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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
हरिद्वार
हरिद्वार पुलिस ने एक बार फिर संवेदनशीलता, तकनीकी सूझबूझ और मानवता का परिचय देते हुए अज्ञात शव की पहचान कर उसे उसके परिजनों तक पहुंचाने में बड़ी सफलता हासिल की है। ज्वालापुर कोतवाली पुलिस ने तीन दिन की लगातार मेहनत और सतर्क जांच के बाद एक अज्ञात शव की पहचान कर मृतक के परिवार को सूचना दी, जिससे परिजनों को अपने पिता के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार का अवसर मिल सका।
यह मामला 04 मई 2026 का है, जब थाना ज्वालापुर क्षेत्र के रेगुलेटर पुल के निकट जटवाड़ा पुल गंगनहर से एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और नियमानुसार पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को जिला अस्पताल हरिद्वार की मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया गया।
मृतक के पास किसी प्रकार का पहचान पत्र, दस्तावेज या अन्य स्पष्ट पहचान संबंधी सामग्री नहीं मिली, जिससे उसकी शिनाख्त करना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया। हालांकि, पुलिस ने हार नहीं मानी और हर छोटे सुराग को गंभीरता से जांचना शुरू किया। तलाशी के दौरान मृतक की जेब से एक पुराना और क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन मिला। फोन पूरी तरह खराब अवस्था में था, लेकिन उसमें एक सिम कार्ड मौजूद था। पुलिसकर्मियों ने तकनीकी प्रयास करते हुए उस सिम को अपने मोबाइल में लगाकर जानकारी निकालने का प्रयास किया। शुरुआत में कोई संपर्क या डेटा प्राप्त नहीं हो सका, लेकिन पुलिस ने लगातार प्रयास जारी रखे।
ज्वालापुर पुलिस ने उक्त सिम को सक्रिय रखा और लगातार निगरानी करती रही। आखिरकार 06 मई 2026 को उस नंबर पर एक कॉल प्राप्त हुई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने बताया कि यह नंबर “बिट्टू” नाम के व्यक्ति का है, जो हिमाचल प्रदेश में उसके यहां कारपेंटर का कार्य करता था। कॉलर द्वारा उपलब्ध कराए गए दूसरे मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर फोन मृतक की पुत्री हंसा देवी ने रिसीव किया। उन्होंने बताया कि यह नंबर उनके पिता ताराचंद उर्फ बिट्टू का है, जो पिछले कई दिनों से लापता थे।
पुलिस द्वारा मृतक के फोटोग्राफ व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे गए, जिन्हें देखकर हंसा देवी ने शव की पहचान अपने पिता के रूप में की। जानकारी मिलते ही मृतक के पुत्र नवीन कुमार और अन्य परिजन हरिद्वार के लिए रवाना हुए। दिनांक 07 मई 2026 को मृतक के परिजन हरिद्वार पहुंचे और मोर्चरी में शव देखकर उसकी पुष्टि की। मृतक की पहचान ताराचंद उर्फ बिट्टू पुत्र भगत राम, निवासी जिला मंडी हिमाचल प्रदेश के रूप में हुई।
आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इस दौरान मृतक के परिवार ने उत्तराखंड पुलिस और ज्वालापुर पुलिस की मेहनत, संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार की सराहना की।
परिजनों ने कहा कि यदि पुलिस इतनी गंभीरता और संवेदनशीलता से प्रयास नहीं करती, तो उन्हें अपने पिता के अंतिम दर्शन तक नसीब नहीं हो पाते। परिवार ने पुलिस टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस की मेहनत ने उनके दुख की घड़ी में बड़ी राहत दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय द्वारा अज्ञात शवों की पहचान के लिए जारी एसओपी का पालन करते हुए यह सफलता प्राप्त हुई है। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में हर छोटे सुराग को महत्वपूर्ण मानकर जांच की जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता का यह समन्वय पुलिस कार्यप्रणाली का सकारात्मक उदाहरण है। अज्ञात शवों की पहचान अक्सर कठिन होती है, लेकिन धैर्य और सतर्कता से कई मामलों को सुलझाया जा सकता है। स्थानीय लोगों ने भी ज्वालापुर पुलिस की इस कार्रवाई की प्रशंसा की है। उनका कहना है कि पुलिस का यह मानवीय चेहरा समाज में विश्वास बढ़ाने का कार्य करता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो ज्वालापुर पुलिस की यह कार्रवाई केवल एक जांच सफलता नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी मिसाल बन गई है। एक टूटे मोबाइल फोन से शुरू हुई जांच ने आखिरकार एक परिवार को अपने प्रियजन के अंतिम दर्शन का अवसर दिला दिया।
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