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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
हरिद्वार। कांवड़ यात्रा के दौरान गंगा में जल भरते समय पैर फिसलने से एक 17 वर्षीय कांवड़िया नदी के तेज बहाव में बहने लगा। मौके पर मौजूद 40वीं वाहिनी पीएसी की आपदा राहत टीम ने तत्परता दिखाते हुए युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते की गई कार्रवाई से एक संभावित हादसा टल गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्थान के अलवर जिले से कांवड़ लेने हरिद्वार पहुंचे दीपक सैनी पुत्र सतीश सैनी, उम्र 17 वर्ष, निवासी ग्राम तिजारा, जिला अलवर, राजस्थान गंगा में जल भर रहा था। इसी दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया और वह गंगा के पानी में बहने लगा। घटना के समय मौके पर मौजूद आपदा राहत दल की टीम ने स्थिति को तुरंत समझते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। टीम ने बहाव में फंसे युवक को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद युवक की जान बच गई और उसे सुरक्षित स्थान पर लाया गया।
रेस्क्यू किए गए कांवरिया का नाम दीपक सैनी पुत्र श्री सतीश सैनी उम्र 17 साल निवासी ग्राम तिजारा जिला अलवर राजस्थान यह व्यक्ति कांवड़ लेने हरिद्वार आया था जल भरने के दौरान इसका पैर फिसल गया जिस कारण यह गंगा में बहने लगा मौके पर मौजूद (आपदा राहत दल) 40 वीं वाहिनी पीएससी की टीम द्वारा पारित कार्यवाही करते हुए डूबते हुए व्यक्ति को सकुशल रेस्क्यू किया गया रेस्क्यू टीम का विवरण
जल भरते समय अचानक फिसला पैर
कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं और गंगा से जल भरकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं। इस दौरान गंगा घाटों और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। दीपक सैनी भी कांवड़ लेने के उद्देश्य से हरिद्वार आया था। गंगा से जल भरने के दौरान उसका पैर अचानक फिसल गया। पैर फिसलने के बाद वह पानी के बहाव की चपेट में आ गया और नदी में बहने लगा। स्थिति को देखते हुए वहां मौजूद 40वीं वाहिनी पीएसी की आपदा राहत टीम तत्काल सक्रिय हुई। टीम ने बिना समय गंवाए युवक को सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की।
गंगा में अचानक बहने की घटना के बाद कुछ ही समय में स्थिति गंभीर हो सकती थी। हालांकि मौके पर तैनात राहत टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए युवक को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। इस कार्रवाई में टीम के सदस्यों ने समन्वय के साथ काम किया। रेस्क्यू के दौरान युवक को नदी के बहाव से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। प्रशासन और पुलिस की ओर से कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्कता बरती जाती है। गंगा घाटों और नदी के आसपास तैनात राहत एवं बचाव दल किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहते हैं।
दीपक सैनी के रेस्क्यू में 40वीं वाहिनी पीएसी की आपदा राहत टीम के जवानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम की तत्परता के कारण नदी में बह रहे युवक को सुरक्षित बाहर निकालना संभव हुआ। रेस्क्यू टीम में निम्न जवान शामिल रहे—एडी एसआई उत्तम सिंह भंडारी हेड कांस्टेबल अनिल पाल कांस्टेबल मनवर सिंह कांस्टेबल जयदीप सिंह कांस्टेबल महेश कुमार टीम ने मौके पर तत्काल कार्रवाई करते हुए युवक को नदी के बहाव से सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की।
कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। गंगा से जल भरना यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में घाटों पर सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। नदी में पानी का बहाव कई स्थानों पर सामान्य दिखाई देने के बावजूद अचानक तेज हो सकता है। इसी वजह से श्रद्धालुओं को प्रशासन द्वारा निर्धारित और सुरक्षित घाटों पर ही स्नान एवं जल भरने की सलाह दी जाती है। विशेषकर बच्चों और कम उम्र के श्रद्धालुओं को गंगा के किनारे अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। नदी के गहरे हिस्सों में जाने, तेज बहाव वाले स्थानों पर उतरने अथवा सुरक्षा व्यवस्था से बाहर जाकर जल भरने से बचना जरूरी है।
कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की ओर से अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था की जाती है। आपदा राहत दलों की तैनाती का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में जल्द से जल्द मदद पहुंचाना है। श्रद्धालुओं से अपील है कि वे गंगा घाटों पर मौजूद पुलिस, प्रशासन और राहत दल के जवानों द्वारा दिए जा रहे सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। जल भरते समय भीड़भाड़ वाले स्थानों पर धक्का-मुक्की से बचें और नदी के किनारे किसी भी प्रकार का जोखिम न लें। यदि किसी व्यक्ति को नदी में बहाव अधिक महसूस हो या घाट पर परिस्थितियां असुरक्षित लगें तो उसे सुरक्षित स्थान पर लौट जाना चाहिए। किसी दूसरे व्यक्ति को भी जोखिम में देखकर स्वयं नदी में उतरने के बजाय तत्काल मौके पर मौजूद राहत दल या पुलिसकर्मियों को सूचना देना अधिक सुरक्षित तरीका है।
दीपक सैनी के मामले में राहत दल की तत्परता महत्वपूर्ण रही। गंगा में पैर फिसलने के बाद युवक बहने लगा था, लेकिन मौके पर मौजूद 40वीं वाहिनी पीएसी की आपदा राहत टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना से एक बार फिर यह बात सामने आती है कि नदी और घाटों के आसपास सावधानी बरतना कितना जरूरी है। खासकर कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ लोगों की व्यक्तिगत सतर्कता भी महत्वपूर्ण होती है।
कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को गंगा घाटों पर निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था का पालन करना चाहिए। जल भरने के दौरान रेलिंग या सुरक्षा बैरिकेड के बाहर जाने से बचना चाहिए। नदी का बहाव तेज होने की स्थिति में किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहिए। प्रशासन और राहत दल की मौजूदगी श्रद्धालुओं को सहायता उपलब्ध कराने के लिए है, लेकिन सावधानी बरतना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी भी है। सुरक्षित तरीके से जल भरकर ही आगे की यात्रा करना बेहतर है। हरिद्वार में गंगा से जल भरते समय पैर फिसलने के बाद नदी में बह रहे 17 वर्षीय कांवड़िया दीपक सैनी को 40वीं वाहिनी पीएसी की आपदा राहत टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। टीम की तत्परता से संभावित हादसा टल गया। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को गंगा घाटों पर सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर ही जल भरने की सलाह दी जाती है।
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