हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट में पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देते सेना, पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि"हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट में पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देते सेना, पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि"

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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

हरिद्वार । उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, वरिष्ठ राजनेता एवं भारतीय सेना के मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी को बुधवार को हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके निधन से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है। अंतिम यात्रा में हजारों लोगों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनरल खंडूड़ी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जनता के बीच विश्वास, ईमानदारी और अनुशासन के प्रतीक थे।

सुबह से ही हरिद्वार में लोगों का हुजूम उमड़ना शुरू हो गया था। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों, सेना के अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा आम नागरिकों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम यात्रा के दौरान पूरा वातावरण भावुक हो उठा और लोगों ने “जनरल खंडूड़ी अमर रहें” के नारों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी।

“राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार”

खड़खड़ी श्मशान घाट पर सैन्य एवं राजकीय परंपराओं के अनुरूप अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न की गई। भारतीय सेना और पुलिस के जवानों ने दिवंगत नेता को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। राष्ट्र सेवा और सार्वजनिक जीवन में उनके उल्लेखनीय योगदान को सम्मानित करते हुए पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। दिवंगत नेता के पुत्र मनीष खंडूड़ी ने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की। इस दौरान उपस्थित परिजन भावुक दिखाई दिए। परिवार के सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में समर्थकों और शुभचिंतकों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

अंतिम संस्कार में पहुंचे केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि भुवन चंद्र खंडूड़ी का पूरा जीवन अनुशासन, सादगी और ईमानदारी का उदाहरण रहा। उन्होंने कहा कि सेना अधिकारी, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने हमेशा जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के विकास और सुशासन की दिशा में खंडूड़ी का योगदान अविस्मरणीय रहेगा। सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही की स्थापना के लिए उनके प्रयास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। केंद्रीय मंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

हरिद्वार में उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से दी विदाई”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन राज्य और देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि जनरल खंडूड़ी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सदैव शुचिता, पारदर्शिता और अनुशासन को प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें खंडूड़ी जी के साथ कार्य करने का अवसर मिला और उन्होंने हमेशा मार्गदर्शक तथा अभिभावक की भूमिका निभाई। उनकी कार्यशैली, निर्णय क्षमता और जनसेवा के प्रति समर्पण सदैव प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने आज एक ऐसा व्यक्तित्व खो दिया है जिसने राज्य निर्माण और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

भुवन चंद्र खंडूड़ी का जीवन देश सेवा और जनसेवा की मिसाल माना जाता है। भारतीय सेना में मेजर जनरल के रूप में उत्कृष्ट सेवाएं देने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने सुशासन, पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खंडूड़ी ने प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और विकास योजनाओं को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं। उनके कार्यकाल में जनहित से जुड़े अनेक निर्णय लिए गए, जिनका प्रभाव आज भी देखा जा सकता है।

श्रद्धांजलि देने पहुंचे अनेक वरिष्ठ नेता

अंतिम संस्कार में विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। श्रद्धांजलि देने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, विजय बहुगुणा, रमेश पोखरियाल निशंक, तीर्थ सिंह रावत, सांसद अनिल बलूनी, अजय भट्ट, अजय टम्टा, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सतपाल महाराज, धन सिंह रावत, गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, खजान दास सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल रहे।

इसके अतिरिक्त विधायकगण, नगर निकाय प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, सैन्य अधिकारी और विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के संत-महात्मा भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे। अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों और प्रमुख संतों ने भी दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

खंडूड़ी जी अमर रहेंगे”

भुवन चंद्र खंडूड़ी की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी अंतिम यात्रा में समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हुए। युवा, बुजुर्ग, महिलाएं, पूर्व सैनिक, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कई लोगों ने उन्हें उत्तराखंड की राजनीति का ईमानदार चेहरा बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। हरिद्वार में अंतिम यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए प्रशासन ने विशेष प्रबंध किए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया।

राजनीतिक विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि भुवन चंद्र खंडूड़ी का योगदान केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और अनुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती थी। उनके निधन से उत्तराखंड ने एक अनुभवी नेता, कुशल प्रशासक और प्रेरणादायी व्यक्तित्व को खो दिया है। हालांकि उनके विचार, सिद्धांत और जनसेवा की विरासत आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। अंतिम संस्कार के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और ईश्वर से उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की।

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By ATHAR

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