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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
हरिद्वार
उत्तराखंड पुलिस लगातार कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता का भी परिचय दे रही है। इसी कड़ी में श्यामपुर पुलिस की तत्परता और सूझबूझ ने एक परिवार को बड़ी राहत दी। बिहार से पिछले चार महीनों से लापता एक मूक एवं मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक को हरिद्वार पुलिस ने सकुशल उसके परिवार से मिलाकर मानवता की मिसाल पेश की है।
घटना उस समय सामने आई जब थाना श्यामपुर पुलिस क्षेत्र में नियमित गश्त और चेकिंग अभियान चला रही थी। पुलिस टीम को बाहरपीली क्षेत्र के पास एक युवक संदिग्ध और लावारिस अवस्था में घूमता हुआ दिखाई दिया। युवक न तो बोल पा रहा था और न ही अपनी पहचान स्पष्ट रूप से बता पा रहा था। उसकी मानसिक स्थिति भी सामान्य नहीं लग रही थी। पुलिस टीम ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत संवेदनशीलता दिखाई और युवक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद उसे थाने लाकर भोजन, पानी और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई। पुलिस अधिकारियों ने युवक को विश्वास में लेकर उसकी पहचान और परिजनों तक पहुंचने का प्रयास शुरू किया।
थाना श्यामपुर पुलिस ने युवक की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जिला स्तर और प्रदेश स्तर पर संचालित खोया-पाया नेटवर्क के माध्यम से साझा की। पुलिस की सक्रियता और तकनीकी प्रयासों का परिणाम यह रहा कि मात्र तीन घंटे के भीतर युवक के परिजनों तक सूचना पहुंच गई। जांच के दौरान युवक के भाई राज नारायण यादव की पहचान हुई, जिन्होंने पुलिस से संपर्क कर बताया कि उनका भाई पिछले चार महीनों से लापता था। पूछताछ में युवक की पहचान नितीश कुमार पुत्र साधु यादव निवासी ग्राम बिहरानी पोस्ट मच्छी थाना बहेड़ी जिला दरभंगा बिहार के रूप में हुई।

परिजनों ने बताया कि नितीश कुमार मानसिक रूप से कमजोर है और बोलने में असमर्थ है। परिवार लंबे समय से उसकी तलाश कर रहा था, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल रही थी। हरिद्वार पुलिस की त्वरित कार्रवाई से उन्हें अपने बेटे और भाई के जीवित एवं सुरक्षित होने की जानकारी मिली। जब युवक का भाई थाना श्यामपुर पहुंचा और अपने खोए हुए भाई को देखा तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भावुक माहौल के बीच उसने पुलिस टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी, लेकिन हरिद्वार पुलिस ने उनके परिवार को फिर से जोड़ दिया।
पुलिस ने सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद युवक को उसके भाई के सुपुर्द कर दिया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने परिवार को विशेष बच्चों और मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों का अतिरिक्त ध्यान रखने की सलाह भी दी। एसएसपी नवनीत सिंह द्वारा पहले ही जनपद पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि महिला अपराध, नाबालिगों से जुड़े मामलों और गुमशुदगी की शिकायतों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए। श्यामपुर पुलिस की यह कार्रवाई उन्हीं निर्देशों का प्रभावी उदाहरण मानी जा रही है।
स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की इस संवेदनशील कार्यशैली की सराहना की। लोगों का कहना है कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की मदद करना भी उसका अहम दायित्व है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ और विशेष जरूरत वाले बच्चों व युवाओं के मामलों में परिवारों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। ऐसे व्यक्तियों के गुम होने की स्थिति में उन्हें पहचानना और सुरक्षित वापस लाना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पुलिस अधिकारियों ने आमजन से अपील की कि यदि कहीं कोई बच्चा, बुजुर्ग या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति संदिग्ध या लावारिस हालत में दिखाई दे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते उनकी सहायता की जा सके। हरिद्वार पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सतर्कता, तकनीक और मानवीय दृष्टिकोण के जरिए कई परिवारों की खुशियां वापस लौटाई जा सकती हैं।
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