देहरादून में बारिश के बाद धंसी सड़क का निरीक्षण करते अधिकारी और सुरक्षा बैरिकेडदेहरादून में बारिश के बाद धंसी सड़क का निरीक्षण करते अधिकारी और सुरक्षा बैरिकेड

देहरादून | संवाददाता

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पहली ही तेज बारिश के बाद करोड़ों रुपये की लागत से बनी एक सड़क (या पुल का हिस्सा) धंस जाने की घटना ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद संबंधित मार्ग पर आवाजाही एहतियातन रोक दी गई है और प्रशासन ने क्षतिग्रस्त हिस्से का निरीक्षण शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में सड़क का बड़ा हिस्सा धंसा हुआ दिखाई दे रहा है, जिसके नीचे गहरा गड्ढा बन गया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। नागरिकों का कहना है कि जिस सड़क पर हाल ही में करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, वह पहली ही बारिश का दबाव नहीं झेल सकी। वहीं प्रशासन का कहना है कि तकनीकी टीम मौके का निरीक्षण कर रही है और आवश्यक मरम्मत एवं सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।

राजधानी देहरादून में पहली ही तेज बारिश के बाद एक सड़क/पुल का हिस्सा अचानक धंस जाने से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में देखा जा सकता है कि सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया है, जिससे नीचे गहरा गड्ढा बन गया है। घटना के बाद लोगों में दहशत का माहौल है और प्रशासन ने एहतियातन मार्ग पर आवाजाही रोक दी है।

पहली ही बारिश ने खोल दी निर्माण कार्यों की पोल

देहरादून में मानसून की पहली तेज बारिश के बाद सड़क धंसने की घटना ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतनी जल्दी सड़क क्षतिग्रस्त नहीं होती। हालांकि, सड़क धंसने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नुकसान का कारण भारी वर्षा, मिट्टी का कटाव, जल निकासी की समस्या या निर्माण संबंधी कोई तकनीकी कमी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस सड़क पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, वह पहली ही बारिश का सामना नहीं कर सकी। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया, जिसके चलते सड़क इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त हो गई।

देहरादून में बारिश के बाद धंसी सड़क का निरीक्षण करते अधिकारी और सुरक्षा बैरिकेड

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। सुरक्षा की दृष्टि से क्षतिग्रस्त हिस्से के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई और लोगों की आवाजाही रोक दी गई। प्रशासन का उद्देश्य किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकना है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और बैरिकेडिंग हटाकर आगे जाने का प्रयास न करें। क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण पर भारी सरकारी धन खर्च किया गया था, लेकिन पहली ही बारिश में सड़क का धंस जाना चिंता का विषय है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार—निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।

घटना के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच की गई होती तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था। वहीं, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

संबंधित विभाग की तकनीकी टीम मौके का निरीक्षण कर रही है। निरीक्षण के दौरान सड़क की स्थिति, मिट्टी की मजबूती, जल निकासी व्यवस्था और निर्माण तकनीक से जुड़े विभिन्न पहलुओं का परीक्षण किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही क्षति के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल संबंधित विभाग द्वारा क्षतिग्रस्त हिस्से का निरीक्षण किया जा रहा है और सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इस घटना ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान यदि जल निकासी की उचित व्यवस्था न हो तो सड़कों के नीचे मिट्टी का कटाव बढ़ सकता है, जिससे सड़क धंसने जैसी घटनाएं सामने आ सकती हैं। कारण निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, ड्रेनेज सिस्टम और नियमित निरीक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। साथ ही क्षतिग्रस्त क्षेत्र से दूरी बनाए रखें तथा सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

देहरादून में पहली ही तेज बारिश के बाद सड़क धंसने की घटना ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करते हुए मार्ग को बंद कर दिया है और तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सड़क धंसने का वास्तविक कारण क्या था और आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।

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By ATHAR

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