देहरादून भाजपा में मंडल अध्यक्षों को लेकर विवाद और वासुदेव जखमोला के इस्तीफे पर उठे सवालदेहरादून भाजपा में मंडल अध्यक्षों को लेकर विवाद सामने आया है। वासुदेव जखमोला का दावा है कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया, जबकि आशीष गिरी के इस्तीफे की चर्चा है।

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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

देहरादून। भारतीय जनता पार्टी के देहरादून महानगर संगठन में मंडल अध्यक्षों को लेकर विवाद सामने आया है। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के श्यामा प्रसाद मुखर्जी मंडल अध्यक्ष वासुदेव जखमोला का कहना है कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया, इसके बावजूद उनके एक व्हाट्सएप संदेश को इस्तीफा मानते हुए किसी अन्य व्यक्ति को मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी गई। वहीं, धर्मपुर विधानसभा के ही दीनदयाल उपाध्याय मंडल अध्यक्ष आशीष गिरी के इस्तीफा देने की बात सामने आई है। दोनों घटनाओं के बाद भाजपा के स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। मामला संगठन में मंडल प्रभारियों की भूमिका और मंडल अध्यक्षों के साथ समन्वय से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, पूरे प्रकरण पर संगठन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

वासुदेव जखमोला के अनुसार, विवाद की शुरुआत मंडल प्रभारी की तैनाती के बाद हुई। उनका कहना है कि उन्होंने धर्मपुर विधायक विनोद चमोली और देहरादून महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल को व्हाट्सएप के माध्यम से एक संदेश भेजा था। जखमोला के मुताबिक, संदेश का उद्देश्य सीधे तौर पर इस्तीफा देना नहीं था। उन्होंने नए मंडल प्रभारी के साथ काम करने को लेकर अपनी असहजता व्यक्त की थी। उनका कहना था कि संबंधित प्रभारी के साथ पूर्व में भी दो-तीन बार उनके अनुभव अच्छे नहीं रहे थे। इसी वजह से उन्होंने संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए विकल्प सुझाया था।

उनके अनुसार, संदेश में यह कहा गया था कि यदि संभव हो तो संबंधित प्रभारी को हटाया जाए या फिर उन्हें मंडल अध्यक्ष के पद से मुक्त किया जाए। जखमोला का दावा है कि उन्होंने इसे औपचारिक इस्तीफे के रूप में प्रस्तुत नहीं किया था। विवाद का मुख्य बिंदु यही है कि जखमोला के अनुसार उनके व्हाट्सएप संदेश को इस्तीफा मान लिया गया और इसके बाद मंडल अध्यक्ष पद पर किसी अन्य व्यक्ति की घोषणा कर दी गई।

जखमोला का कहना है कि यदि उनके संदेश का आशय पद से तत्काल इस्तीफा देना होता तो वह औपचारिक रूप से इस्तीफा देते। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना औपचारिक इस्तीफे के किसी अन्य व्यक्ति को मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी कैसे दी गई। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद संगठनात्मक प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा जैसे बड़े राजनीतिक संगठन में मंडल अध्यक्षों की भूमिका स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जाती है। मंडल अध्यक्ष संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पद को लेकर उत्पन्न विवाद का असर स्थानीय संगठनात्मक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

आशीष गिरी के इस्तीफे से भी बढ़ी चर्चा

इसी बीच धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के दीनदयाल उपाध्याय मंडल अध्यक्ष आशीष गिरी के इस्तीफा देने की बात भी सामने आई है। एक ही विधानसभा क्षेत्र से जुड़े दो मंडलों के अध्यक्षों को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने राजनीतिक चर्चाओं को और बढ़ा दिया है। आशीष गिरी के इस्तीफे की परिस्थितियों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर अलग-अलग चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनके इस्तीफे की विस्तृत वजह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी एक कारण को इस्तीफे की वजह बताना उचित नहीं होगा। फिलहाल दोनों घटनाओं को लेकर भाजपा के स्थानीय संगठन और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा बनी हुई है।

जखमोला के अनुसार, उन्होंने अपनी स्थिति से धर्मपुर विधायक विनोद चमोली और देहरादून महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल को अवगत कराया था। उनका कहना है कि उन्होंने संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के सामने अपनी परेशानी रखते हुए समाधान के लिए विकल्प भी सुझाया था। यानी उनका दावा यह है कि संदेश का उद्देश्य संगठन के भीतर समस्या का समाधान तलाशना था, न कि तत्काल प्रभाव से पद छोड़ना। इसके बावजूद संदेश को इस्तीफे के रूप में लिया जाना ही उनके लिए विवाद का मुख्य कारण बना।

भाजपा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी मंडल अध्यक्ष ने व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर काम करने में असमर्थता जताई थी। उनका इस्तीफा स्वीकार कर नया अध्यक्ष मनोनीत कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि विधायक और मंडल अध्यक्ष के बीच क्या चल रहा है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। दूसरे मडत अध्यक्ष ने निजी कारण बताए थे। उनका इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया गया है। उधर विधायक विनोद चमोली से देर रात तक प्रयास के बावजूद संपर्क नहीं हो सका।

अब पूरे मामले में संगठन की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने का इंतजार है। यदि जखमोला का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं हुआ था, तो उनके पद को लेकर संगठनात्मक स्थिति क्या होगी, यह महत्वपूर्ण सवाल है। वहीं आशीष गिरी के इस्तीफे को लेकर भी संगठन की ओर से आगे क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में वासुदेव जखमोला की ओर से यह स्पष्ट कहा गया है कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया था। उनका कहना है कि उन्होंने केवल मंडल प्रभारी के साथ काम करने में अपनी असहजता से वरिष्ठ पदाधिकारियों को अवगत कराया था। इसी संदेश को इस्तीफा मानकर नया मंडल अध्यक्ष घोषित किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाया है। ऐसे में इस पूरे मामले को लेकर अंतिम स्थिति भाजपा संगठन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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By ATHAR

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