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हल्द्वानी/देहरादून। उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस घटना को सामाजिक भेदभाव और कथित छुआछूत से जोड़ते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले को जातिगत विवाद के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि उनके अनुसार विवाद धार्मिक नारों और कार्यक्रम स्थल से जुड़ा था। मामले को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में पूरे घटनाक्रम में यह समझना जरूरी है कि किस नेता ने क्या कहा और विवाद की शुरुआत कैसे हुई।
धामी ने कहा भारतीय जनता पार्टी के कोई पदाधिकारी या कार्यकर्ता ने ये शुद्धिकरण नहीं किया। उत्तराखंड में कोई नहीं जानता कि खड़गे जी की जाति क्या है। वहां धार्मिक उन्माद के नारे लगाए गए और गंदगी की गई जबकि वह एक धार्मिक स्थान है जहां रामलीला का मंचन होता है। ये नारे एक धर्म विशेष के लोगों ने लगाए थे। इसी के विरोध में जो धार्मिक संगठन के लोग थे उन्होंने वहां पर शुद्धिकरण का कार्यक्रम किया था। मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी मुद्दा विहीन हो गई है। उन्होंने कहा ‘उत्तराखंड में आज इसे कौन स्वीकार करेगा कि यहां पर जाति का भेदभाव होता है। और हमारे प्रधानमंत्री जी के नेतत्व में सबका साथ सबका विकास मंत्र के साथ पूरे देश में काम किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष जब सीताराम केसरी थे तो उनके साथ किस तरह का बर्ताव किया गया था कैसे उन्हें कार्यालय से बाहर निकाला गया था। बाबू जगजीवन राम के साथ क्या किया था
बताया गया है कि 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक रैली को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद, 10 अगस्त को एक संगठन से जुड़े कुछ लोगों द्वारा मैदान में कथित रूप से ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’ किए जाने की बात सामने आई। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को खड़गे के अपमान से जोड़कर सवाल उठाए। इसके बाद मामला धीरे-धीरे राजनीतिक विवाद में बदल गया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि किसी दलित नेता की मौजूदगी के बाद मंच या स्थल का शुद्धिकरण किया जाना सामाजिक भेदभाव की मानसिकता को दर्शाता है। दूसरी ओर, इस आयोजन को लेकर भाजपा की ओर से यह कहा गया कि पार्टी का इससे कोई संबंध नहीं था।
और बाबा भीमराव अंबेडकर के साथ कभी उन्हें भारत रत्न तक नहीं दिया गया और संसद में नहीं पहुंचने दिया गया। कांग्रेस ने हमेशा तुष्टिकरण के लिए काम किया है और अब वे वोटों के लिए ऐसा नैरेटिव बनाना चाहते हैं। मैं कहता हूं कि हर किसी को पता चल चुका है कि कोई भी इस तरह की घटना नहीं हुई है। न खड़गे जी के खिलाफ न ही कांग्रेस पार्टी के खिलाफ।
राहुल गांधी ने कहा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 29 अगस्त को इस विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। राहुल गांधी ने कथित शुद्धिकरण को छुआछूत से जोड़ते हुए इसे दलितों के सम्मान से जुड़ा विषय बताया। उनके बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई। कांग्रेस की ओर से इस घटना को सामाजिक समानता और संविधान में दिए गए अधिकारों के संदर्भ में उठाया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता। राहुल गांधी के आरोपों के बाद भाजपा और उत्तराखंड सरकार की ओर से भी जवाब सामने आया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा कि भाजपा के किसी पदाधिकारी या कार्यकर्ता द्वारा ऐसा कार्यक्रम नहीं कराया गया था।
CM धामी ने आरोपों पर कहा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उत्तराखंड में इस तरह का जातिगत भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस पूरे मामले को अलग तरीके से पेश कर रही है। धामी के मुताबिक, रामलीला मैदान एक धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल है, जहां धार्मिक आयोजन होते हैं। उनका दावा है कि रैली के दौरान कथित रूप से कुछ धार्मिक नारे लगाए गए थे, जिसके विरोध में धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शुद्धिकरण कार्यक्रम किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा के किसी पदाधिकारी या कार्यकर्ता का इस कार्यक्रम से संबंध नहीं था। उन्होंने कांग्रेस पर मुद्दाविहीन होने और राजनीतिक लाभ के लिए इस विवाद को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया।
भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ी बयानबाजी
मामले में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कथित शुद्धिकरण की घटना पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं भाजपा की ओर से घटना से दूरी बनाए जाने और इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताए जाने की बात सामने आई है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे भेदभाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कथित शुद्धिकरण को सामान्य धार्मिक गतिविधि मानने की कोशिशों पर आपत्ति जताई। इससे साफ है कि मामला अब केवल हल्द्वानी के एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
जाति को लेकर बयान पर भी विवाद
इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री धामी के उस बयान की भी चर्चा हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में लोग खड़गे की जाति के बारे में नहीं जानते। हालांकि, इस बयान को संदर्भ से अलग करके देखने के बजाय पूरे राजनीतिक वक्तव्य के संदर्भ में समझना जरूरी है। धामी ने अपने बयान में मुख्य रूप से यह तर्क रखा कि उत्तराखंड में जातिगत भेदभाव को स्वीकार नहीं किया जाता और कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम को जाति के बजाय धार्मिक नारों से जोड़कर देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, कांग्रेस इस घटना को सामाजिक
विवाद बढ़ने के साथ अब सबकी नजर प्रशासनिक स्तर पर होने वाली संभावित कार्रवाई और मामले से जुड़े तथ्यों पर है। यदि किसी शिकायत या जांच में कानून के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित एजेंसियां नियमानुसार कार्रवाई कर सकती हैं। राजनीतिक रूप से यह मुद्दा उत्तराखंड में कांग्रेस और भाजपा के बीच आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है। दोनों दल इस घटना को अपने-अपने राजनीतिक और वैचारिक नजरिए से देख रहे हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राहुल गांधी ने कथित शुद्धिकरण को सामाजिक भेदभाव से जोड़कर कार्रवाई की मांग की है, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस आरोप को खारिज करते हुए इसे धार्मिक नारों से जुड़ा विवाद बताया है।
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