"भगवानपुर ब्लाइंड मर्डर केस के खुलासे के बाद पुलिस टीम द्वारा बरामद साक्ष्यों और गिरफ्तार आरोपियों से संबंधित कार्रवाई""भगवानपुर ब्लाइंड मर्डर केस के खुलासे के बाद पुलिस टीम द्वारा बरामद साक्ष्यों और गिरफ्तार आरोपियों से संबंधित कार्रवाई"

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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

हरिद्वार। हरिद्वार जनपद के भगवानपुर थाना क्षेत्र में मिले एक अज्ञात युवक के शव के मामले का पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, आधुनिक तकनीक और डिजिटल जांच प्रणाली की सहायता से पहले मृतक की पहचान की गई और उसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए घटना में कथित रूप से शामिल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि मामले में दो अन्य संदिग्धों की तलाश भी जारी है।

यह मामला 17 मई 2026 को सामने आया था, जब बहबलपुर से लव्वा गांव की ओर जाने वाले मार्ग के निकट नदी किनारे एक युवक का शव मिलने की सूचना पुलिस को प्राप्त हुई। शव पर चोटों के निशान पाए जाने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में शव की पहचान नहीं हो सकी थी, जिसके चलते पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान स्थापित करना थी।

सूचना मिलते ही भगवानपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और फोरेंसिक टीम को बुलाकर घटनास्थल का निरीक्षण कराया। पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलित किए तथा आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल से मिले सुरागों को सुरक्षित रखते हुए जांच को तकनीकी और फील्ड दोनों स्तरों पर आगे बढ़ाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मृतक की पहचान के लिए गृह मंत्रालय द्वारा संचालित डिजिटल पहचान प्रणाली और उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया गया। मृतक के चेहरे की तस्वीर डिजिटल डेटाबेस में मिलान के लिए अपलोड की गई, जिसके आधार पर संभावित व्यक्तियों की सूची प्राप्त हुई।

भगवानपुर ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा: 48 घंटे में पांच आरोपी गिरफ्तार, तकनीक से हुई शव की पहचान

इसके बाद पुलिस की अलग-अलग टीमों ने विभिन्न जिलों और राज्यों में जाकर संबंधित व्यक्तियों का सत्यापन किया। लंबी पड़ताल और भौतिक सत्यापन के बाद मृतक की पहचान कलीम पुत्र मुरादू निवासी ग्राम बचीटी, थाना देवबंद, जनपद सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई। पहचान स्थापित होने के बाद पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच को तेज कर दिया। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान स्थानीय लोगों से पूछताछ, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण और सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की गई। इसी दौरान यह जानकारी सामने आई कि घटना वाली रात क्षेत्र में एक संदिग्ध वाहन देखा गया था।

जांच में यह भी पता चला कि मृतक कलीम और उसका भाई रोजगार की तलाश में क्षेत्र में आए थे। कथित तौर पर दोनों एक होटल में भोजन करने पहुंचे, जहां किसी बात को लेकर विवाद हो गया। पुलिस का दावा है कि विवाद बढ़ने के बाद मारपीट हुई, जिसमें एक युवक वहां से निकलने में सफल रहा जबकि दूसरा युवक वहीं रह गया। पुलिस के अनुसार, जांच में प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर यह संदेह मजबूत हुआ कि मारपीट के दौरान युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद शव को कथित रूप से दूसरे स्थान पर ले जाकर फेंक दिया गया, ताकि घटना के साक्ष्य छिपाए जा सकें।

जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कुछ युवा उच्च शिक्षा प्राप्त हैं और विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जुड़े रहे हैं। पुलिस ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं, जिनके आधार पर घटना के क्रम को समझने में सहायता मिली। हालांकि मामले की विवेचना अभी जारी है और जांच के दौरान नए तथ्य सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में दो अन्य व्यक्तियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। उनके संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है और पुलिस टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान पुलिस ने घटना से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य भी बरामद किए हैं। इनमें कथित रूप से घटना में प्रयुक्त डंडे, मृतक का मोबाइल फोन तथा जांच में संदिग्ध माने गए वाहन शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इन साक्ष्यों से मामले की कड़ियां जोड़ने और घटनाक्रम को समझने में मदद मिलेगी।

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स्थानीय स्तर पर इस मामले के खुलासे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि प्रारंभ में मृतक की पहचान तक नहीं हो सकी थी। तकनीकी संसाधनों और फील्ड जांच के संयोजन से पुलिस ने पहचान स्थापित की और उसके बाद आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया। कानून-व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल डाटा विश्लेषण और पारंपरिक पुलिसिंग का समन्वय जटिल मामलों के समाधान में प्रभावी साबित हो सकता ह

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंची है। सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जा रही है तथा उपलब्ध साक्ष्यों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा गया है। संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई जारी रहेगी। मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि अपराध की जांच में तकनीकी संसाधनों का उपयोग किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वहीं, पुलिस का कहना है कि फरार या संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश भी लगातार जारी है और मामले से जुड़े प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

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By ATHAR

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