हरिद्वार के द्वारिका विहार क्षेत्र में पुलिस ने बिछड़े मासूम को उसके परिजनों तक पहुंचाया।हरिद्वार के द्वारिका विहार क्षेत्र में पुलिस ने बिछड़े मासूम को उसके परिजनों तक पहुंचाया।

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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

हरिद्वार। कांवड़ यात्रा और सावन मेले के दौरान हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच पुलिस की जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ पुलिसकर्मियों को श्रद्धालुओं और आम लोगों की सहायता से जुड़े मामलों में भी सक्रिय भूमिका निभानी पड़ती है। इसी क्रम में हरिद्वार पुलिस की सतर्कता और मानवीय पहल का एक मामला सामने आया, जहां ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को एक मासूम बालक अपने परिजनों से बिछड़ा हुआ मिला। पुलिस टीम ने बच्चे के परिजनों की तलाश कर उसे सुरक्षित रूप से उसके मामा के सुपुर्द कर दिया।

जानकारी के अनुसार, हरिद्वार के द्वारिका विहार क्षेत्र में पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान उन्हें एक मासूम बालक मिला, जो अपने परिजनों से अलग हो गया था। बच्चे ने अपना नाम काशी बताया। वह अपने परिवार के संबंध में पूरी जानकारी देने की स्थिति में नहीं था। बच्चे के अकेले मिलने के बाद पुलिसकर्मियों ने उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी। टीम ने बच्चे को अपने संरक्षण में लिया और उसके परिवार तक पहुंचने के प्रयास शुरू किए। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चे के परिजनों का पता लगाना था, क्योंकि मौके पर उसके साथ परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था।

हरिद्वार पुलिस की मुस्तैदी से परिजनों से मिला बिछड़ा मासूम द्वारिका विहार क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान एक मासूम बालक, जिसने अपना नाम काशी बताया था, अपने परिजनों से बिछड़ा हुआ मिला। बच्चे के परिजनों की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस टीम ने अपने स्तर से प्रयास शुरू किए। इस दौरान रिक्रूट कांस्टेबल सचिन, गौरव नेगी, पंकज चौहान तथा मोबाइल गश्त में नियुक्त कांस्टेबल पूरन सिंह ने बच्चे के परिजनों से संपर्क स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास किए।

पुलिसकर्मियों ने बच्चे से मिली जानकारी के आधार पर संभावित संपर्कों को तलाशने का प्रयास किया। काफी मेहनत के बाद पुलिस टीम को सफलता मिली और बच्चे के मामा देव सैनी, निवासी मुजफ्फरनगर से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क स्थापित किया गया। परिजनों से संपर्क होने के बाद पुलिस ने उन्हें बच्चे के सुरक्षित मिलने की जानकारी दी और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए द्वारिका विहार स्थित ड्यूटी प्वाइंट पर बुलाया।

सूचना मिलने पर रिक्रूट कांस्टेबल सचिन, गौरव नेगी, पंकज चौहान एवं मोबाइल गश्त में नियुक्त कांस्टेबल पूरन सिंह ने अथक प्रयास करते हुए बच्चे के परिजनों की तलाश की। काफी मेहनत के बाद बच्चे के मामा श्री देव सैनी, निवासी मुजफ्फरनगर से मोबाइल के माध्यम से संपर्क स्थापित किया गया। इसके उपरांत श्री देव सैनी को द्वारिका विहार ड्यूटी पॉइंट पर बुलाया गया, जहां आवश्यक पुष्टि के बाद मासूम काशी को सकुशल उनके मामा के सुपुर्द कर दिया गया। सूचना मिलने के बाद बच्चे के मामा देव सैनी ड्यूटी प्वाइंट पर पहुंचे। पुलिस की ओर से आवश्यक पुष्टि की गई। पहचान और संबंध की पुष्टि होने के बाद मासूम काशी को सकुशल उसके मामा के सुपुर्द कर दिया गया। बच्चे के सुरक्षित रूप से परिवार के सदस्य तक पहुंचने के बाद पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली। परिजनों की तलाश में पुलिस टीम द्वारा किए गए प्रयासों के चलते बच्चे को अपने परिवार के सदस्य के साथ सुरक्षित भेजा जा सका।

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा और धार्मिक आयोजनों के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भीड़ बढ़ने के साथ लोगों के एक-दूसरे से बिछड़ने की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन की सक्रियता महत्वपूर्ण हो जाती है। बच्चों के अपने परिवार से अलग होने की स्थिति में शुरुआती समय काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि समय रहते बच्चे की पहचान और उसके परिवार से संपर्क स्थापित हो जाए तो उसे सुरक्षित तरीके से परिजनों तक पहुंचाने में मदद मिलती है। द्वारिका विहार क्षेत्र में सामने आए इस मामले में भी पुलिस टीम ने बच्चे की जानकारी जुटाकर उसके मामा से संपर्क किया और उसे सुरक्षित रूप से परिवार के सदस्य के सुपुर्द किया।

पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं होती। सार्वजनिक आयोजनों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों को जरूरतमंद लोगों की सहायता भी करनी पड़ती है। बिछड़े बच्चे को उसके परिवार तक पहुंचाने की यह घटना पुलिस की इसी मानवीय भूमिका को सामने लाती है। इस मामले में रिक्रूट कांस्टेबल सचिन, गौरव नेगी, पंकज चौहान और कांस्टेबल पूरन सिंह द्वारा किए गए प्रयासों से बच्चे के परिजनों का पता लगाया जा सका। पुलिस टीम ने बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहले उसके परिवार की तलाश की और फिर आवश्यक पुष्टि के बाद उसे उसके मामा के सुपुर्द किया।

कांवड़ यात्रा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान अभिभावकों और परिवार के सदस्यों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। भीड़ वाले स्थानों पर बच्चों को अपने साथ रखना और उन्हें अकेला न छोड़ना जरूरी है। छोटे बच्चों को परिवार के किसी सदस्य का नाम, मोबाइल नंबर या पहचान संबंधी आवश्यक जानकारी याद कराना भी उपयोगी हो सकता है। यदि किसी कारण से कोई बच्चा अपने परिवार से अलग हो जाता है, तो घबराने के बजाय नजदीकी पुलिसकर्मी, पुलिस सहायता केंद्र या ड्यूटी प्वाइंट पर तत्काल सूचना देनी चाहिए। इसी तरह यदि किसी व्यक्ति को कोई बिछड़ा हुआ बच्चा दिखाई देता है तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखते हुए पुलिस को सूचना देना बेहतर कदम है।

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से विभिन्न स्थानों पर सुरक्षा और व्यवस्था संबंधी ड्यूटी लगाई जाती है। भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सहायता और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल रहती है। द्वारिका विहार क्षेत्र की यह घटना बताती है कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों की सतर्कता किसी परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकती है। मासूम काशी के अपने परिजनों से बिछड़ने के बाद पुलिस टीम ने उसकी तलाश को प्राथमिकता दी और काफी प्रयास के बाद उसके मामा से संपर्क स्थापित किया।

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By ATHAR

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