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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
हरिद्वार के ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा और प्रेरणा का अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब जिलाधिकारी मयूर दीक्षित स्वयं छात्रों के बीच पहुंचे और एक शिक्षक की भूमिका निभाते हुए उनका मार्गदर्शन किया। यह अवसर था धनौरी स्थित हरिओम सरस्वती पीजी कॉलेज में आयोजित एक विशेष कार्यशाला का, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
महाविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ, राजनीति विज्ञान विभाग एवं सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को प्रशासनिक सेवाओं के प्रति प्रेरित करना और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन देना था।

कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने छात्रों से सीधे संवाद स्थापित किया और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए छात्रों को जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने और उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए सबसे पहले स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी है। उन्होंने कहा, “यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उस दिशा में ईमानदारी से प्रयास किया जाए, तो सफलता अवश्य मिलती है।”
उन्होंने छात्रों को यह भी बताया कि केवल अधिक पढ़ाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पढ़ाई में एकाग्रता और सही दिशा में प्रयास करना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि सही रणनीति अपनाई जाए, तो बड़े लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
आज के डिजिटल युग में युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती मोबाइल का अत्यधिक उपयोग है। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि अधिकांश युवा अपना कीमती समय मोबाइल स्क्रीन पर व्यर्थ कर रहे हैं, जो उनके भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे सोशल मीडिया और मोबाइल का सीमित उपयोग करें और अपने समय का सदुपयोग पढ़ाई एवं कौशल विकास में करें।

जिलाधिकारी ने युवाओं को नशे और गलत संगति से दूर रहने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए सकारात्मक सोच और अच्छे लोगों का साथ बहुत जरूरी है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखनी चाहिए, जो समय की बर्बादी करते हैं या उन्हें गलत दिशा में ले जाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने जिलाधिकारी से विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे। एक छात्रा ने आंखों की कम रोशनी के कारण प्रशासनिक सेवाओं में आने में आने वाली कठिनाइयों के बारे में पूछा। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी प्रकार की शारीरिक कमी सफलता में बाधा नहीं बनती, यदि व्यक्ति में दृढ़ संकल्प और मेहनत करने की इच्छा हो।
वहीं, एक छात्र द्वारा एमबीए के बाद प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाने के सवाल पर उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं भी एमबीए किया है और सही मार्गदर्शन व तैयारी के साथ इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम से पूर्व महाविद्यालय पहुंचने पर जिलाधिकारी का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान प्रबंध समिति के सदस्य डॉ. आदित्य सैनी, प्राचार्य डॉ. मुनेंद्र सिंह, शिक्षकगण एवं अन्य कर्मचारियों ने उनका अभिनंदन किया। जिलाधिकारी ने महाविद्यालय के संस्थापक डॉ. तेजवीर सिंह सैनी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. हर्ष सैनी ने की, जबकि संचालन डॉ. योगेश कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे और सभी ने इस अवसर को प्रेरणादायक बताया। यह कार्यक्रम केवल एक कार्यशाला नहीं था, बल्कि शिक्षा और प्रेरणा का संगम था। जिलाधिकारी के सीधे संवाद और मार्गदर्शन से छात्रों को न केवल नई दिशा मिली, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा।
हरिद्वार के ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण है कि यदि प्रशासन और शिक्षण संस्थान मिलकर काम करें, तो युवाओं को सही दिशा दी जा सकती है। इस प्रकार की पहलें न केवल छात्रों के भविष्य को उज्जवल बनाती हैं, बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
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