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लक्सर (फरमान खान)
हरिद्वार/लक्सर 2026।
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा नशामुक्त समाज और सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने के उद्देश्य से लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को हरिद्वार जनपद के ब्लॉक सभागार, लक्सर में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और साइबर सेल हरिद्वार की ओर से नशामुक्ति एवं साइबर सुरक्षा विषय पर एक व्यापक जन-जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम उत्तराखण्ड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें करीब 250 जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों एवं स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समाज को नशे के दुष्प्रभावों, साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे और उनसे बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना था। विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक रहें और अपने परिवार तथा समाज को भी इन विषयों पर जागरूक करें।
आज दिनांक 18.07.2026 को ब्लॉक सभागार, लक्सर में उत्तराखण्ड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्षता में जन-जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों एवं अन्य उपस्थित नागरिकों को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF), हरिद्वार तथा साइबर सेल, हरिद्वार द्वारा नशे के दुष्प्रभाव एवं साइबर अपराधों से बचाव के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की टीम ने नशे के बढ़ते दुष्प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और भविष्य को भी नुकसान पहुंचाता है।
प्रतिभागियों को नशामुक्ति से संबंधित जागरूकता वीडियो भी दिखाए गए, जिनमें युवाओं पर नशे के दुष्परिणाम, अपराध की ओर बढ़ते कदम और सामाजिक जीवन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को सरल भाषा में समझाया गया। विशेष रूप से अभिभावकों से कहा गया कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नियमित नजर रखें, उनसे संवाद बनाए रखें और यदि किसी प्रकार की नशे से जुड़ी गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचना दें। कार्यशाला के दौरान नशे के दुष्परिणामों पर आधारित जागरूकता वीडियो प्रदर्शित किए गए तथा युवाओं और समाज पर नशे के दुष्प्रभावों की विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, लिंक, OTP धोखाधड़ी, डिजिटल भुगतान सुरक्षा एवं अन्य साइबर अपराधों से बचाव के व्यावहारिक उपाय भी बताए गए।

कार्यशाला का दूसरा महत्वपूर्ण विषय साइबर सुरक्षा रहा। साइबर सेल हरिद्वार के अधिकारियों ने वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन अपराधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि—किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें। OTP, बैंक विवरण या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। फर्जी कॉल, KYC अपडेट और लॉटरी के नाम पर आने वाले संदेशों से सतर्क रहें। डिजिटल भुगतान करते समय केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म का उपयोग करें। सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से बचें। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि साइबर अपराधी आम लोगों को भावनात्मक या लालच देकर जाल में फंसाते हैं, इसलिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना देना जरूरी है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि नशामुक्त समाज और सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने में युवाओं और अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार के सदस्य नियमित रूप से बच्चों से संवाद करें, उनके व्यवहार पर ध्यान दें और उन्हें डिजिटल सुरक्षा के बारे में शिक्षित करें तो कई अपराधों को शुरुआत में ही रोका जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में ANTF टीम ने उपस्थित सभी लोगों से अपने परिवार, रिश्तेदारों एवं आसपास के लोगों को भी नशामुक्ति और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न सरकारी हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई। इनमें प्रमुख रूप से—मानस पोर्टल / नशामुक्ति हेल्पलाइन – 1933 साइबर क्राइम हेल्पलाइन – 1930 अन्य पुलिस सहायता हेल्पलाइन की जानकारी साझा की गई, ताकि आवश्यकता पड़ने पर लोग तुरंत संबंधित विभाग से संपर्क कर सकें। इस अवसर पर मानस पोर्टल/नशामुक्ति हेल्पलाइन 1933, साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 तथा अन्य पुलिस हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी साझा की गई, ताकि आवश्यकता पड़ने पर आमजन तत्काल सहायता प्राप्त कर सकें। कार्यशाला में लगभग 250 जनप्रतिनिधि, अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक शामिल हुए। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार की जागरूकता कार्यशालाएं गांव और कस्बों तक नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग नशे और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक हो सकें।
कार्यक्रम के समापन पर ANTF टीम ने सभी प्रतिभागियों से अपील की कि वे अपने परिवार, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों को भी नशामुक्ति और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। अधिकारियों ने कहा कि केवल पुलिस या प्रशासन के प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही नशामुक्त और सुरक्षित उत्तराखण्ड का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। कार्यशाला में लगभग 250 जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों एवं अन्य प्रतिभागियों ने सहभागिता कर कार्यक्रम का लाभ उठाया। लक्सर में आयोजित यह कार्यशाला नशामुक्ति और साइबर सुरक्षा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। कार्यक्रम में लोगों को न केवल नशे और साइबर अपराधों के खतरे बताए गए, बल्कि उनसे बचाव के व्यावहारिक उपाय और सरकारी हेल्पलाइन की जानकारी भी दी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियान समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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