देहरादून में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से पहले उत्तराखंड एसटीएफ की सुरक्षा तैयारियां और शहजाद भट्टी नेटवर्क पर साइबर निगरानी।देहरादून में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से पहले उत्तराखंड एसटीएफ की सुरक्षा तैयारियां और शहजाद भट्टी नेटवर्क पर साइबर निगरानी।

रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

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देहरादून। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के देहरादून दौरे और दीपावली पर्व को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने और उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने की कथित कोशिशों को देखते हुए शहजाद भट्टी नेटवर्क पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। एसटीएफ ने साइबर पेट्रोलिंग तेज करने के साथ संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट और विभिन्न ऑनलाइन ग्रुपों की गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था की है।

एसटीएफ के अनुसार, देहरादून में पहले भी इस नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध संपर्क सामने आ चुके हैं। पुलिस ने इस मामले में 20 से अधिक लोगों को ट्रेस कर सर्विलांस पर लिया था। इनमें से 10 से ज्यादा लोगों की काउंसिलिंग भी कराई गई थी। सुरक्षा एजेंसियां अब सोशल मीडिया पर मिलने वाले इनपुट का सत्यापन कर रही हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि किसी भी वीवीआईपी दौरे, बड़े सार्वजनिक आयोजन या दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्व से पहले सभी सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ अलर्ट रहती हैं। इसमें खुफिया विभाग (IB) और अन्य संबंधित विभागों के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है। प्राप्त होने वाले प्रत्येक महत्वपूर्ण इनपुट का फील्ड स्तर पर सत्यापन किया जाता है।

अमित शाह के दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के देहरादून दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वीवीआईपी दौरे के दौरान किसी भी प्रकार की अवांछनीय गतिविधि को रोकने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाया जाता है। एसटीएफ का कहना है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल ऑनलाइन जानकारी के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाती, बल्कि प्राप्त सूचनाओं की वास्तविकता की जांच भी की जाती है। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में फील्ड स्तर पर जानकारी जुटाई जाती है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य सुरक्षा एजेंसियों की मदद ली जाती है।

दीपावली के दौरान बाजारों, सार्वजनिक स्थानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में गतिविधियां बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने, संदिग्ध संदेश प्रसारित करने और लोगों को गुमराह करने जैसी गतिविधियों पर भी नजर रखना जरूरी हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए एसटीएफ ने अपनी निगरानी व्यवस्था को सक्रिय किया है।

प्रेमनगर में पहले भी सामने आ चुका है नेटवर्क का कनेक्शन

देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध संपर्कों का मामला पहले भी सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने विक्रांत कश्यप नाम के एक संदिग्ध आरोपी को गिरफ्तार किया था। पुलिस के आरोपों के अनुसार, विक्रांत कश्यप ने क्षेत्र में कुछ कैमरे लगाए थे और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संदिग्ध लोगों तक जानकारी पहुंचाने का काम कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मामले की जांच का दायरा बढ़ाया और संबंधित सोशल मीडिया ग्रुपों तथा संपर्कों की पड़ताल शुरू की।

जांच के दौरान 20 से अधिक ऐसे लोगों को ट्रेस किया गया, जिनके संदिग्ध ग्रुपों से संपर्क होने की जानकारी सामने आई थी। इन लोगों को सर्विलांस पर लेकर उनकी गतिविधियों की निगरानी की गई। इनमें से 10 से ज्यादा लोगों की काउंसिलिंग भी कराई गई, ताकि उनकी भूमिका और गतिविधियों को समझा जा सके। पुलिस का उद्देश्य ऐसे मामलों में शुरुआत में ही संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना और युवाओं को किसी भी गलत प्रभाव में आने से रोकना है।

एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह के अनुसार, भट्टी नेटवर्क पिछले एक साल से अधिक समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और विभिन्न ऑनलाइन ग्रुपों के माध्यम से सक्रिय बताया जा रहा है। जांच में यह बात सामने आई है कि सीमा पार से अलग-अलग सोशल मीडिया आईडी के जरिए युवाओं से संपर्क करने और उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों में ऑनलाइन बातचीत, सोशल मीडिया गतिविधियों और संदिग्ध संपर्कों की जांच महत्वपूर्ण होती है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करती है कि किसी व्यक्ति का संपर्क किन लोगों से है और उसे किस प्रकार की सामग्री भेजी जा रही है।

एसटीएफ के मुताबिक, उत्तराखंड में इस तरह के मामलों में दो मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और गिरफ्तारियां भी हुई हैं। जांच एजेंसियां इन मामलों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और अन्य जानकारियों का विश्लेषण कर रही हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की ऑनलाइन मौजूदगी या किसी ग्रुप से जुड़ाव मात्र को अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसलिए पुलिस की ओर से तथ्यों का सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

एसटीएफ की कार्रवाई केवल निगरानी और कानूनी कदमों तक सीमित नहीं है। पुलिस ऐसे मामलों में युवाओं और उनके परिजनों की काउंसिलिंग पर भी ध्यान दे रही है। यदि किसी युवा के संदिग्ध ऑनलाइन संपर्क या गतिविधियों की जानकारी सामने आती है तो शुरुआती स्तर पर परिवार के सदस्यों को भी प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।

इसका उद्देश्य युवाओं को गलत जानकारी, भ्रामक प्रचार और संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों के प्रभाव से बचाना है। यदि जांच में किसी आपराधिक गतिविधि की आशंका सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है। एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ काम कर रही हैं और किसी भी महत्वपूर्ण सूचना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है।

फिलहाल अमित शाह के दौरे और दीपावली के मद्देनजर उत्तराखंड में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। एसटीएफ की साइबर कमांडो टीमें सोशल मीडिया पर निगरानी बनाए हुए हैं। पुलिस का प्रयास है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की समय रहते पहचान कर कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएं।

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By ATHAR

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