हरिद्वार कोषागार निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के साथ वित्तीय प्रबंधन की समीक्षा करते महालेखाकार मोहम्मद परवेज़ आलमहरिद्वार कोषागार निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के साथ वित्तीय प्रबंधन की समीक्षा करते महालेखाकार मोहम्मद परवेज़ आलम

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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

हरिद्वार 2026। वित्तीय प्रबंधन को और अधिक मजबूत, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), उत्तराखंड मोहम्मद परवेज़ आलम ने हरिद्वार कोषागार का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कोषागार से जुड़े वित्तीय अभिलेखों, बजट के उपयोग, भुगतान प्रक्रियाओं और लेखांकन व्यवस्था की समीक्षा की। अधिकारियों को वित्तीय नियमों का पालन करते हुए सरकारी धन के निर्धारित एवं स्वीकृत मदों में ही उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जनपद आगमन पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने महालेखाकार मोहम्मद परवेज़ आलम का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। इसके बाद जिला कार्यालय सभागार में वित्तीय प्रबंधन से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य कोषाधिकारी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में महालेखाकार ने मुख्य कोषाधिकारी को निर्देश दिए कि शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए बजट का उपयोग केवल स्वीकृत मद एवं लेखा शीर्षक के अनुरूप जनकल्याणकारी योजनाओं में ही किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं से संबंधित प्रत्येक भुगतान पूर्ण पारदर्शिता, वित्तीय नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुनिश्चित किया जाए।

महालेखाकार ने कहा कि योजनाओं के सफल क्रियान्वयन एवं वित्तीय भुगतान के लिए यदि किसी विभाग को बैंक खाता खोलने की आवश्यकता होती है तो वित्त विभाग की गाइडलाइन के अनुसार ही सेविंग अकाउंट खोला जाए तथा सभी वित्तीय लेन-देन नियमानुसार किए जाएं।
उन्होंने बताया कि इस बैठक का उद्देश्य सरकारी वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, लेखा मिलान (Reconciliation) की प्रक्रिया को सुदृढ़ करना तथा लेखांकन कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

जिलाधिकारी ने महालेखाकार को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा दिए गए सभी दिशा-निर्देशों एवं सुझावों का संबंधित अधिकारियों द्वारा शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि जनपद में वित्तीय प्रबंधन और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जा सके। बैठक में वरिष्ठ कोषाधिकारी अजय कुमार ने महालेखाकार को कोषागार से संबंधित वित्तीय मामलों के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई गई
बैठक में महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), उत्तराखण्ड देहरादून की निरीक्षण टीम द्वारा कोषागार हरिद्वार का अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक के अभिलेखों का निरीक्षण किया गया।

हरिद्वार कोषागार निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के साथ वित्तीय प्रबंधन की समीक्षा करते महालेखाकार मोहम्मद परवेज़ आलम

इस दौरान नगर आयुक्त नगर निगम हरिद्वार नंदन कुमार,मुख्य विकास अधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्र, निरीक्षण अधिकारी अविनाश रंजन, वरिष्ठ लेखाकार बृजेश कुमार,सहायक लेखा अधिकारी डॉ दिनेश शर्मा तथा लेखाकार नितेश चौहान सहित महालेखाकार के अधिकारी,जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे ।

स्वीकृत मदों के अनुसार ही बजट खर्च करने के निर्देश

समीक्षा बैठक के दौरान महालेखाकार ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की ओर से उपलब्ध कराए गए बजट का उपयोग केवल निर्धारित एवं स्वीकृत मद तथा संबंधित लेखा शीर्षक के अनुरूप ही किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं के संचालन में वित्तीय अनुशासन बनाए रखना जरूरी है और प्रत्येक भुगतान निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए जारी बजट का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो, ताकि सरकारी धन का सही तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सके। वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखने के साथ-साथ संबंधित अभिलेखों को भी व्यवस्थित रखने पर जोर दिया गया। महालेखाकार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी योजना से संबंधित भुगतान प्रक्रिया में निर्धारित वित्तीय नियमों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों को लेखांकन व्यवस्था को मजबूत रखने तथा वित्तीय दस्तावेजों के समय पर मिलान की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।

महालेखाकार मोहम्मद परवेज़ आलम ने हरिद्वार कोषागार के वित्तीय अभिलेखों और प्रक्रियाओं की समीक्षा की।

हरिद्वार में हुई इस समीक्षा बैठक और कोषागार निरीक्षण के दौरान मुख्य रूप से वित्तीय अनुशासन, बजट के उचित उपयोग, भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता, लेखा मिलान और रिकॉर्ड के व्यवस्थित रख-रखाव पर जोर दिया गया। महालेखाकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी धन के उपयोग में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाए। वहीं जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशों के अनुपालन को प्राथमिकता देने की बात कही। वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के उद्देश्य से इस तरह की समीक्षा प्रक्रिया सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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By ATHAR

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