रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
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हरिद्वार। हरिद्वार पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने मानवीय संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए करीब 15 दिन से लापता एक बालक को सकुशल बरामद कर उसके परिजनों से मिलवा दिया। बालक घर से बिना बताए निकलकर हरिद्वार पहुंच गया था। पुलिस टीम ने उसे हर की पैड़ी क्षेत्र के विभिन्न गंगा घाटों से अत्यंत दयनीय स्थिति में रेस्क्यू किया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और काउंसलिंग के बाद बालक को उसकी दादी और बहन के सुपुर्द कर दिया गया।
बालक के सकुशल मिलने की सूचना जब उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में रहने वाली उसकी बुजुर्ग दादी को मिली, तो वह अपनी पोती के साथ तुरंत हरिद्वार पहुंचीं। लंबे समय से पोते की तलाश कर रही दादी की उससे मुलाकात हुई तो उनकी आंखें भर आईं। परिजनों ने हरिद्वार पुलिस का आभार जताते हुए टीम के प्रयासों की सराहना की। स से मिली जानकारी के अनुसार, मुरादाबाद निवासी बालक, जिसका नाम उसकी पहचान सुरक्षित रखने के लिए अजमल (काल्पनिक नाम) रखा गया है, करीब 15 दिन पहले घर से नाराज होकर निकल गया था। बताया गया कि वह रेल के माध्यम से हरिद्वार पहुंचा था। घर से निकलने के बाद वह हरिद्वार के अलग-अलग स्थानों पर भटक रहा था।
इस दौरान बालक की स्थिति काफी खराब हो गई थी। हर की पैड़ी क्षेत्र के विभिन्न गंगा घाटों पर उसे दयनीय हालत में देखा गया। इसके बाद हरिद्वार पुलिस की AHTU टीम ने उसे रेस्क्यू किया और उसकी सुरक्षा तथा देखभाल से जुड़ी आवश्यक कार्रवाई शुरू की। बालक के परिजनों की तलाश और उनसे संपर्क स्थापित करने के प्रयास किए गए। पुलिस की ओर से मिली सूचना के बाद परिवार को उसके हरिद्वार में सुरक्षित मिलने की जानकारी दी गई।
दादी ने बताई पोते के लापता होने की पूरी कहानी
बालक की बुजुर्ग दादी रफीकिन ने बताया कि उनके पोते के माता-पिता का देहांत हो चुका है। इसके बाद से वह अपनी नानी के घर रह रहा था। कुछ समय पहले ही वह दादी के पास आया था। दादी ने बताया कि उनकी उम्र अधिक है और स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने के कारण उन्हें चलने-फिरने में भी परेशानी होती है।
दादी के मुताबिक, करीब 15 दिन पहले उन्होंने बालक को दवाई लाने के लिए 300 रुपये दिए थे। उन्होंने उससे मेडिकल स्टोर से दवाई लाने को कहा था। इसके बाद वह घर पर पोते के लौटने का इंतजार करती रहीं, लेकिन बालक वापस नहीं आया। काफी देर तक इंतजार करने के बाद दादी ने उसकी तलाश शुरू की। परिवार और आसपास के लोगों से जानकारी जुटाने के बावजूद बालक का पता नहीं चल पाया। पोते के अचानक लापता होने से परिवार चिंतित था। दादी ने बताया कि जब हरिद्वार पुलिस की ओर से उनके मोबाइल फोन पर संपर्क कर पोते के सुरक्षित मिलने की सूचना दी गई, तो उन्हें राहत मिली। इसके बाद वह अपनी पोती के साथ बिना देर किए हरिद्वार के लिए रवाना हो गईं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के दिशा-निर्देशन में तथा पुलिस उपाधीक्षक रुड़की एवं AHTU की नोडल अधिकारी ओशिन जोशी के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई। प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र रमोला के नेतृत्व में AHTU टीम ने बालक की सुरक्षा और उसे परिजनों से मिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए। पुलिस टीम ने बाल कल्याण समिति हरिद्वार के अध्यक्ष प्रिय बंधु से समन्वय स्थापित किया। बालक की दादी के हरिद्वार पहुंचने और उनसे मुलाकात की प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए समिति से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध भी किया गया।
इसके बाद बालक की दादी को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। वीडियो कॉल के माध्यम से बालक, उसकी दादी और बहन की काउंसलिंग कराई गई। पहचान और पारिवारिक स्थिति से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही जरूरी विधिक औपचारिकताएं भी पूरी की गईं। इन प्रयासों के बाद बालक को उसके परिजनों से मिलवाया जा सका। पुलिस और बाल कल्याण समिति के समन्वय से पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
करीब 15 दिनों से पोते की तलाश कर रही दादी जब हरिद्वार पहुंचीं और उन्होंने उसे सुरक्षित देखा, तो वह भावुक हो गईं। मुलाकात के दौरान उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे। दादी ने पुलिसकर्मियों के प्रति बार-बार आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उम्र और खराब स्वास्थ्य के कारण वह खुद अधिक भाग-दौड़ नहीं कर सकती थीं। ऐसे में पोते के लापता होने से उनकी चिंता लगातार बढ़ रही थी। हरिद्वार पुलिस से फोन पर मिली सूचना ने उन्हें बड़ी राहत दी। दादी ने पुलिस के सहयोग को याद करते हुए धन्यवाद दिया। परिवार के लिए यह मुलाकात राहत भरा पल रही, क्योंकि लंबे समय से लापता बालक सुरक्षित अपने परिजनों के बीच पहुंच गया।
इस पूरे मामले में AHTU हरिद्वार की टीम ने बालक को रेस्क्यू करने से लेकर उसके परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में सहयोग किया। टीम में महिला कांस्टेबल शशिबाला, कांस्टेबल दीपक और कांस्टेबल चालक दीपक शामिल रहे। पुलिस की इस कार्रवाई में बालक की सुरक्षा, परिवार से संपर्क, काउंसलिंग और बाल कल्याण समिति के साथ समन्वय जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया। बालक को परिजनों से मिलाने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। यह घटना इस बात को भी रेखांकित करती है कि घर से लापता होने वाले बच्चों की तलाश में पुलिस, परिवार और बाल कल्याण से जुड़ी संस्थाओं के बीच समय पर संपर्क और सहयोग महत्वपूर्ण होता है।
बच्चों का घर से अचानक चले जाना परिवार के लिए चिंता का विषय बन सकता है। ऐसे मामलों में परिजनों को तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना देनी चाहिए, ताकि बच्चे की तलाश समय रहते शुरू की जा सके। बच्चों को भी परिवार के सदस्यों से संपर्क बनाए रखने और किसी परेशानी की स्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति या पुलिस से मदद लेने के बारे में जागरूक करना जरूरी है। हरिद्वार पुलिस की AHTU टीम की इस कार्रवाई में एक लापता बालक को सुरक्षित बरामद कर उसके परिवार से मिलाने में सफलता मिली। बालक की पहचान गोपनीय रखते हुए पुलिस और संबंधित संस्थाओं की ओर से पूरी प्रक्रिया पूरी की गई। करीब 15 दिन से लापता बालक के सकुशल मिलने से उसके परिवार ने राहत की सांस ली। हरिद्वार पुलिस की AHTU टीम ने बाल कल्याण समिति के सहयोग से बालक को उसकी दादी और बहन से मिलवाया। परिजनों ने इस सहयोग के लिए हरिद्वार पुलिस का धन्यवाद किया।
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