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पंतनगर क्षेत्र की संजय कॉलोनी और मस्जिद कॉलोनी में रहने वाले सैकड़ों परिवारों को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी बेदखली नोटिस के बाद मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। प्रभावित परिवारों में असमंजस और चिंता का माहौल है, वहीं स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर जनसमर्थन भी बढ़ता दिखाई दे रहा है।
नोटिस के विरोध में कॉलोनी वासी पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय को ज्ञापन सौंपकर अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाई। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की कि बिना पुनर्वास की व्यवस्था किए किसी भी प्रकार की बेदखली कार्रवाई न की जाए।

ज्ञापन में कॉलोनी वासियों ने बताया कि वे पिछले लगभग 60 से 65 वर्षों से उक्त क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। यहां रहने वाले अधिकांश परिवारों के पास वोटर आईडी, राशन कार्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और बिजली बिल जैसे दस्तावेज मौजूद हैं, जो उनके लंबे समय से यहां रहने का प्रमाण देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने वर्षों में उन्हें कभी किसी प्रकार का बेदखली नोटिस नहीं मिला, लेकिन हाल ही में 13 अप्रैल को अचानक पंतनगर विश्वविद्यालय के परिसंपत्ति अधिकारी द्वारा घर-घर नोटिस चस्पा कर दिया गया।
नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कॉलोनी वासी 30 अप्रैल 2026 तक अपने मकान खाली कर दें, अन्यथा प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि कार्रवाई होती है तो उसका खर्च भी संबंधित निवासियों से वसूला जाएगा। इस नोटिस के बाद कॉलोनी में रहने वाले परिवारों में चिंता और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि वे खुद को अतिक्रमणकारी नहीं मानते, क्योंकि वे दशकों से यहां शांतिपूर्ण तरीके से रह रहे हैं।
कलेक्ट्रेट परिसर में लोगों को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने प्रशासन से संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के जीवन और भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक उचित पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होती, तब तक किसी भी परिवार को हटाना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे को शासन स्तर तक उठाएंगे और प्रभावित लोगों के साथ खड़े रहेंगे।
राजेश शुक्ला ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि विभिन्न मामलों में न्यायालयों द्वारा भी यह स्पष्ट किया गया है कि लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाना उचित नहीं माना जाता। उन्होंने अन्य क्षेत्रों के उदाहरण देते हुए कहा कि कई जगहों पर प्रशासन द्वारा पहले सर्वे कर पुनर्वास की प्रक्रिया अपनाई गई है। ऐसे में पंतनगर क्षेत्र के निवासियों के लिए भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
कॉलोनी वासियों ने प्रशासन के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखीं:
- बिना पुनर्वास किसी भी प्रकार की बेदखली कार्रवाई न की जाए निवासियों की स्थिति का सर्वे कराया जाए लंबे समय से रह रहे परिवारों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए निर्णय लेते समय मानवीय पहलुओं को प्राथमिकता दी जाए
इस पूरे मामले में अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को समझते हुए कोई संतुलित और मानवीय समाधान निकालेगा। स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
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