ऋषिकुल मैदान में बनेगा भव्य शोध संस्थान, भारतीय संस्कृति को मिलेगा नया मंचऋषिकुल मैदान में बनेगा भव्य शोध संस्थान, भारतीय संस्कृति को मिलेगा नया मंच

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हरिद्वार, 25 जून। उत्तराखंड सरकार भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और प्राच्य विद्याओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाओं के अंतर्गत हरिद्वार स्थित ऋषिकुल मैदान में भव्य ‘मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान’ की स्थापना की जाएगी। यह संस्थान भारतीय ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति, योग, ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, दर्शन और वैदिक अध्ययन जैसे विषयों के संरक्षण, शोध और प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा।

गुरुवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ऋषिकुल मैदान का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रस्तावित संस्थान के लिए उपलब्ध भूमि, आधारभूत सुविधाओं तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

परियोजना की रूपरेखा पर हुई विस्तृत समीक्षा

स्थलीय निरीक्षण के बाद प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) के सभागार में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रस्तावित शोध संस्थान की विस्तृत कार्ययोजना, भूमि संबंधी विषयों, मूर्ति स्थापना, चारदीवारी निर्माण, मंच निर्माण, पार्किंग व्यवस्था और अन्य आधारभूत संरचनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

अधिकारियों ने परियोजना की रूपरेखा को पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तुत किया। बैठक में संस्थान के निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करते हुए इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने की रणनीति तैयार की गई।

एक सप्ताह में मांगी गई विभागीय कार्ययोजना

प्रमुख सचिव ने बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और एक सप्ताह के भीतर अपनी-अपनी विस्तृत कार्ययोजना उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है, इसलिए इसके क्रियान्वयन में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।

ऋषिकुल मैदान में बनेगा भव्य शोध संस्थान, भारतीय संस्कृति को मिलेगा नया मंच

उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन स्तर पर होने वाली समस्त कार्यवाही के लिए सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं जिला स्तर पर परियोजना से संबंधित सभी कार्यों के समन्वय और निगरानी की जिम्मेदारी जिलाधिकारी मयूर दीक्षित को सौंपी गई है।

भारतीय संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान के संरक्षण का बनेगा केंद्र

प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने कहा कि प्रस्तावित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित होगा। यह संस्थान न केवल प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपराओं के अध्ययन और शोध को बढ़ावा देगा बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी कार्य करेगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए ऐसे संस्थानों की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है। हरिद्वार जैसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहर में इस संस्थान की स्थापना से देश-विदेश के शोधार्थियों और विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।

योग, ज्योतिष, वास्तु और वेदों पर होगा शोध

प्रस्तावित शोध संस्थान में योग, ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, भारतीय दर्शन, वैदिक अध्ययन, भारतीय कला एवं संस्कृति सहित विभिन्न प्राच्य विषयों पर शोध और अध्ययन की विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

हरिद्वार को मिली बड़ी सौगात, योग-वेद-ज्योतिष शोध का बनेगा राष्ट्रीय केंद्र

इसके अलावा संस्थान में प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार और शोध परियोजनाएं भी संचालित की जाएंगी। इससे भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को व्यवस्थित रूप से संरक्षित करने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संस्थान भारतीय परंपरागत ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने और वैश्विक मंच पर उसकी पहचान मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हरिद्वार को मिलेगा एक और बड़ा शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक केंद्र

धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी हरिद्वार पहले से ही योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। ऐसे में मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान की स्थापना से शहर की पहचान को और अधिक मजबूती मिलेगी।

यह संस्थान देशभर के शोधार्थियों, विद्वानों, विद्यार्थियों और संस्कृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

भारतीय संस्कृति को मिलेगा नया मंच

सरकार का मानना है कि संस्थान के विकसित होने के बाद हरिद्वार भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राच्य अध्ययन के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा।

वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया बैठक में हिस्सा

इस महत्वपूर्ण बैठक में सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल, सचिव आयुष रंजना राजगुरु, महानिदेशक संस्कृति एवं भाषा युगल किशोर पंत, कुंभ मेलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एचआरडीए सचिव प्रत्यूष सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट हर गिरी, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. स्वास्तिक, जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में सभी अधिकारियों ने परियोजना को सफलतापूर्वक धरातल पर उतारने के लिए आपसी समन्वय और समयबद्ध कार्यवाही पर सहमति व्यक्त की। हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में प्रस्तावित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान उत्तराखंड सरकार की एक दूरदर्शी पहल मानी जा रही है। यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और प्राच्य विद्याओं के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ शोध और प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। परियोजना के पूर्ण होने के बाद हरिद्वार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

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By ATHAR

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