पिरान कलियर उर्स मेले में Smart Safety Tag टीम और हरिद्वार पुलिस द्वारा परिवार से बिछड़े बच्चों को परिजनों से मिलाने की पहलपिरान कलियर उर्स मेले में Smart Safety Tag टीम और हरिद्वार पुलिस द्वारा परिवार से बिछड़े बच्चों को परिजनों से मिलाने की पहल

रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

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कलियर/हरिद्वार। पिरान कलियर शरीफ उर्स मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़भाड़ के बीच परिवार से बिछड़ने वाले बच्चों की मदद के लिए हरिद्वार पुलिस और Smart Safety Tag टीम की पहल प्रभावी साबित हुई। उर्स मेले के दौरान QR Code आधारित स्मार्ट सेफ्टी टैग व्यवस्था के माध्यम से परिवार से बिछड़े 23 बच्चों को सुरक्षित उनके माता-पिता और अभिभावकों से मिलाया गया।

मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा और उनके परिजनों से संपर्क स्थापित करना पुलिस के सामने महत्वपूर्ण चुनौती रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार पुलिस ने नेक्सोरा टेक्नोलॉजी की Smart Safety Tag टीम के साथ समन्वय कर QR Code आधारित व्यवस्था लागू की थी। इस व्यवस्था का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर बच्चों की पहचान और उनके परिवार से संपर्क स्थापित करने में सहायता उपलब्ध कराना था।

भीड़ को देखते हुए लागू की गई व्यवस्था

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के आदेशानुसार, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी भगवानपुर के पर्यवेक्षण में पिरान कलियर शरीफ उर्स मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष प्रबंध किए गए थे। मेले में दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिसके कारण प्रमुख स्थानों और मार्गों पर भीड़ बनी रही।

ऐसे आयोजनों में कई बार बच्चे भीड़ के बीच अपने माता-पिता या अभिभावकों से अलग हो जाते हैं। परिवार से बिछड़ने की स्थिति में बच्चे और उनके परिजन दोनों परेशान हो जाते हैं। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने Smart Safety Tag टीम के साथ मिलकर तकनीक आधारित सहायता व्यवस्था का इस्तेमाल किया। QR Code वाले स्मार्ट सेफ्टी टैग के माध्यम से जरूरत पड़ने पर बच्चे की जानकारी तक पहुंचने और संबंधित परिवार से संपर्क स्थापित करने में मदद मिलती है। इससे खोए हुए बच्चों को सुरक्षित तरीके से उनके परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाने में सहायता मिली।

उर्स मेले के दौरान Smart Safety Tag व्यवस्था के तहत कुल 23 गुमशुदा अथवा परिवार से बिछड़े बच्चों को सुरक्षित उनके माता-पिता या अभिभावकों से मिलाया गया। बच्चों को उनके परिजनों तक पहुंचाने में पुलिस टीम और स्मार्ट सेफ्टी टैग टीम के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहा। पुलिस के अनुसार, QR Code आधारित व्यवस्था का उपयोग आवश्यकता के समय बच्चों की पहचान और परिवार से संपर्क स्थापित करने में सहायक रहा। इससे मेले में बच्चों से संबंधित मामलों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिली। परिवार से बिछड़े बच्चों को सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचाए जाने के बाद संबंधित परिवारों ने पुलिस और Smart Safety Tag टीम के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया। परिजनों ने इस व्यवस्था को भीड़भाड़ वाले आयोजनों में बच्चों की सुरक्षा के लिए उपयोगी बताया।

Smart Safety Tag की QR Code आधारित प्रक्रिया को सरल तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर टैग को स्कैन करके संबंधित बच्चे के परिवार से संपर्क स्थापित करने में सहायता मिलती है। खासकर बड़े धार्मिक आयोजनों में जहां अलग-अलग क्षेत्रों से लोग पहुंचते हैं, ऐसी तकनीक पुलिस की पारंपरिक सहायता व्यवस्था के साथ अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध करा सकती है। उर्स मेले में पुलिस हेल्प डेस्क, खोया-पाया केंद्र और अन्य सहायता तंत्र के साथ इस प्रकार की तकनीकी व्यवस्था का समन्वय बच्चों को उनके परिवार तक पहुंचाने में मददगार रहा। हरिद्वार पुलिस और Smart Safety Tag टीम की ओर से किए गए प्रयासों को मेले में मौजूद आम लोगों ने भी सराहा। परिवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि बच्चों को सुरक्षित तरीके से उनके माता-पिता या अभिभावकों तक पहुंचाया गया।

पिरान कलियर शरीफ उर्स मेले में सामने आए सकारात्मक परिणामों को देखते हुए QR Code आधारित Smart Safety Tag व्यवस्था का उपयोग भविष्य में अन्य बड़े आयोजनों में भी किया जा सकता है। धार्मिक मेले, कुंभ मेला, तीर्थयात्रा, पर्यटन स्थल और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक आयोजनों में ऐसी व्यवस्था पुलिस और प्रशासन के लिए सहयोगी हो सकती है।

बड़े आयोजनों के दौरान बच्चों के अलावा बुजुर्गों और अन्य जरूरतमंद लोगों के लिए भी पहचान और संपर्क से जुड़ी सहायता व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। हालांकि किसी भी तकनीकी व्यवस्था के साथ पुलिस हेल्प डेस्क, खोया-पाया केंद्र और प्रशिक्षित कर्मचारियों की भूमिका भी अहम रहती है। कलियर उर्स जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए पुलिस, प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं और तकनीकी टीमों के बीच समन्वय जरूरी होता है। Smart Safety Tag व्यवस्था इसी समन्वय का एक उदाहरण रही।

उर्स मेले के दौरान बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने में किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए 11 सितंबर 2026 को पुलिस अधीक्षक ग्रामीण द्वारा Smart Safety Tag टीम को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। पुलिस की ओर से तकनीकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे जनसेवा से जुड़ा उपयोगी प्रयास माना गया। सम्मान के दौरान टीम के सदस्यों के योगदान को भी रेखांकित किया गया। पुलिस और Smart Safety Tag टीम की ओर से किए गए इस प्रयास से उन 23 परिवारों को राहत मिली, जिनके बच्चे मेले की भीड़ में उनसे अलग हो गए थे। समय रहते बच्चों को सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचाया गया।

बच्चों के सुरक्षित रूप से परिजनों से मिलने के बाद उनके परिवारों ने हरिद्वार पुलिस और Smart Safety Tag टीम का आभार जताया। परिजनों के लिए बच्चों का सुरक्षित मिलना सबसे बड़ी राहत रही। पुलिस की ओर से आमजन से भी अपील की जाती है कि बड़े मेलों और सार्वजनिक आयोजनों में बच्चों पर विशेष नजर रखें। बच्चों को अपने नाम, माता-पिता का नाम और संपर्क नंबर जैसी जरूरी जानकारी याद कराने के साथ भीड़ में अलग होने की स्थिति में पुलिस सहायता केंद्र या खोया-पाया केंद्र से संपर्क करना उपयोगी हो सकता है।

पिरान कलियर शरीफ उर्स मेले में 23 बच्चों को सुरक्षित उनके परिवारों से मिलाने की यह पहल भीड़भाड़ वाले आयोजनों में पुलिस व्यवस्था के साथ तकनीक के इस्तेमाल की उपयोगिता को सामने लाती है। भविष्य में ऐसे आयोजनों में सुरक्षा और सहायता व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए इस तरह के समन्वित प्रयास उपयोगी साबित हो सकते हैं।

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By ATHAR

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