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रिपोर्ट जतिन
हरिद्वार, 16 सितंबर 2025 – देवभूमि उत्तराखंड स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार आज एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना, जब यहां देश-विदेश के एआई विशेषज्ञों, नोबेल पुरस्कार विजेताओं और 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने “एआई : विश्वास एवं भविष्य” विषय पर अपने विचार साझा किए। इस सम्मेलन ने विज्ञान और अध्यात्म के बीच अनूठा संतुलन प्रस्तुत किया और दिखाया कि आधुनिक तकनीक का भविष्य केवल विज्ञान तक सीमित नहीं है बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी जुड़ा हुआ है।
अंतर्राष्ट्रीय एआई सम्मेलन का शुभारंभ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आधुनिक युग में एआई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज एआई का उपयोग अनेक क्षेत्रों में हो रहा है और इसकी शक्ति को आध्यात्मिक मूल्यों के साथ जोड़ना जरूरी है। एआई के माध्यम से भारत अपने ज्ञान और संस्कृति को पूरी दुनिया तक पहुंचा सकता है। ओम बिरला ने यह भी कहा कि तकनीकी नवाचार के जरिए नई पीढ़ी को मजबूत बनाने में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की भूमिका महत्त्वपूर्ण होगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में आयोजित यह सम्मेलन विज्ञान और अध्यात्म के संगम का प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के वैज्ञानिक आधारों का उल्लेख करते हुए आर्यभट्ट, आचार्य कणाद, नागार्जुन और महर्षि पतंजलि जैसे महान वैज्ञानिकों की खोजों को याद किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल आस्था और विश्वास पर आधारित नहीं है बल्कि उसमें वैज्ञानिक चिंतन और शोध की गहरी परंपरा रही है। धामी ने कहा कि एआई हमारे दैनिक जीवन को सरल बना रहा है और उद्योग, चिकित्सा, शिक्षा, कृषि सहित कई क्षेत्रों में तेजी से नवाचार का कारण बन रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि एआई की शक्ति का सही दिशा और उद्देश्य के साथ प्रयोग किया जाए तो यह करोड़ों लोगों के जीवन को बेहतर बना सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं है बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक जिम्मेदारी भी है।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति और संयुक्त राष्ट्र के आस्था एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आयोग के एशिया क्षेत्रीय कमिश्नर डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि हमें ध्यान रखना होगा कि कहीं एआई भस्मासुर न बन जाए। इसके समाधान के लिए युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य का चिंतन ही दिशा दिखाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एआई शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग और सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है, लेकिन इसके साथ नैतिकता, गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और रोजगार पर असर जैसी चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि इस युग में एआई के साथ नैतिकता और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का समावेश अनिवार्य है।
स्विट्जरलैंड के इंटर पार्लियामेंट्री यूनियन के महासचिव मार्टिल चुंगोंग ने वीडियो संदेश के माध्यम से एआई की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डाला। भारत सरकार के एआई मिशन के सीईओ डॉ. अभिषेक सिंह, स्टुअर्ट रसेल, रॉबर्ट ट्रैगर, विलियम जोन्स, जान टैलिन, स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश और नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सचिन चतुर्वेदी सहित कई विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए।
सम्मेलन में शामिल सभी अतिथियों को देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की ओर से गायत्री महामंत्र चादर और प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी यतीश्वरानंद, विधायक मदन कौशिक, राज्यमंत्री डॉ. जयपाल सिंह चौहान, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल, मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा कोण्डे, सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान सहित अनेक गणमान्य लोग और विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

इस सम्मेलन से जो मुख्य संदेश उभरकर सामने आया, वह यह है कि भविष्य केवल तकनीकी प्रगति पर आधारित नहीं होगा बल्कि उसमें आध्यात्मिक मूल्यों और नैतिक दृष्टिकोण का भी समावेश होना चाहिए। विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय ही मानवता को उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाएगा।
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