हरिद्वार में आयोजित चौथी राष्ट्रीय तीरंदाजी चैंपियनशिप में भाग लेते विभिन्न राज्यों के युवा तीरंदाज एवं मंच पर उपस्थित अतिथि।"हरिद्वार में आयोजित चौथी राष्ट्रीय तीरंदाजी चैंपियनशिप में भाग लेते विभिन्न राज्यों के युवा तीरंदाज एवं मंच पर उपस्थित अतिथि।"

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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

हरिद्वार, 16 जून 2026। उत्तराखंड की पावन धरती एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजन की साक्षी बनी, जहां आयोजित चौथी राष्ट्रीय तीरंदाजी चैंपियनशिप में देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों युवा खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के दौरान खेल भावना, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे विषय प्रमुखता से उभरकर सामने आए। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड राज्य ने पिछले कुछ वर्षों में खेलों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। पर्वतीय प्रदेश होने के बावजूद यहां के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अलग पहचान बनाई है। तीरंदाजी जैसी पारंपरिक एवं एकाग्रता आधारित खेल विधाओं को बढ़ावा देने से युवाओं में आत्मविश्वास और अनुशासन का विकास होता है।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने चौथी राष्ट्रीय तीरंदाजी चैंपियनशिप के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी और कहा कि इस प्रकार के आयोजन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही ऐसे आयोजन राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देते हैं। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील बत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि खेल केवल शारीरिक विकास का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह युवाओं में नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और सकारात्मक सोच का भी विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में खेलों के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि देश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।

हरिद्वार में आयोजित चौथी राष्ट्रीय तीरंदाजी चैंपियनशिप में भाग लेते विभिन्न राज्यों के युवा तीरंदाज एवं मंच पर उपस्थित अतिथि।”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए “खेलो इंडिया” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने देश में खेल संस्कृति को मजबूत करने का कार्य किया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है। परिणामस्वरूप आज बड़ी संख्या में युवा खेलों को अपने करियर के रूप में भी देख रहे है राष्ट्रीय तीरंदाजी चैंपियनशिप के संयोजक कुलदीप सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि चौथी राष्ट्रीय तीरंदाजी चैंपियनशिप में देश के 27 राज्यों के 700 से अधिक खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों के प्रतिभागी शामिल हुए हैं। यह आयोजन न केवल खिलाड़ियों के कौशल को निखारने का मंच है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है। कुलदीप सिंह चौहान ने कहा कि प्रतियोगिता का उद्देश्य खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण प्रतिस्पर्धा का अवसर उपलब्ध कराना और ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को आगे लाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन और अधिक व्यापक स्वरूप ग्रहण करेगा।

हरिद्वार में तीरंदाजी का महाकुंभ! 27 राज्यों के 700 खिलाड़ी मैदान में

आरजेके फाउंडेशन के निदेशक कुलदीप चौहान एवं रमेश प्रसाद ने बताया कि इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को वास्तविक सोने से निर्मित स्वर्ण पदक प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा और वे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे। आयोजकों का मानना है कि खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण को सम्मानित करने के लिए विशेष पुरस्कार व्यवस्था की जानी चाहिए। आयोजकों के अनुसार इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन उत्तराखंड तीरंदाजी फाउंडेशन एवं जिला हरिद्वार तीरंदाजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।

प्रतियोगिता को विभिन्न आयु वर्गों के अनुसार चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है, ताकि सभी प्रतिभागियों को समान अवसर मिल सके। वर्तमान में अंडर-13 वर्ग की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें नन्हे खिलाड़ियों का उत्साह देखने लायक रहा। इस अवसर पर पंचायती श्री आनंद अखाड़ा के महंत रचित गिरी एवं पंचदशनाम जूना अखाड़ा की महंत रजनी गिरी ने खिलाड़ियों को आशीर्वचन देते हुए जीवन में अनुशासन, संयम और निरंतर अभ्यास के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि खेल युवाओं को नशे और नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रखकर राष्ट्र निर्माण की दिशा में अग्रसर करते हैं। कार्यक्रम के दौरान डॉ. संजय माहेश्वरी, डॉ. शिव कुमार चौहान, विनय थपलियाल, डॉ. जे.सी. आर्य, मोहन चंद्र पांडे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। आयोजन समिति द्वारा खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गईं। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता ने हरिद्वार को खेल मानचित्र पर नई पहचान देने का कार्य किया है। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के उत्साह और खेल भावना ने यह संदेश दिया कि यदि उचित मंच और अवसर मिले तो देश के युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता के नए आयाम स्थापित कर सकते हैं।

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By ATHAR

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