रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
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हरिद्वार 2026। कुंभ मेला-2027 में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और जनआस्था की झलक देखने को मिलेगी। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली देव डोलियों की भव्य शोभायात्रा और गंगा स्नान आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, 14 मार्च 2027 को ऋषिकेश में देव डोलियों की शोभायात्रा निकाली जाएगी, जबकि 15 मार्च को हरिद्वार में देव डोलियों का अमृत स्नान होगा।
इस आयोजन को व्यवस्थित और भव्य स्वरूप देने के लिए मेला प्रशासन और देवभूमि लोक संस्कृति विरासत शोभायात्रा समिति ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में मेला नियंत्रण भवन, हरिद्वार में अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती की अध्यक्षता में समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में देव डोलियों के आवागमन, शोभायात्रा के मार्ग, ठहराव स्थलों, स्नान व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
अधिकारियों और समिति के पदाधिकारियों ने आयोजन की धार्मिक गरिमा और पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर तैयारियों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया गया।
कुंभ-2027 में देवभूमि की लोक संस्कृति की दिखेगी झलक
कुंभ मेला देश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। हरिद्वार में आयोजित होने वाले इस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। कुंभ-2027 के दौरान देव डोलियों की शोभायात्रा और गंगा स्नान के आयोजन से उत्तराखंड की पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और लोक संस्कृति को सामने लाने का अवसर मिलेगा।
उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में देव डोलियों का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, देव डोलियों से जुड़े आयोजन श्रद्धा, सामुदायिक सहभागिता और पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे आयोजनों में श्रद्धालु अपनी परंपराओं से जुड़ते हैं और क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में भागीदारी करते हैं। कुंभ के दौरान प्रस्तावित शोभायात्रा में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की देव डोलियों के शामिल होने की तैयारी है। इससे हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और आगंतुकों को उत्तराखंड की विविध लोक परंपराओं को करीब से देखने का अवसर मिल सकता है।
देवभूमि लोक संस्कृति विरासत शोभायात्रा समिति की ओर से बैठक में बताया गया कि 15 मार्च 2027 को हरिद्वार में देव डोलियों का अमृत स्नान आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के लिए देव डोलियों के आगमन और उनके साथ आने वाले प्रतिनिधियों तथा श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं को लेकर तैयारी की जा रही है। अमृत स्नान से संबंधित आयोजन में आवागमन और स्नान व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। इसे ध्यान में रखते हुए मेला प्रशासन और आयोजन समिति के बीच व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की गई। आयोजन में शामिल होने वाली देव डोलियों के लिए निर्धारित मार्ग, ठहराव स्थलों और स्नान से जुड़े प्रबंधों को व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया।
अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने कहा कि देव डोलियों की शोभायात्रा और अमृत स्नान उत्तराखंड की धार्मिक मान्यताओं और लोक संस्कृति को व्यापक पहचान देने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। उन्होंने आयोजन की गरिमा बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
समिति के पदाधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि देव डोलियों की शोभायात्रा का कार्यक्रम 14 मार्च 2027 को ऋषिकेश में आयोजित किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 15 मार्च को हरिद्वार में अमृत स्नान होगा।
इस तरह दोनों शहरों में होने वाले कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए देव डोलियों के आवागमन, ठहराव और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाओं में समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा। समिति और मेला प्रशासन के बीच हुई बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा तथा संबंधित व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। आयोजन के पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखने के साथ ही भीड़ प्रबंधन और आवागमन को व्यवस्थित रखने की जरूरत पर भी विचार किया गया।
आवागमन मार्ग और ठहराव स्थलों पर हुई चर्चा
मेला नियंत्रण भवन में आयोजित बैठक में शोभायात्रा के मार्ग और ठहराव स्थलों से जुड़े विषय प्रमुखता से उठे। देव डोलियों के साथ आने वाले प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं को किसी तरह की अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
शोभायात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में मार्ग निर्धारण, समयबद्ध आवागमन और ठहराव स्थलों की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। इससे कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से संचालित करने और संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारियां स्पष्ट करने में मदद मिलती है। बैठक में स्नान व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर भी चर्चा की गई। मेला प्रशासन आयोजन समिति तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर आगे की तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है।
अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने कहा कि देव डोलियों की शोभायात्रा और अमृत स्नान के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और सदियों पुरानी परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर मिलेगा। उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान में लोक परंपराओं, क्षेत्रीय मान्यताओं और धार्मिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। देव डोलियों से जुड़े कार्यक्रम स्थानीय समुदायों के लिए आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम भी हैं।
कुंभ-2027 में प्रस्तावित इस आयोजन से देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को देवभूमि की परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिल सकता है। इसके साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। बैठक की अध्यक्षता अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने की। इसमें देवभूमि लोक संस्कृति विरासत शोभायात्रा समिति के पदाधिकारियों ने भाग लिया और तैयारियों से संबंधित जानकारी साझा की।
समिति के पदाधिकारियों ने देव डोलियों के आगमन, उनके साथ आने वाले प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा की। मेला प्रशासन ने आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए संबंधित व्यवस्थाओं पर विचार किया। इस तरह की बैठकों का उद्देश्य कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच तालमेल स्थापित करना और आयोजन से पहले आवश्यक व्यवस्थाओं की पहचान करना है। देव डोलियों की शोभायात्रा और अमृत स्नान को लेकर आगे की तैयारियां इसी समन्वय के आधार पर आगे बढ़ाई जाएंगी।
बैठक में देवभूमि लोक संस्कृति विरासत शोभायात्रा समिति के कार्यकारी अध्यक्ष हर्षमणि व्यास के साथ विपिन जोशी, बंशीधर पोखरियाल, द्वारिका भट्ट, रमेश पैन्यूली, गजेंद्र सिंह कंडियाल, भगवान सिंह रांगड़, प्रमोद डोभाल, जसराम ढोंढियाल, मुकेश जोशी और आचार्य भवानी दत्त मैंदोलिया सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक में देव डोलियों की शोभायात्रा और अमृत स्नान के आयोजन से जुड़ी तैयारियों पर विचार-विमर्श किया गया। मेला प्रशासन और समिति के पदाधिकारियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा, आवागमन और आयोजन की व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया।
कुंभ-2027 के दौरान प्रस्तावित देव डोलियों की शोभायात्रा और अमृत स्नान उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को सामने लाने वाला आयोजन होगा। कार्यक्रम की प्रस्तावित रूपरेखा के अनुसार 14 मार्च को ऋषिकेश में शोभायात्रा और 15 मार्च को हरिद्वार में अमृत स्नान आयोजित किया जाएगा। फिलहाल मेला प्रशासन और आयोजन समिति के बीच मार्ग, ठहराव, स्नान व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर चर्चा की गई है। आगे की तैयारियों में संबंधित विभागों का समन्वय और व्यवस्थाओं की समयबद्ध समीक्षा महत्वपूर्ण रहेगी।
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