अनुसार, पुलिस को अपनी ऊर्जा ऐसे मामलों पर खर्च करनी चाहिए, न कि 25 वर्ष की एक युवती के खिलाफ।

पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि एफआईआर दर्ज होना जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी। इस मामले में अभी यह अंतिम रूप से नहीं कहा जा सकता कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोप सही पाए गए हैं। पुलिस की जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही मामले के तथ्यों पर स्थिति स्पष्ट होगी।

उन्होंने कहा कि युवाओं को परेशान करना तत्काल बंद किया जाना चाहिए और सवाल उठाया कि इस देश में गाली देना कब से अपराध बन गया। रुचिका सिंह का कथित रूप से प्रधानमंत्री के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए वीडियो सामाजिक माध्यमों पर सामने आने के बाद गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह ने नोएडा के एक्सप्रेस-वे थाने में शून्य प्राथमिकी (जीरो एफआईआर) दर्ज कराई। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने युवती के खिलाफ आपराधिक कानून के इस्तेमाल को अनुचित बताया और दावा किया कि केवल कथित अपशब्दों के आधार पर इस तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

सौरव दास ने युवती की उम्र का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस को युवाओं को परेशान करने के बजाय अन्य गंभीर मामलों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को आपराधिक न्याय व्यवस्था के कथित दुरुपयोग से जोड़ते हुए मामले को लेकर सवाल उठाए। CJP की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि किसी टिप्पणी को लेकर प्रधानमंत्री को आपत्ति है तो उनके पास उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, पार्टी की ओर से की गई इन टिप्पणियों को संबंधित राजनीतिक पक्ष की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। मामले की वास्तविक कानूनी स्थिति पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

शिकायत के अनुसार, 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह ने प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। रुचिका सिंह नोएडा के सेक्टर-168 की निवासी बताई गई हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित थाना क्षेत्र को प्रेषित कर दिया है। सौरव दास ने कहा कि एक युवती के विरुद्ध इस प्रकार की पुलिस कार्रवाई कर उदाहरण प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि ऐसी कार्रवाई बंद की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री को संबंधित टिप्पणी से आपत्ति है, तो वे चाहें तो मानहानि का दीवानी या विधिक उपाय अपना सकते हैं।

मामले में पुलिस का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के बाद आवश्यक जांच की जा रही है। जांच के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री, सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो तथा अन्य संबंधित साक्ष्यों की जांच की जा सकती है। पुलिस के मुताबिक, उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। वहीं, यदि किसी आरोप को लेकर पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलता है तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उसी के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा। इस तरह फिलहाल मामला जांच के स्तर पर है और युवती के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत सोशल मीडिया पर सामने आए कथित वीडियो से हुई। ऐसे मामलों में सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की सत्यता और संदर्भ की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण होती है। वायरल वीडियो के आधार पर अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं, इसलिए पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां उपलब्ध मूल सामग्री और अन्य साक्ष्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करती हैं। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग पुलिस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं, जबकि CJP समेत कुछ पक्ष इसे अनुचित कार्रवाई बता रहे हैं।

युवती के खिलाफ एफआईआर का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन गया है। CJP ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए युवती के पक्ष में आवाज उठाई है। पार्टी का कहना है कि कानून का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से परेशान करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत जांचा जाना है। किसी भी शिकायत पर कार्रवाई करते समय पुलिस को उपलब्ध साक्ष्यों और कानून में निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ना होता है। मामले में अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच अब पुलिस जांच की रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में नोएडा निवासी युवती के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। CJP ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया है, जबकि पुलिस मामले की जांच कर रही है। आगे की स्थिति जांच में सामने आने वाले तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट होगी।

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By ATHAR

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