“हरिद्वार प्रेस क्लब में कांग्रेस की प्रदेश सहप्रभारी हरनीत कौर बरार प्रेसवार्ता करते हुए”“हरिद्वार प्रेस क्लब में कांग्रेस की प्रदेश सहप्रभारी हरनीत कौर बरार प्रेसवार्ता करते हुए”

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रिपोर्टर अंजू कुमारी

हरिद्वार। देश में महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस की प्रदेश सह-प्रभारी हरनीत कौर बरार ने भारतीय जनता पार्टी BJP पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा विपक्ष को महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ बताकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में है और इस मुद्दे पर हमेशा सकारात्मक रुख अपनाता रहा है।

प्रेस क्लब हरिद्वार में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान हरनीत कौर बरार ने कहा कि वर्ष 2023 में केंद्र सरकार द्वारा संसद में लाए गए महिला आरक्षण बिल को कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों ने समर्थन दिया था। ऐसे में भाजपा द्वारा विपक्ष पर विरोध का आरोप लगाना पूरी तरह से भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित है।

“भाजपा कर रही है राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश”

भाजपा फाइल फोटो

हरनीत कौर बरार ने अपने बयान में कहा कि भाजपा जनता के बीच गलत संदेश देने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “भाजपा यह प्रचारित कर रही है कि विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध कर रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल शुरू से ही महिलाओं को समान अधिकार और राजनीतिक भागीदारी देने के पक्षधर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि जब यूपीए सरकार के कार्यकाल में महिला आरक्षण बिल संसद में लाया गया था, तब भाजपा ने ही उसका विरोध किया था। ऐसे में अब भाजपा का यह दावा कि वह महिलाओं के अधिकारों की सबसे बड़ी समर्थक है, पूरी तरह से विरोधाभासी है।

“विशेष सत्र के पीछे था डिलीमिटेशन का एजेंडा”

हरनीत कौर बरार ने केंद्र सरकार द्वारा अचानक संसद का विशेष सत्र बुलाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण बिल की आड़ में सरकार डिलीमिटेशन (सीमांकन) का एजेंडा आगे बढ़ाना चाहती थी।

उन्होंने कहा,

“पांच राज्यों में चुनाव के बीच सरकार ने विशेष सत्र बुलाया, जिसका उद्देश्य महिला आरक्षण से ज्यादा डिलीमिटेशन को आगे बढ़ाना था। विपक्ष ने इस मंशा को भांप लिया और इसका विरोध किया, जिससे सरकार अपने इरादों में सफल नहीं हो सकी।”

कांग्रेस का इतिहास: महिलाओं को अधिकार देने में अग्रणी

हरिद्वार प्रेस क्लब में कांग्रेस की प्रदेश सहप्रभारी हरनीत कौर बरार प्रेसवार्ता करते हुए”

हरनीत कौर बरार ने कांग्रेस के ऐतिहासिक योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस सरकार ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया, जो एक ऐतिहासिक कदम था। इसके अलावा पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित कर उनकी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित की गई।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण की पक्षधर रही है। हमने केवल घोषणाएं नहीं कीं, बल्कि जमीनी स्तर पर महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए।”

इस दौरान हरिद्वार महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अंकुर सैनी ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है, जो सरकार की नीतियों और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

अंकुर सैनी ने कहा, “अगर सरकार वास्तव में महिलाओं के हित में काम कर रही होती, तो आज महिलाओं के खिलाफ अपराधों में इतनी बढ़ोतरी नहीं होती। कांग्रेस ही महिलाओं की सच्ची हितैषी है और आगे भी उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी।”

प्रेस वार्ता के दौरान कई युवा कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने पार्टी के विचारों का समर्थन किया और महिलाओं के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की बात कही। इस मौके पर दिव्यांश अग्रवाल, राकेश गुप्ता, अबरार अली, यश शर्मा, महबूब आलम, धनीराम शर्मा, पूजा शर्मा और उत्कर्ष वालिया सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

राजनीतिक बयानबाजी से परे वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत

A woman supporter कांग्रेस फाइल फोटो

विशेषज्ञों का मानना है कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचते हुए सभी दलों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।हरिद्वार में हुई इस प्रेस वार्ता ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल सामाजिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील है। जहां एक ओर कांग्रेस भाजपा पर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा खुद को महिलाओं के अधिकारों का सबसे बड़ा समर्थक बताने में लगी है।

ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में यह मुद्दा किस दिशा में जाता है और क्या वास्तव में महिलाओं को वह राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल पाता है, जिसकी वे हकदार हैं। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आगामी चुनावों में भी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना रहेगा।

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By ATHAR

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