सबसे सटीक ज्वालापुर टाइम्स न्यूज़…
देहरादून। उत्तराखंड के चकराता क्षेत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़ी योजनाओं के चयन और कार्यों के आवंटन को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आई है। रविवार को पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने देहरादून की यमुना कॉलोनी स्थित समाज कल्याण मंत्री खजानदास के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने योजनाओं के चयन में पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रस्तावों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए सूची की समीक्षा और दोबारा विचार की मांग की।
मामला उस समय और चर्चा में आ गया, जब प्रदर्शन के दौरान लगाए गए आरोपों पर मंत्री खजानदास ने कड़ा जवाब दिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मंत्री ने कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए कमीशन से जुड़े आरोप साबित होते हैं तो वह मंत्री पद से इस्तीफा देने की बात के साथ आत्महत्या करने की बात भी कही। यह बयान मंत्री की ओर से आरोपों के जवाब में दिया गया था। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित स्रोतों में सामने नहीं आई है।
प्रदर्शन कर रहे भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का आरोप था कि चकराता विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति से संबंधित योजनाओं के लिए जारी सूची में उनके प्रस्तावों को अपेक्षित स्थान नहीं दिया गया। उनका कहना था कि क्षेत्र में पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की ओर से लंबे समय से योजनाओं के प्रस्ताव दिए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें प्राथमिकता नहीं मिल रही है।
मधु चौहान के अनुसार, उन्होंने जुलाई में मंत्री खजानदास से मुलाकात कर चकराता क्षेत्र में योजनाओं के चयन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रस्तावों पर ध्यान देने का अनुरोध किया था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद जारी सूची में कार्यकर्ताओं की अपेक्षा के अनुरूप प्रस्ताव शामिल नहीं किए गए। प्रदर्शनकारियों ने इस संबंध में जारी सूची की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर उसे निरस्त कर दोबारा प्रक्रिया शुरू करने की मांग रखी। उनका कहना था कि मामले का समाधान नहीं होने पर वे पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे।
80 फीसदी कार्य विपक्ष से जुड़े लोगों को देने का आरोप
प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि चकराता क्षेत्र में योजनाओं के करीब 80 फीसदी काम विपक्ष से जुड़े लोगों को दिए गए हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर 15 से 20 फीसदी कमीशन के आरोप भी लगाए। हालांकि, ये बातें प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोप हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों को साबित करने वाली कोई स्वतंत्र जांच रिपोर्ट या आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इन दावों को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनावी माहौल को देखते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रस्तावों और उनकी शिकायतों पर संगठन तथा सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका दावा था कि योजनाओं के चयन में कथित अनदेखी से कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।
प्रदर्शन के बाद मंत्री खजानदास की ओर से भी अपना पक्ष रखा गया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग से जुड़ी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और स्पेशल कम्पोनेंट प्लान की योजनाओं में बजट का वितरण बिना भेदभाव के करने का प्रयास किया गया है। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से प्राप्त प्रस्तावों और उपलब्ध बजट के आधार पर योजनाओं का संतुलन बनाया जाता है। उनके अनुसार, चकराता क्षेत्र को भी पर्याप्त बजट दिया गया है और क्षेत्रीय विकास में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। मंत्री ने अपने ऊपर लगाए गए कमीशन संबंधी आरोपों को लेकर कहा कि यदि आरोप साबित होते हैं तो वह मंत्री पद छोड़ देंगे। इसी दौरान उनके आत्महत्या संबंधी बयान की भी रिपोर्ट सामने आई, जिसने पूरे घटनाक्रम को और चर्चा में ला दिया।
मंत्री और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत से नहीं निकला समाधान
रविवार को प्रदर्शन के दौरान भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, मूरत राम शर्मा, प्रताप राव, गीताराम गौड़ और कमलेश भट्ट समेत कई नेता इस दौरान मौजूद रहे। मंत्री खजानदास और प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत भी हुई। प्रदर्शनकारियों की ओर से योजनाओं की सूची पर पुनर्विचार और कार्यकर्ताओं के प्रस्तावों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग रखी गई। हालांकि, बातचीत के बाद तत्काल कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने मामले को मुख्यमंत्री के सामने रखने का निर्णय लिया। प्रदेश भाजपा नेतृत्व से भी इस विषय पर बातचीत किए जाने की बात सामने आई है।
मामले को लेकर प्रदर्शनकारी भाजपा नेताओं ने सोमवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात करने की बात कही। उनका कहना है कि चकराता क्षेत्र में योजनाओं की सूची और कार्यों के चयन से जुड़ी शिकायतों को मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा। मधु चौहान ने भी कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर संगठन स्तर पर विचार होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि योजनाओं की सूची की समीक्षा की जाए और यह देखा जाए कि पात्र क्षेत्रों तथा प्रस्तावों के अनुसार कार्यों का चयन किस आधार पर किया गया। इस बीच, मंत्री की ओर से भी प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर मामले का समाधान निकालने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई है।
चकराता विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से कांग्रेस के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान में यहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह विधायक हैं। ऐसे में भाजपा के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से योजनाओं को लेकर सामने आई नाराजगी का राजनीतिक संदर्भ भी देखा जा रहा है।
मधु चौहान खुद चकराता क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी हैं और उनके पति मुन्ना सिंह चौहान विकासनगर से भाजपा विधायक हैं। यही वजह है कि मंत्री के आवास के बाहर हुए प्रदर्शन को पार्टी के भीतर स्थानीय स्तर पर चल रही असहमति के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, प्रदर्शन और आरोपों के राजनीतिक प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। फिलहाल मुख्य विवाद योजनाओं के चयन, कार्यकर्ताओं के प्रस्तावों और कथित प्राथमिकता को लेकर है।
प्रदर्शन में जिन योजनाओं का मुद्दा उठाया गया, उनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित योजनाओं के साथ स्पेशल कम्पोनेंट प्लान और ट्राइबल सब-प्लान से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख सामने आया है। इन योजनाओं का उद्देश्य संबंधित समुदायों के विकास और बुनियादी जरूरतों से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देना है। ऐसे में योजनाओं के चयन और बजट के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता तथा पात्रता महत्वपूर्ण विषय होते हैं। इसी आधार पर प्रदर्शनकारी सूची की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर मंत्री का पक्ष है कि बजट का वितरण उपलब्ध प्रस्तावों और क्षेत्रीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
अब पूरे मामले में मुख्यमंत्री और भाजपा संगठन के स्तर पर होने वाली बातचीत महत्वपूर्ण होगी। प्रदर्शनकारी नेता योजनाओं की सूची की समीक्षा की मांग कर रहे हैं, जबकि मंत्री की ओर से बजट वितरण में भेदभाव नहीं किए जाने की बात कही गई है। यदि सरकार या संबंधित विभाग की ओर से सूची की समीक्षा की जाती है तो उससे यह स्पष्ट हो सकता है कि योजनाओं के चयन का आधार क्या रहा और किन प्रस्तावों को किस कारण से शामिल या बाहर रखा गया। फिलहाल चकराता क्षेत्र में योजनाओं को लेकर भाजपा के भीतर सामने आई नाराजगी ने स्थानीय राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है। मंत्री खजानदास के आवास पर प्रदर्शन, प्रदर्शनकारियों के आरोप, मंत्री का जवाब और मुख्यमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात के बाद अब सभी की नजर आगे होने वाली बातचीत और सरकार के रुख पर रहेगी।
यह भी पढ़ें – किशोर न्याय कानून के 10 साल पूरे हरिद्वार में जुटे 180 से अधिक विशेषज्ञ बाल संरक्षण पर बनी आगे की रणनीति…
उत्तराखंड की सभी ताज़ा और महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए ज्वालापुर टाइम्स न्यूज़ WHATSAPP GROUP से जुड़ें और अपडेट सबसे पहले पाएं
यहां क्लिक करें एक और हर अपडेट आपकी उंगलियों पर!
यदि आप किसी विज्ञापन या अपने क्षेत्र/इलाके की खबर को हमारे न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित कराना चाहते हैं, तो कृपया 7060131584 पर संपर्क करें। आपकी जानकारी को पूरी जिम्मेदारी और भरोसे के साथ प्रसारित किया जाएगा।”

