उत्तराखंड में बिजली आपूर्ति मजबूत करने के लिए 2030 तक 21 नए सब स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइनों के विस्तार की योजना।उत्तराखंड में बिजली आपूर्ति मजबूत करने के लिए 2030 तक 21 नए सब स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइनों के विस्तार की योजना।

रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

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देहरादून। उत्तराखंड में गर्मियों के दौरान बिजली कटौती और ओवरलोडिंग की समस्या से लोगों को राहत दिलाने के लिए बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। मई और जून के महीनों में बिजली की मांग बढ़ने के कारण कई क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर और बिजली लाइनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए राज्य में बिजली के बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाएगा। योजना के तहत वर्ष 2030 तक 21 नए सब स्टेशन बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही ट्रांसमिशन लाइनों का विस्तार कर बिजली पहुंचाने की क्षमता बढ़ाई जाएगी।

राज्य में गर्मियों के दौरान बिजली की अधिकतम मांग लगभग 2800 मेगावाट तक पहुंच जाती है। ऐसे में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को इस तरह तैयार करने की जरूरत महसूस की जा रही है, जिससे बढ़ती मांग के बावजूद उपभोक्ताओं को बेहतर आपूर्ति मिल सके। नए सब स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइनों के विस्तार से बिजली वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

गर्मियों में 2800 मेगावाट तक पहुंच जाती है बिजली की मांग

उत्तराखंड में हर साल गर्मियों के दौरान बिजली की मांग में तेजी से बढ़ोतरी होती है। खासकर मई और जून में तापमान बढ़ने के साथ घरों, कार्यालयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक इकाइयों में बिजली की खपत बढ़ जाती है। एयर कंडीशनर, कूलर, पंखे और अन्य विद्युत उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने से बिजली की मांग अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस दौरान राज्य में बिजली का लोड करीब 2800 मेगावाट तक पहुंच सकता है।

बिजली की मांग बढ़ने का सीधा असर आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ता है। ट्रांसफार्मर और बिजली लाइनों पर उनकी निर्धारित क्षमता से अधिक दबाव पड़ने पर तकनीकी खराबी की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में बिजली आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए कई बार संबंधित क्षेत्रों में अस्थायी कटौती करनी पड़ती है। यही वजह है कि ऊर्जा विभाग और संबंधित बिजली संस्थाएं भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही हैं।

बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने की योजना में 21 नए सब स्टेशनों का निर्माण महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन्हें वर्ष 2030 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। सब स्टेशन बिजली वितरण व्यवस्था का अहम हिस्सा होते हैं। इनके माध्यम से बिजली को अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया पूरी की जाती है। नए सब स्टेशन बनने से मौजूदा नेटवर्क पर पड़ने वाला दबाव कम करने और बिजली आपूर्ति को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिल सकती है।

राज्य में आबादी बढ़ने, शहरी क्षेत्रों के विस्तार और औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ बिजली की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल मौजूदा संसाधनों के आधार पर भविष्य की मांग को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। नए सब स्टेशनों के निर्माण से उन क्षेत्रों में भी आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने का अवसर मिलेगा, जहां आने वाले वर्षों में बिजली की खपत बढ़ने की संभावना है।

सब स्टेशन बनाने के साथ बिजली ट्रांसमिशन लाइनों का विस्तार भी प्रस्तावित योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बिजली उत्पादन केंद्रों से विभिन्न क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने में ट्रांसमिशन नेटवर्क की अहम भूमिका होती है। यदि बिजली की मांग बढ़ती है और ट्रांसमिशन व्यवस्था की क्षमता पर्याप्त नहीं होती, तो आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए नए सब स्टेशनों के साथ ट्रांसमिशन लाइनों की क्षमता और नेटवर्क का विस्तार करना जरूरी माना जा रहा है।

इस दिशा में किए जाने वाले कार्यों से बिजली को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था अधिक सक्षम बनाई जा सकेगी। इससे बढ़ती मांग के समय बिजली आपूर्ति को संभालने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा बिजली नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से तकनीकी बाधाओं को कम करने और भविष्य में नए उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने में भी सुविधा हो सकती है।

ओवरलोडिंग के कारण क्यों होती है बिजली कटौती

गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने के साथ सबसे बड़ी चुनौती ट्रांसफार्मरों और बिजली लाइनों पर बढ़ने वाला अतिरिक्त भार होता है। जब किसी क्षेत्र में बिजली की खपत उपलब्ध क्षमता से अधिक हो जाती है, तो ट्रांसफार्मर ओवरलोड होने लगते हैं। इससे उपकरणों के गर्म होने, तकनीकी खराबी आने और बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है।

कई बार ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफार्मर में आग लगने जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं। इसके अलावा बिजली लाइनों में फॉल्ट और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या पैदा हो सकती है। इन परिस्थितियों में बिजली विभाग को सुरक्षा और तकनीकी कारणों से कुछ समय के लिए बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़ती है। इसका असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और औद्योगिक इकाइयों पर भी पड़ता है। विशेष रूप से तेज गर्मी के दौरान बिजली कटौती होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और ओवरलोडिंग के कारण एयर कंडीशनर सहित अन्य विद्युत उपकरणों के संचालन पर भी असर पड़ता है।

बिजली की खपत केवल गर्मियों में ही नहीं बढ़ रही है, बल्कि राज्य के विकास और नई सुविधाओं के विस्तार के साथ भविष्य में भी मांग बढ़ने की संभावना है। घरों में आधुनिक विद्युत उपकरणों का इस्तेमाल, नए आवासीय क्षेत्र, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और औद्योगिक गतिविधियां बिजली की आवश्यकता को बढ़ा रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2030 तक 21 नए सब स्टेशन बनाने और ट्रांसमिशन लाइनों का विस्तार करने की योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समय पर इन परियोजनाओं को पूरा किया जाता है तो राज्य की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल इस योजना का उद्देश्य बिजली नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना और गर्मियों में बढ़ने वाले अधिकतम लोड को बेहतर तरीके से संभालना है। हालांकि, नए सब स्टेशन बनने से बिजली कटौती पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, इसकी गारंटी नहीं मानी जा सकती। बिजली आपूर्ति पर मौसम, तकनीकी खराबी, बिजली उपलब्धता और रखरखाव जैसे कई कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।

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