रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
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देहरादून। उत्तराखंड के प्रमुख सरकारी अस्पताल दून अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थाओं में विस्तार किया गया है। मरीजों की बढ़ती संख्या और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन ने न्यूरो ओपीडी की सेवाओं को सप्ताह में पांच दिन संचालित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही भर्ती मरीजों के लिए बिलिंग सुविधा 12 घंटे उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य मरीजों को उपचार से जुड़ी सुविधाएं अधिक सुगमता से उपलब्ध कराना और अस्पताल में होने वाले जरूरी कामकाज को व्यवस्थित बनाना है। अस्पताल की प्राचार्य प्रो. डॉ. गीता जैन के निर्देशानुसार न्यूरो ओपीडी के संचालन और भर्ती मरीजों की बिलिंग व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
दून अस्पताल में न्यूरो ओपीडी की सेवाओं का विस्तार मरीजों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब यह ओपीडी सप्ताह में पांच दिन संचालित की जाएगी। इससे न्यूरोलॉजी से संबंधित समस्याओं के लिए चिकित्सकीय परामर्श लेने वाले मरीजों को अस्पताल की ओपीडी सेवाओं का लाभ लेने के अधिक अवसर मिलेंगे। न्यूरो ओपीडी में आम तौर पर मस्तिष्क, नसों और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं के मूल्यांकन तथा चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा दी जाती है। ऐसे मरीजों को समय पर विशेषज्ञ से परामर्श मिलना उपचार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ओपीडी के संचालन की व्यवस्था और उपलब्ध दिनों की जानकारी मरीजों तथा उनके परिजनों के लिए उपयोगी होती है। सप्ताह में पांच दिन न्यूरो ओपीडी चलने से मरीज अपनी सुविधा के अनुसार अस्पताल आने की योजना बना सकेंगे।
नई व्यवस्था के तहत मरीज अब मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को न्यूरो विशेषज्ञों से परामर्श ले सकेंगे। इससे पहले न्यूरो ओपीडी सप्ताह में कम दिन चलती थी, जिससे मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों को दिखाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। मरीजों की इसी भारी परेशानी और असुविधा को दूर करने के लिए ओपीडी के दिनों को बढ़ाया गया है।न्यूरो एचओडी डॉ. डीपी तिवारी, डॉ. अमित कुमार और हाल में ज्वाइन करने वाले डॉ. उदय गुप्ता ओपीडी करेंगे।
पंजीकरण प्रभारी एवं पीआरओ विनोद नैनवाल ने बताया कि शेड्यूल तय हो गया है और तमाम व्यवस्था बना दी गई है। प्राचार्य प्रो. डॉ. गीता जैन ने स्पष्ट किया कि मरीजों का हित अस्पताल के लिए सर्वोपरि है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से मरीजों को त्वरित और सुगम चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी। अस्पताल प्रशासन मरीजों को हर संभव बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
अस्पताल की प्राचार्य प्रो. डॉ. गीता जैन के निर्देशानुसार न्यूरो ओपीडी और भर्ती मरीजों की बिलिंग सुविधा में विस्तार किया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य अस्पताल में उपलब्ध सेवाओं को मरीजों की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्थित करना है। दून अस्पताल उत्तराखंड के प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल है। यहां देहरादून के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण ओपीडी संचालन, पंजीकरण, बिलिंग और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का सुचारु रहना महत्वपूर्ण है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से सेवाओं के संचालन में किए गए बदलाव मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। ओपीडी के निर्धारित दिनों और बिलिंग काउंटर के समय की स्पष्ट जानकारी होने से मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल आने से पहले अपनी योजना बनाने में मदद मिल सकती है। भर्ती मरीजों को राहत, 12 घंटे बिलिंग शुरू दून अस्पताल में मरीजों एवं तीमारदारों को एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग टरकाने के मामले में निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना की सख्ती रंग लाने लगी है। उनके निर्देश पर प्राचार्य डॉ. गीता जैन एवं एमएस डॉ. आरएस बिष्ट इमरजेंसी समेत अस्पताल में सुधार के कार्यों में लगे हैं। इमरजेंसी में जहां सेंट्रल लैब खोले जाने को जगह चिन्हित की जा रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं को व्यवस्थित बनाने पर जोर
दून अस्पताल में न्यूरो ओपीडी को सप्ताह में पांच दिन संचालित करने और भर्ती मरीजों के लिए 12 घंटे की बिलिंग सुविधा शुरू करने का उद्देश्य अस्पताल की सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाना है। इन व्यवस्थाओं से मरीजों को ओपीडी और बिलिंग से जुड़ी सुविधाओं का लाभ लेने में मदद मिल सकती है। वहीं, पुरानी बिल्डिंग में गुरुवार से बिलिंग काउंटर सुबह आठ से शाम आठ बजे तक संचालित करना शुरू कर दिया है। पंजीकरण प्रभारी विनोद नैनवाल ने यह व्यवस्था बनवा दी है। पहले सुबह आठ से दो बजे तक ही चलता था। इससे अब भर्ती, डायलिसिस, रेडियोलॉजी जांचों आदि वाले मरीज एवं तीमारदार बिल कटवाने के लिए ओपीडी या इमरजेंसी के चक्कर नहीं काटेंगे और वहां भीड़ भी नहीं होगी।
अस्पताल प्रशासन के निर्देशों के अनुसार लागू की गई इन व्यवस्थाओं की उपयोगिता मरीजों को समय पर जानकारी मिलने और संबंधित सेवाओं के सुचारु संचालन पर भी निर्भर करेगी। ओपीडी का समय, पंजीकरण प्रक्रिया और बिलिंग काउंटर की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक किए जाने से मरीजों तथा उनके परिजनों को और सुविधा मिल सकती है।
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