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रुड़की (आरएनएस)। केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई नई श्रम नीतियों के विरोध में गुरुवार को उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन ने जोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने 26 पुराने श्रम कानूनों को रद्द कर औद्योगिक श्रम संहिता लागू करने के निर्णय पर आपत्ति जताई और इसे कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताया। प्रदर्शन लक्सर स्थित यूनियन कार्यालय पर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारी एकत्रित हुए। शाखा सचिव नरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस गेट मीटिंग में कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें रखीं।
यूनियन का कहना है कि केंद्र सरकार ने 26 श्रम कानूनों को समाप्त कर उन्हें चार श्रम संहिताओं में समाहित कर दिया है, जिनमें औद्योगिक श्रम संहिता भी शामिल है। कर्मचारियों का आरोप है कि इस बदलाव से श्रमिकों की सुरक्षा, अधिकार और यूनियन की स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा। विशेष रूप से यूनियन की मान्यता के लिए 51 प्रतिशत वोटिंग की अनिवार्यता को लेकर नाराजगी जताई गई। यूनियन नेताओं का कहना है कि यह प्रावधान श्रमिक संगठनों के लिए व्यवहारिक नहीं है और इससे कर्मचारियों की आवाज कमजोर होगी।
यूनियन पदाधिकारियों के बयान
शाखा सचिव नरेंद्र कुमार ने कहा,
सरकार की मनमानी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करने वाले किसी भी कानून का हम विरोध करेंगे।”
महामंत्री बीसी शर्मा के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन हमेशा से कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करती आई है और आगे भी पीछे नहीं हटेगी। शाखा अध्यक्ष मो. सुभान खान ने कहा कि नई औद्योगिक श्रम संहिता से कर्मचारियों के अधिकार सीमित हो सकते हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।
प्रदर्शन के दौरान आयोजित गेट मीटिंग में यूनियन के कई सक्रिय सदस्य मौजूद रहे। इनमें मुनेश कुमार, प्रदीप कुमार, सगीर अली, अरविंद कुमार, प्रशांत राजपूत, महताब, इंतेज़ार हुसैन, सुनील कुमार, लालचंद, अजमत खान सहित अन्य कर्मचारी शामिल हुए। सभी ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और श्रम कानूनों में संशोधन की मांग की। केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में श्रम सुधारों के तहत कई पुराने कानूनों को समाहित कर चार नई श्रम संहिताएं लागू की हैं। सरकार का तर्क है कि इससे श्रम कानूनों की जटिलता कम होगी और उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, विभिन्न श्रमिक संगठनों का मानना है कि इन बदलावों से कर्मचारियों की सुरक्षा और अधिकारों में कटौती हो सकती है।
यूनियन की प्रमुख मांगें
उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- 26 पुराने श्रम कानूनों की बहाली या कर्मचारियों के हित में संशोधन।
- यूनियन मान्यता के लिए 51 प्रतिशत वोटिंग की अनिवार्यता पर पुनर्विचार।
- श्रमिक संगठनों से व्यापक संवाद के बाद ही कानून लागू किया जाए।
- रेलवे कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
सरकार का कहना है कि श्रम सुधारों का उद्देश्य श्रमिकों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाना है। नई श्रम संहिताओं से रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, यूनियनों का तर्क है कि बिना व्यापक सहमति के किए गए बदलाव कर्मचारियों के हितों के विपरीत हो सकते हैं।
यूनियन नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आवश्यक हुआ तो बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन अभियान भी चलाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि श्रम कानून जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार और श्रमिक संगठनों के बीच संवाद ही समाधान का रास्ता है। रुड़की में आयोजित यह प्रदर्शन दर्शाता है कि श्रम कानूनों में बदलाव को लेकर रेलवे कर्मचारियों के बीच असंतोष है। उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन ने स्पष्ट किया है कि वह कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। अब देखना यह होगा कि सरकार और यूनियन के बीच संवाद से कोई सकारात्मक समाधान निकलता है या आंदोलन आगे बढ़ता है।
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