हरिद्वार में किशोर न्याय अधिनियम के दस वर्ष पूरे होने पर आयोजित राज्य स्तरीय हितधारक परामर्शहरिद्वार में किशोर न्याय अधिनियम के दस वर्ष पूरे होने पर आयोजित राज्य स्तरीय हितधारक परामर्श

रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

सबसे सटीक ज्वालापुर टाइम्स न्यूज़…

हरिद्वार 2026। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के क्रियान्वयन के एक दशक पूरे होने के अवसर पर हरिद्वार में राज्य स्तरीय हितधारक परामर्श का आयोजन किया गया। “किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 : क्रियान्वयन के एक दशक की समीक्षा एवं भावी दिशा” विषय पर आयोजित इस परामर्श में उत्तराखंड में बाल संरक्षण और किशोर न्याय व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड उच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति की ओर से महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, उत्तराखंड सरकार के सहयोग से किया गया। हयात प्लेस, बहादराबाद, हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम का आयोजन मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में हुआ। परामर्श में न्यायपालिका, पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, पंचायती राज और बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में 180 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि किसी भी कानून का प्रभावी क्रियान्वयन उसकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने किशोर न्याय अधिनियम के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं से व्यावहारिक और क्रियान्वयन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता गैब्रिएला मिस्ट्राल के कथन का उल्लेख करते हुए बच्चों के विकास और उनके भविष्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि किसी कानून को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जाता तो उसके उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल करना कठिन हो जाता है। उन्होंने परामर्श में शामिल सभी हितधारकों से बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए समन्वय के साथ काम करने की आवश्यकता बताई।

हरिद्वार में किशोर न्याय अधिनियम के दस वर्ष पूरे होने पर आयोजित राज्य स्तरीय हितधारक परामर्श

दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत

राज्य स्तरीय परामर्श की शुरुआत मुख्य न्यायाधीश और उपस्थित न्यायाधीशों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। इस अवसर पर मातृ आंचल कन्या विद्यालय, राजागार्डन, हरिद्वार की छात्राओं तथा राजकीय बाल देखरेख गृह, रोशनाबाद, हरिद्वार की बालिकाओं ने सामूहिक रूप से सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को सम्मानित भी किया गया। मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य न्यायाधीशों की धर्मपत्नीगण की ओर से छात्राओं और बालिकाओं को उपहार प्रदान किए गए। इस अवसर पर बच्चों की सहभागिता ने कार्यक्रम के बाल-केंद्रित उद्देश्य को भी सामने रखा।

स्वागत भाषण देते हुए माननीय न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय ने सभी विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा बाल संरक्षण के क्षेत्र में सभी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उत्तराखण्ड में किशोर न्याय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल देते हुए कहा कि राज्य के दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों सहित प्रत्येक बच्चे को गरिमा, देखरेख, संरक्षण एवं समुचित सहयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए

इस परामर्श में 180 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की, जिनमें उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल एवं अन्य रजिस्ट्रार, निदेशक उजाला, सचिव (विधि एवं विधिक परामर्शदाता), सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष, सभी जनपदों के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पॉक्सो एवं एफटीएससी न्यायालयों के न्यायाधीश, सभी किशोर न्याय बोर्डों के प्रधान मजिस्ट्रेट तथा पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण एवं पंचायती राज विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।

किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष ने पुनर्वास को बताया महत्वपूर्ण

किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने अपने मुख्य वक्तव्य में किशोर न्याय अधिनियम के पिछले दस वर्षों के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उद्घाटन सत्र का समापन श्री योगेश कुमार गुप्ता, रजिस्ट्रार जनरल, उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि“आइए, हम सब मिलकर प्रत्येक बच्चे के लिए सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और पोषणकारी वातावरण के निर्माण हेतु एकजुट होकर कार्य करें।

दिनभर चले इस परामर्श में पाँच तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें दत्तक ग्रहण, देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे, विधि के साथ संघर्षरत बच्चे, प्रारम्भिक मूल्यांकन तथा किशोर न्याय अधिनियम, 2015 का समग्र अवलोकन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

श्री प्रदीप पंत, निदेशक उजाला, श्री चंद्रेश यादव, सचिव महिला कल्याण एवं वाल विकास, सुश्री भावना सक्सेना, CEO कारा, भारत सरकार, सुश्री निवेदिता कुकरेती, आईजी कुमाऊं, राजीव भल्ला, अनाथ शिशु पालन ट्रस्ट, संगीता गौड़ इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन, सुश्री स्नेहा सिंह, एडवोकेट, श्री विक्रम श्रीवास्तव , एडवोकेट एंड फाउंडर इंडिपेंडेंट थॉट, श्री विजय दीक्षित, सुपरिंटेंडेंट स्पेशल होम्स, रोशनाबाद, हरिद्वार एवं श्री रघुवरदत्त तिवारी पूर्व चेयरपर्सन एचडब्ल्यूसी, देहरादून ने विशेषज्ञ/ वक्ता के रूप में विभिन्न तकनीकी सत्रों में योगदान दिया l

जिला न्यायाधीश हरिद्वार श्री नरेन्द्र दत्त एवं रजिस्ट्रार/ सचिव किशोर न्याय समिति उच्च न्यायालय नैनीताल श्री विक्रम एवं जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित के नेतृत्व में जिला न्यायालय एवं जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी l

यह भी पढ़ें –  खरीफ खरीद सत्र 2026-27 की तैयारी तेज हरिद्वार में 48 धान क्रय केंद्र संचालित होंगे…

उत्तराखंड की सभी ताज़ा और महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए ज्वालापुर टाइम्स न्यूज़ WHATSAPP GROUP से जुड़ें और अपडेट सबसे पहले पाएं

 यहां क्लिक करें एक और हर अपडेट आपकी उंगलियों पर!

यदि आप किसी विज्ञापन या अपने क्षेत्र/इलाके की खबर को हमारे न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित कराना चाहते हैं, तो कृपया 7060131584 पर संपर्क करें। आपकी जानकारी को पूरी जिम्मेदारी और भरोसे के साथ प्रसारित किया जाएगा।”

By ATHAR

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *