रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
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हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सशक्त और सक्षम पंचायतें विकसित उत्तराखण्ड की मजबूत नींव हैं। ग्राम स्तर पर योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार विकास को आगे बढ़ाने में पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच महत्वपूर्ण सेतु के रूप में काम करते हैं और स्थानीय समस्याओं को बेहतर तरीके से समझते हैं।
मुख्यमंत्री गुरुवार को हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास के लिए आयोजित एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से जनभागीदारी के आधार पर विकास योजनाएं तैयार करने, विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने तथा पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का आह्वान किया। प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक साथ 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को क्षमता विकास प्रशिक्षण से जोड़ने को मुख्यमंत्री ने ग्राम स्तर पर विकास को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना से काम करने की अपील
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचायत प्रतिनिधियों से ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि अपने क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों और समस्याओं से सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में उनकी भूमिका केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और पात्र लोगों तक उनका लाभ पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। कमजोर और वंचित वर्गों की जरूरतों को पंचायत विकास योजनाओं में विशेष प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने से विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों के सुझाव लिए जाएं और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर कार्यों की प्राथमिकता तय की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पंचायतों को संसाधन, आधारभूत सुविधाएं और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर विकास की नेतृत्वकर्ता संस्थाओं के रूप में सशक्त किया जा रहा है। राज्य सरकार भी इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ जन योजना अभियान के तहत ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। योजनाओं में स्थानीय आवश्यकताओं, जनसुझावों और उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक पंचायत स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और अपेक्षित परिणाम निर्धारित करे, ताकि विकास कार्यों का वास्तविक लाभ ग्रामीणों को मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर पंचायत की विकास योजना में पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताओं का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। ग्राम सभाओं में लोगों के सुझाव लिए जाएं और कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा हो। पंचायत प्रतिनिधि यह भी देखें कि योजनाओं का लाभ वास्तव में किन परिवारों तक पहुंच रहा है। कमजोर और वंचित वर्गों की जरूरतों को विशेष प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। राज्य की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण और 584 की मरम्मत की गई है। एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति तथा कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है। डिजिटल पंचायत का उद्देश्य कामकाज को पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है और इसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। विकास कार्यों की संख्या से अधिक उनका प्रभाव मायने रखता है। सड़कों की गुणवत्ता, पेयजल योजनाओं की उपयोगिता और पंचायत भवनों से मिलने वाली सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।
पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पंचायत की विकास योजना में गांव की बुनियादी जरूरतों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं में लोगों से सुझाव लेने के साथ ही विकास कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए। पंचायत प्रतिनिधियों को यह भी देखना चाहिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से किन परिवारों तक पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचे का निर्माण करना नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। इसी दृष्टि से पंचायतों को योजनाओं की उपयोगिता और परिणामों पर ध्यान देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने पंचायतों के कामकाज में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति और विकास कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल पंचायत व्यवस्था का उद्देश्य पंचायतों के कामकाज को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाना है। डिजिटल माध्यम से योजनाओं और कार्यों की जानकारी उपलब्ध होने से निगरानी और समीक्षा की प्रक्रिया को भी बेहतर बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है और उसके उपयोग का स्पष्ट हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की संख्या से ज्यादा उनका प्रभाव महत्वपूर्ण है। सड़क निर्माण की गुणवत्ता, पेयजल योजनाओं की उपयोगिता और पंचायत भवनों से मिलने वाली सेवाओं की प्रभावशीलता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के सामने अपने-अपने क्षेत्रों को बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है। स्थानीय स्तर पर योजनाओं की पहचान से लेकर उनके क्रियान्वयन और निगरानी तक पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को ग्रामीणों की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ समझना चाहिए और संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर उनके समाधान की दिशा में काम करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर मजबूत व्यवस्था से ही प्रदेश के समग्र विकास को गति मिल सकती है।
एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को उनके दायित्वों, योजनाओं और विकास प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिनिधियों को पंचायत स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और योजनाओं के बेहतर उपयोग की जानकारी मिल सकती है।
राज्य सरकार की ओर से पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास पर जोर दिए जाने के बीच प्रदेश के सभी विकासखंडों में 60 हजार से अधिक प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ना स्थानीय शासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब पंचायतें सक्षम होंगी और ग्रामीणों की भागीदारी से योजनाएं तैयार होंगी, तभी विकास योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई देगा। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से ग्रामीणों की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करते हुए गांवों को विकास की नई दिशा देने का आह्वान किया।
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