रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
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हरिद्वार 2026। हरिद्वार में ऑपरेशन प्रहार के तहत कोतवाली नगर पुलिस ने साधु-संतों का वेश धारण कर घूम रहे 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, ये लोग लोगों को उनकी व्यक्तिगत और घरेलू समस्याओं का समाधान कराने का प्रलोभन देकर कथित तौर पर भ्रमित करते थे। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सभी 17 लोगों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 172(2) के तहत गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है।
पुलिस का कहना है कि अभियान का उद्देश्य धार्मिक आस्था का सहारा लेकर लोगों को भ्रमित करने और कथित रूप से ठगी करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है। कार्रवाई कोतवाली नगर हरिद्वार पुलिस ने की। पुलिस के अनुसार, साधु-संतों के भेष में घूम रहे इन लोगों के व्यवहार और गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की गई। हरिद्वार पुलिस की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन प्रहार के अंतर्गत अलग-अलग तरह की संदिग्ध और गैरकानूनी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में कोतवाली नगर पुलिस ने साधु-संतों के वेश में घूम रहे 17 लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की।
पुलिस के मुताबिक, इन लोगों पर आरोप है कि वे धार्मिक वेशभूषा का इस्तेमाल कर आम लोगों को प्रभावित करते थे। वे विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को उनकी निजी या घरेलू समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाकर अपने संपर्क में लाते थे। पुलिस का कहना है कि इस तरह लोगों को भ्रमित कर उनसे लाभ लेने की आशंका के आधार पर कार्रवाई की गई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम, पते, गिरफ्तारी के सटीक स्थान और कथित ठगी से जुड़े किसी विशेष मामले का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए फिलहाल कार्रवाई के संबंध में पुलिस की ओर से दी गई जानकारी ही उपलब्ध है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोग साधु-संतों जैसी वेशभूषा धारण कर सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे थे। आरोप है कि वे लोगों की व्यक्तिगत परेशानियों और घरेलू समस्याओं का समाधान कराने का प्रलोभन देते थे। इस तरह लोगों को प्रभावित करने और उनकी धार्मिक भावनाओं का लाभ उठाने की आशंका जताई गई है।
धार्मिक आस्था समाज में व्यक्तिगत विश्वास और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में किसी व्यक्ति द्वारा आस्था के नाम पर गलत जानकारी देकर लोगों से अनुचित लाभ लेने की शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जानी चाहिए। पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य कथित रूप से लोगों को भ्रमित करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाना बताया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होते। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है कि आरोपी कथित तौर पर विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को उनकी निजी या घरेलू समस्याओं का समाधान कराने का भरोसा देते थे। ऐसे मामलों में लोगों को किसी भी तरह का निर्णय लेने से पहले संबंधित दावों की सत्यता की जांच करने की आवश्यकता होती है।
यदि कोई व्यक्ति किसी समस्या का समाधान कराने के नाम पर पैसे, कीमती सामान या अन्य लाभ की मांग करता है, तो संबंधित व्यक्ति को सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या कथित ठगी की स्थिति में पुलिस को सूचना देना उचित कदम हो सकता है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हर साधु, संत या धार्मिक वेशभूषा धारण करने वाला व्यक्ति संदिग्ध नहीं होता। कार्रवाई का संबंध पुलिस द्वारा बताए गए विशिष्ट आरोपों और परिस्थितियों से है। किसी पूरे धार्मिक समुदाय या वेशभूषा के आधार पर सभी लोगों को एक जैसा मानना उचित नहीं है।
कोतवाली नगर पुलिस के अनुसार, सभी 17 लोगों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 172(2) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है। कानूनी मामलों में यह महत्वपूर्ण है कि गिरफ्तारी या पुलिस कार्रवाई को अंतिम दोषसिद्धि के रूप में न देखा जाए। संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों और आगे की प्रक्रिया का निर्धारण लागू कानून तथा सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई के अनुसार होता है।
उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया है कि कथित ठगी के संबंध में कोई अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है या किसी पीड़ित ने औपचारिक शिकायत दी है। इसी तरह, किसी कथित आर्थिक लेन-देन या बरामदगी का विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसलिए खबर में इन पहलुओं को लेकर कोई अतिरिक्त दावा नहीं किया जा रहा है।
इस कार्रवाई के संदर्भ में आम नागरिकों के लिए यह जरूरी है कि वे निजी या घरेलू समस्याओं के समाधान का दावा करने वाले लोगों की बातों को बिना जांचे स्वीकार न करें। विशेष रूप से यदि कोई व्यक्ति किसी समस्या को दूर करने के नाम पर धन या अन्य वस्तु की मांग करता है, तो उसके दावों की सत्यता परखना जरूरी है।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि, धोखाधड़ी या दबाव की स्थिति में संबंधित व्यक्ति पुलिस से संपर्क कर सकता है। शिकायत करते समय घटना से जुड़ी सही जानकारी, उपलब्ध साक्ष्य और अन्य प्रासंगिक विवरण देना जांच में सहायक हो सकता है। पुलिस की कार्रवाई के बारे में जानकारी देते समय यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही होती है। किसी व्यक्ति की पहचान, तस्वीर या निजी जानकारी प्रकाशित करने से पहले उसकी पुष्टि और प्रकाशन से जुड़े कानूनी पहलुओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
कोतवाली नगर हरिद्वार पुलिस की यह कार्रवाई ऑपरेशन प्रहार के तहत की गई कार्रवाई के रूप में सामने आई है। पुलिस के अनुसार, धार्मिक वेशभूषा के सहारे लोगों को भ्रमित करने और कथित रूप से ठगी करने की गतिविधियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। पुलिस का उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना और लोगों को कथित धोखाधड़ी से बचाने के लिए संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखना है। ऐसे मामलों में शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच तथा कार्रवाई की जाती है।
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