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हरिद्वार, 06 अगस्त 2025
जहाँ एक ओर देशभर में आपदाएं अचानक और बिना चेतावनी के कहर बरपाती हैं, वहीं हरिद्वार पुलिस पहले से ही तैयार रहने की कसम खा चुकी है। इसी दिशा में एक खतरनाक़ और रोमांचकारी पहल के तहत फायर स्टेशन रुड़की में एक विशेष आपदा उपकरण परीक्षण और संचालन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस आयोजन ने यह साफ कर दिया कि आपातकालीन हालातों में सिर्फ उपकरण होना काफी नहीं, बल्कि उनका सही समय पर संचालन और त्वरित निर्णय लेना भी एक कला है – जिसे अब हरिद्वार पुलिस बखूबी सीख चुकी है।
SSP के निर्देश पर खौफनाक तैयारी का आगाज़
यह आयोजन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) हरिद्वार के आदेशानुसार प्रभारी अग्निशमन अधिकारी रुड़की के नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत कर्मियों की फॉलिन परेड से हुई – एक चेतावनी की तरह कि “अब आपातकालीन मोड में हैं”।
हाई-टेक उपकरणों की हैरतअंगेज़ टेस्टिंग
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था – आपदा प्रबंधन के लिए अत्याधुनिक उपकरणों की लाइव टेस्टिंग। कुछ प्रमुख उपकरण जिनका परीक्षण किया गया:
- लाइटिंग टॉवर्स: रात के अंधेरे में रेस्क्यू को रोशन करने वाले ताकतवर टावर
- वुडन कटर: मलबे में फंसे लोगों को निकालने का नुकीला हथियार
- आयरन कटर: लोहे की मोटी रॉड और रुकावटों को चीरने वाला औजार
- RCC कटर: सीमेंट की दीवारें हो या इमारतें – इन्हें फाड़कर रास्ता बनाए
- अनाउंसमेंट माइक: भीड़ नियंत्रण और दिशा-निर्देश देने के लिए अहम माध्यम
इन सभी उपकरणों को न केवल स्टार्ट किया गया, बल्कि कर्मियों द्वारा खुद ऑपरेट कर इनकी वास्तविक परिस्थिति में उपयोगिता का भी मूल्यांकन किया गया।
आपदा में देरी नहीं – हर सेकेंड की गिनती चल रही है
प्रशिक्षण में केवल टेस्टिंग नहीं हुई, बल्कि हर कर्मी को प्रशिक्षित किया गया कि किस परिस्थिति में कौन-सा उपकरण कैसे और कितनी तेजी से इस्तेमाल किया जाए।
यह कोई दिखावटी मॉकड्रिल नहीं थी – बल्कि ऐसा लग रहा था मानो हर मिनट कोई सच्ची आपदा दस्तक देने वाली है।
सुरक्षित संचालन, रख-रखाव और रियल टाइम निर्णय लेने की ट्रेनिंग
अधिकारीगण ने कर्मचारियों को हर उपकरण की संचालन विधि, सेफ्टी प्रोटोकॉल, और रख-रखाव के तरीके सिखाए।
कर्मियों को यह भी बताया गया कि गलत ऑपरेशन कैसे जान को खतरे में डाल सकता है। प्रशिक्षण के दौरान कई सीनARIOS बनाए गए जिससे अधिकारी मौके पर निर्णय लेने की क्षमता को भी परख सकें।
आपात स्थिति में सब कुछ तैयार मिलना चाहिए – SSP का सख्त संदेश
SSP हरिद्वार ने स्पष्ट किया कि,
“आपात स्थिति में हम सोचने का समय नहीं ले सकते। उपकरण, ट्रेन्ड स्टाफ और रणनीति – सब पहले से दिमाग में और ग्राउंड पर तैयार होनी चाहिए।“
प्रशिक्षण के बाद की प्रक्रिया – सटीकता और अनुशासन का परिचय
सभी उपकरणों की जांच और ऑपरेशन के बाद उन्हें एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत साफ-सुथरा कर फायर स्टेशन के स्टोर में सुरक्षित रखा गया। यह सुनिश्चित किया गया कि अगले अलार्म की घंटी बजते ही ये उपकरण उसी क्षण उपयोग के लिए निकाले जा सकें।
हरिद्वार फायर डिपार्टमेंट द्वारा किया गया यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक रूटीन प्रक्रिया से कहीं अधिक था – यह एक भविष्य की तैयारी, आपदा में नियंत्रण और आम जन के लिए भरोसे की एक मजबूत दीवार थी।जहां अधिकतर विभाग ऐसे कार्यक्रमों को सिर्फ औपचारिकता मानते हैं, वहां हरिद्वार पुलिस ने इसे एक जमीनी सच्चाई और जीवन रक्षक अभियान बना दिया।क्योंकि आपदा कभी बता कर नहीं आती – लेकिन हरिद्वार फायर पुलिस, हर वक्त तैयार है।
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