उत्तराखंड चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति और 4200 ग्रेड पे की मांगउत्तराखंड चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति और 4200 ग्रेड पे की मांग

रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

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देहरादून। उत्तराखंड चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं के चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारियों ने पदोन्नति, पदनाम परिवर्तन और वेतनमान से जुड़ी मांगों को लेकर महानिदेशालय देहरादून के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं उत्तराखंड ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों की मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन और असहयोग का रास्ता अपनाएगा।

संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर कई बार समझौते हुए, लेकिन अब तक मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। संघ चाहता है कि स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पशुपालन और उद्यान विभाग की तर्ज पर पदोन्नति का अवसर दिया जाए। इसके साथ ही उनके कार्यों और जिम्मेदारियों के अनुरूप पदनाम बदलकर उन्हें तकनीकी श्रेणी में शामिल किया जाए तथा 4200 ग्रेड पे दिए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाए।

चार समझौतों के बाद भी पदोन्नति का इंतजार

चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़ी मांग लंबे समय से लंबित है। संगठन ने कई बार विभागीय स्तर पर इस विषय को उठाया और अधिकारियों के साथ वार्ता भी की। संघ का दावा है कि अब तक चार बार समझौते होने के बावजूद पदोन्नति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।

संगठन की प्रमुख मांग है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लैब सहायक, डार्क रूम सहायक और ओटी सहायक के पदों पर पदोन्नति दी जाए। इसके लिए पशुपालन विभाग और उद्यान विभाग में अपनाई गई व्यवस्था का उदाहरण देते हुए स्वास्थ्य विभाग में भी समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। संघ के मुताबिक, 21 अगस्त 2026 को हुए समझौते में भी भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों (IPHS) के तहत वन टाइम सेटलमेंट के माध्यम से पदोन्नति का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद संबंधित प्रस्ताव अब तक शासन को नहीं भेजे जाने का आरोप संगठन ने लगाया है।

प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा, महामंत्री सुनील अधिकारी, प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र तेश्वर, जिला मंत्री राकेश भंवर और उपाध्यक्ष मूलचंद चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपने नियमित कार्यों के अलावा कई ऐसे काम भी करते हैं, जिन्हें संगठन तकनीकी प्रकृति का मानता है।

पदाधिकारियों के अनुसार, कर्मचारी मरीजों की ड्रेसिंग और प्लास्टर में सहयोग, आपातकालीन परिस्थितियों में चिकित्सा कर्मियों की सहायता, ऑपरेशन थिएटर में उपकरणों के स्टरलाइजेशन, जनरेटर और ऑक्सीजन जनरेटर के संचालन जैसे कार्यों में भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा लैब और ब्लड बैंक में हीमोग्लोबिन तथा ब्लड ग्रुप की जांच, रक्त लेने और वार्ड में मरीजों की देखभाल से जुड़े कुछ कार्यों में भी सहयोग करने की बात कही गई है। संघ का कहना है कि कर्मचारी मानवता और मरीजों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में उनके कार्यों की प्रकृति को देखते हुए पदनाम और सेवा संबंधी व्यवस्था में बदलाव किया जाना चाहिए।

कोविड महामारी के दौरान योगदान का भी उठाया मुद्दा

संगठन के पदाधिकारियों ने कोविड महामारी के दौरान चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भूमिका का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि महामारी के कठिन दौर में सफाई कर्मचारियों और वार्ड ब्वाय ने मरीजों की देखभाल और अस्पतालों की व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

संघ का आरोप है कि उस समय कर्मचारियों ने जोखिम के बीच अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें न तो अपेक्षित प्रोत्साहन मिला और न ही पदोन्नति से जुड़ी मांगों पर ठोस निर्णय लिया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अन्य संवर्गों में पदोन्नति और वेतनमान से संबंधित प्रस्तावों पर कार्रवाई होती रही है, जबकि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की मांग लंबित है। संगठन ने इसे कर्मचारियों के साथ असमान व्यवहार बताते हुए विभाग से समाधान की मांग की है।

प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश पंत, उपाध्यक्ष नेल्सन अरोड़ा, प्रदेश संगठन सचिव दिनेश गुसाईं और सुरेंद्र कश्यप ने पदोन्नति की सीमित संभावनाओं पर सवाल उठाए। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, करीब दस वर्ष पहले 47 पदों पर पदोन्नति हुई थी, जबकि अब दस साल बाद 39 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया की बात सामने आ रही है। संघ का कहना है कि इन पदों के लिए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के माध्यम से परीक्षा कराने की व्यवस्था की जा रही है, जिससे कर्मचारियों को कठिनाई हो सकती है।

पदाधिकारियों ने दावा किया कि पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों की संख्या लगभग 150 से 200 है। उनका यह भी कहना है कि इतने ही कर्मचारी पदोन्नति की उम्मीद में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। संगठन चाहता है कि कर्मचारियों की सेवा अवधि और विभाग में किए जा रहे कार्यों को ध्यान में रखते हुए पदोन्नति की प्रक्रिया सरल और न्यायसंगत बनाई जाए।

संघ ने उत्तराखंड के पशुपालन और उद्यान विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति दिए जाने की व्यवस्था का हवाला दिया है। संगठन के अनुसार, पशुपालन विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को वैक्सीनेटर के पद पर पदोन्नति का अवसर दिया जाता है, जबकि उद्यान विभाग में माली के पद को तकनीकी श्रेणी से जोड़ते हुए उद्यान सहायक के पद पर पदोन्नति दी जाती है। संघ का सवाल है कि जब अन्य विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए पदोन्नति और पदनाम परिवर्तन की व्यवस्था हो सकती है, तो स्वास्थ्य विभाग में भी ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं लागू की जा रही है। संगठन ने विभागीय कार्यों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को देखते हुए समान अवसर देने की मांग की है।

पदनाम बदलने और 4200 ग्रेड पे देने की मांग

संगठन ने कर्मचारियों के मौजूदा पदनामों में बदलाव करते हुए पदोन्नति की स्पष्ट व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा है। संघ की मांग के अनुसार— वार्ड ब्वाय और वार्ड आया को वार्ड सहायक, वरिष्ठ वार्ड सहायक और प्रभारी वार्ड सहायक बनाया जाए। सफाई कर्मचारी को पर्यावरण सहायक, वरिष्ठ पर्यावरण सहायक और प्रभारी पर्यावरण सहायक के पदनाम दिए जाएं। चौकीदार को गार्ड, वरिष्ठ गार्ड और मुख्य गार्ड के पदों पर पदोन्नति दी जाए। अनुसेवक को कार्यालय सहायक, वरिष्ठ कार्यालय सहायक और प्रभारी कार्यालय सहायक के पदनाम दिए जाएं। संघ ने इन पदों को तकनीकी प्रकृति के अनुरूप घोषित करते हुए उद्यान विभाग की तर्ज पर 4200 ग्रेड पे देने की मांग भी रखी है। संगठन का कहना है कि इससे कर्मचारियों को सेवा के दौरान पदोन्नति के अवसर मिलेंगे और वे सम्मानजनक स्थिति में सेवानिवृत्त हो सकेंगे।

प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा और महामंत्री सुनील अधिकारी ने कहा कि संगठन ने कर्मचारियों की मांगों को लेकर कई बार विभागीय स्तर पर प्रयास किए हैं। अब यदि महानिदेशक कार्यालय प्रशासन देहरादून की ओर से पदोन्नति और पदनाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आंदोलन करेगा। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर कर्मचारी असहयोग आंदोलन भी शुरू कर सकते हैं। उनका कहना है कि कर्मचारी वर्तमान में अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों के अतिरिक्त भी कई कार्यों में सहयोग करते हैं। यदि मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो संगठन ऐसे अतिरिक्त कार्यों में सहयोग बंद करने का निर्णय ले सकता है।

चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ का कहना है कि कर्मचारियों ने लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दिया है। संगठन चाहता है कि उनकी जिम्मेदारियों, अनुभव और कार्य की प्रकृति के अनुरूप पदोन्नति तथा वेतनमान की व्यवस्था की जाए। फिलहाल संघ ने महानिदेशालय देहरादून से मांगों पर प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने और लंबित मामलों पर निर्णय लेने की अपील की है। विभाग की ओर से इन मांगों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया या आगे की कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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By ATHAR

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