रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
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हरिद्वार। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देशभर में चल रही राजनीतिक बहस के बीच हरिद्वार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला अध्यक्ष बालेश्वर सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है।
कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और SIR की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए। ज्ञापन के माध्यम से पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम प्रभावित किए जा रहे हैं और इससे एक राजनीतिक दल को लाभ पहुंचने की आशंका है। कांग्रेस ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई। कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान है और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता को लेकर जनता का विश्वास बनाए रखना जरूरी है।
जिलाध्यक्ष बालेश्वर सिंह के नेतृत्व में सौंपा ज्ञापन
कांग्रेस जिला अध्यक्ष बालेश्वर सिंह के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई। कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों में मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और इससे किसी विशेष राजनीतिक दल को लाभ पहुंचने की बात कही गई। पार्टी नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार का संशोधन निर्धारित प्रक्रिया, पारदर्शिता और संबंधित मतदाताओं को उचित अवसर देने के साथ होना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन में निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से विचार किए जाने की मांग की।
राव फरमान अली बोले- निर्वाचन आयोग पर विश्वास बनाए रखना जरूरी
कार्यक्रम में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव राव फरमान अली एडवोकेट ने कहा कि भारत का निर्वाचन आयोग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान है। उनके अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना निर्वाचन आयोग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। राव फरमान अली ने SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखित शिकायत किए जाने की खबरों ने प्रक्रिया को लेकर चर्चा को बढ़ाया है। उन्होंने दावा किया कि इससे SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से किसी भी व्यक्ति का नाम प्रभावित होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को उचित जानकारी और अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। कांग्रेस नेता ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक और संगठनात्मक दावे हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से SIR से जुड़े निर्णयों को सभी तीन निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी से लिए जाने की बात सार्वजनिक रूप से कही गई है।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राव आफाक अली ने भी SIR की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की आपत्तियां सामने रखीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है और कांग्रेस की ओर से इसकी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। राव आफाक अली ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर बिना उचित कारण आपत्तियां लगाई जा रही हैं और लोगों को नोटिस दिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में संबंधित लोगों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े किसी भी मामले में प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता का नाम सूची में होना उसके मतदान के अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए किसी भी प्रकार के संशोधन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई
कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने आरोपों को दोहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। पार्टी नेताओं ने कहा कि SIR और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए। कांग्रेस की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची से वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इससे एक राजनीतिक दल को लाभ मिलने की स्थिति बन सकती है। इन आरोपों को कांग्रेस ने ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति के समक्ष रखा। हालांकि, ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी तय करना अलग विषय है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया निर्वाचन कानूनों और संबंधित अधिकारियों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है।
SIR को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक स्तर पर भी बहस तेज हुई है। विभिन्न विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। कांग्रेस ने भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
वहीं निर्वाचन आयोग की ओर से SIR को लेकर कहा गया है कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर SIR-2026 से संबंधित मतदाता सेवाएं और नाम खोजने की सुविधा भी उपलब्ध है। इस वजह से SIR की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों की आपत्तियों और निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण के बीच मतदाता सूची का मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।
ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम में ज्वालापुर विधायक रवि बहादुर, डॉ. संजय पालीवाल, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सतीश दुबे, राकेश राजपूत, उत्तराखंड कांग्रेस के महामंत्री आलोक शर्मा, मनोज धनगर, धनगर समाज के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता तनवीर कुरैशी, राव सोहेल, विमला पांडेय, पूनम भगत, दिलशाद खान समेत कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस की ओर से बताया गया कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंता जाहिर की।
कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम भेजे गए ज्ञापन में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग रखी। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि SIR के दौरान सामने आने वाली शिकायतों और आपत्तियों की निष्पक्ष तरीके से जांच हो। साथ ही जिन मतदाताओं के नाम पर आपत्ति या हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है, उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को भी ज्ञापन में प्रमुखता से रखा।
SIR को लेकर कांग्रेस की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े विषय को लेकर वे आगे भी अपनी आवाज उठाते रहेंगे। वहीं निर्वाचन आयोग की ओर से SIR की प्रक्रिया को लेकर अपने आधिकारिक प्रावधान और सेवाएं जारी रखी गई हैं। हरिद्वार में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने के साथ कांग्रेस ने स्थानीय स्तर पर भी SIR से जुड़े मुद्दे को उठाया है। अब इस ज्ञापन पर आगे क्या कार्रवाई होती है, यह संबंधित संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
हरिद्वार में कांग्रेस ने SIR को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता, आपत्तियों की सुनवाई और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग SIR को पात्र मतदाताओं को शामिल करने और अपात्र नामों को हटाने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता है। ऐसे में इस पूरे विवाद में कांग्रेस के आरोपों और निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पक्ष को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।
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