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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
हरिद्वार। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गुरुवार को आयोग परिसर में भव्य रजत जयंती समारोह का आयोजन किया गया। पूरे कार्यक्रम में उत्साह, गौरव और उपलब्धियों की झलक देखने को मिली। समारोह में आयोग के पूर्व अध्यक्षों, सदस्यों, वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। इस दौरान आयोग की 25 वर्षों की यात्रा, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और तकनीकी सुधारों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “UKPSC MITRA” मोबाइल ऐप का शुभारंभ रहा, जिसे अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
समारोह का शुभारंभ राष्ट्रीय गीत और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। आयोग के अध्यक्ष डॉ. रवि दत्त गोदियाल ने मुख्य अतिथि पूर्व अध्यक्ष के. आर्या (IAS सेवानिवृत्त), विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधा रानी पाण्डे और अन्य अतिथियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने पिछले 25 वर्षों में राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आयोग ने अब तक 220 से अधिक सीधी भर्ती परीक्षाओं के माध्यम से 25 हजार से अधिक अभ्यर्थियों का चयन किया है। वहीं पदोन्नति से जुड़े चयन को शामिल किया जाए तो यह संख्या 40 हजार से भी अधिक हो जाती है।

डॉ. गोदियाल ने कहा कि आयोग का उद्देश्य युवाओं को निष्पक्ष और समान अवसर प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए कई डिजिटल पहल की जा रही हैं। आयोग द्वारा वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी किया जा रहा है ताकि अभ्यर्थियों को पहले से तैयारी का समय मिल सके। इसके अलावा दस्तावेजों का ऑनलाइन सत्यापन, परीक्षा केंद्रों का डिजिटल प्रबंधन और उत्तर पुस्तिकाओं का ऑनलाइन मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक के प्रयोग से भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता में बड़ा सुधार होगा। साथ ही पेपर लीक और फर्जी अभ्यर्थियों जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। आयोग ने भविष्य में भी तकनीकी नवाचारों के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम के दौरान आयोग के दिवंगत पूर्व अध्यक्षों और सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद आयोग के सचिव अशोक कुमार पाण्डेय ने आयोग की 25 वर्षों की यात्रा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री प्रस्तुत की। इसमें आयोग की उपलब्धियों, चुनौतियों और लगातार हुए विकास को दर्शाया गया। उन्होंने बताया कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए आयोग AI आधारित तकनीक और डिजिटल सुरक्षा उपायों पर भी कार्य कर रहा है।

समारोह में उपस्थित पूर्व अध्यक्ष मेजर जनरल आनंद सिंह रावत, डॉ. एन.एस. बिष्ट, लेफ्टिनेंट जनरल जी.एस. नेगी और अन्य पूर्व सदस्यों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने आयोग की निष्पक्ष कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने कम संसाधनों के बावजूद अपनी विश्वसनीय पहचान बनाई है। वक्ताओं ने कहा कि भविष्य में तकनीक आधारित भर्ती प्रक्रिया युवाओं के लिए अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक साबित होगी।
इस अवसर पर आयोग की विशेष स्मारिका “मेधा” के रजत जयंती संस्करण का विमोचन भी किया गया। इस स्मारिका का उद्देश्य युवाओं को लोक सेवा के प्रति प्रेरित करना और सरकारी सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही आयोग के नए “रजत जयंती लोगो” का भी अनावरण किया गया, जो उत्कृष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता का प्रतीक बताया गया।
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण क्षण “UKPSC MITRA” मोबाइल ऐप का लॉन्च रहा। आयोग के अधिकारियों ने बताया कि यह ऐप अभ्यर्थियों को परीक्षा से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराएगा। ऐप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में कार्य करेगा। अभ्यर्थी इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। इसके जरिए परीक्षा तिथि, एडमिट कार्ड, रिजल्ट और अन्य जरूरी सूचनाएं आसानी से प्राप्त की जा सकेंगी।
मुख्य अतिथि के. आर्या ने अपने संबोधन में आयोग के शुरुआती दिनों की चुनौतियों को याद किया। उन्होंने बताया कि स्थापना के समय आयोग के पास सीमित संसाधन थे, लेकिन लगातार प्रयासों और सरकार के सहयोग से आयोग ने अपनी मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि आज आयोग आधुनिक सुविधाओं और तकनीकी संसाधनों से लैस होकर युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया संचालित कर रहा है।
समारोह में आयोग के वर्तमान सदस्य, पूर्व अधिकारी, कर्मचारी और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ सदस्य अनिल कुमार राणा ने सभी अतिथियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की रजत जयंती केवल एक उत्सव नहीं बल्कि राज्य के युवाओं के लिए भरोसे, पारदर्शिता और नई तकनीकी व्यवस्था की दिशा में बढ़ते कदम का प्रतीक भी बनी। आयोग की डिजिटल पहल और नई योजनाओं से आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया और अधिक तेज, सुरक्षित और निष्पक्ष होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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