हरिद्वार में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की समीक्षा करते हुए जिला प्रशासन, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को लेकर अधिकारियों को निर्देश देते जिलाधिकारी मयूर दीक्षित।हरिद्वार में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की समीक्षा करते हुए जिला प्रशासन, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को लेकर अधिकारियों को निर्देश देते जिलाधिकारी मयूर दीक्षित।

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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

हरिद्वार, 18 जून 2026।
जनपद हरिद्वार में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने विभिन्न विभागों, नगर निकायों और संबंधित एजेंसियों द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अनुपालन में बरती जा रही लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त करते हुए विस्तृत कार्यवाही रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन का कहना है कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नोडल अधिकारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं परियोजना निदेशक नलिनीत घिल्डियाल ने जानकारी देते हुए बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें तथा प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट समय पर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्रस्तुत न करने अथवा कार्यों में लापरवाही पाए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय की जाएगी।

जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद नगर निगम हरिद्वार, नगर निगम रुड़की, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों को घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि प्रत्येक घर से नियमित रूप से कचरा संग्रहण सुनिश्चित किया जाए तथा गीले और सूखे कचरे का पृथक-पृथक संग्रहण किया जाए। इसके अलावा बंद कचरा परिवहन प्रणाली लागू करने, सार्वजनिक स्थलों पर कचरा फेंकने की समस्या वाले क्षेत्रों की पहचान कर स्थायी समाधान तैयार करने तथा शहरों में स्वच्छता मानकों को बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने विरासत अपशिष्ट डंपसाइटों के वैज्ञानिक उपचार और कचरा निस्तारण की आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर भी विशेष बल दिया है। प्रत्येक वार्ड में आरआरआर (Reduce-Reuse-Recycle) केंद्र स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से कार्य करने को कहा गया है।

नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, संस्थानों अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। नगर निकायों को जुर्माना लगाने और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्वच्छता अभियान को केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रखते हुए जिला प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। जिला पंचायत, जिला पंचायत राज अधिकारी तथा सभी खंड विकास अधिकारियों को ग्राम पंचायत स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजनाएं तैयार करने के लिए कहा गया है। ग्राम पंचायतों में स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, घर-घर जागरूकता अभियान और खुले में कचरा फेंकने तथा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रत्येक विकास खंड में नियमित समीक्षा बैठक आयोजित करने और साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजने की व्यवस्था भी लागू की गई है।

प्रशासन का मानना है कि स्वच्छता अभियान को जनआंदोलन बनाने के लिए समाज की भागीदारी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से मुख्य शिक्षा अधिकारी को सभी विद्यालयों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त अभियान से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कराने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालयों में निबंध, चित्रकला, वाद-विवाद और जागरूकता प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया जाएगा। साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और समाज कल्याण विभाग को भी व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जिलाधिकारी ने वन विभाग और उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को विशेष रूप से निर्देशित किया है कि वन क्षेत्रों, नदी किनारों, राजाजी टाइगर रिजर्व की सीमाओं और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध कचरा डंपिंग पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। संबंधित विभागों को नियमित निरीक्षण करने, अधिकृत एवं अनधिकृत कचरा स्थलों का सत्यापन करने तथा फोटोग्राफिक साक्ष्यों सहित रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वच्छ और हरित हरिद्वार बनाने पर जोर

जिला प्रशासन का लक्ष्य हरिद्वार को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल जनपद के रूप में विकसित करना है। अधिकारियों का कहना है कि स्वच्छता केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी है। यदि सभी विभाग, स्थानीय निकाय और आमजन मिलकर कार्य करें तो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की जा सकती है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वच्छता अभियान को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें और जनपद को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

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By ATHAR

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