लक्सर के विद्यालय में सुरक्षित बचपन कार्यशाला के दौरान बच्चों को बाल अधिकार और साइबर सुरक्षा की जानकारी देते पुलिस एवं न्यायिक अधिकारीलक्सर के विद्यालय में सुरक्षित बचपन कार्यशाला के दौरान बच्चों को बाल अधिकार और साइबर सुरक्षा की जानकारी देते पुलिस एवं न्यायिक अधिकारी

रिपोर्टर (फरमान खान)

सबसे सटीक ज्वालापुर टाइम्स न्यूज़…

हरिद्वार 2026। बच्चों को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने तथा उन्हें अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से लक्सर क्षेत्र के तीन विद्यालयों में ‘सुरक्षित बचपन’ विषय पर जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की गईं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आयोजित इन कार्यक्रमों में पुलिस और न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों, साइबर अपराधों से बचाव और यातायात नियमों की जानकारी दी।

बुधवार, 28 अक्टूबर को एक्स-सोल्जर्स इंटर कॉलेज, सुभाषगढ़; ग्राम राज्यकीय इंटर कॉलेज, भिक्कमपुर लक्सर तथा हर्ष विद्या मंदिर, रायसी में कार्यशालाएं आयोजित की गईं। कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को संभावित जोखिमों के प्रति जागरूक करना और किसी असहज या असुरक्षित परिस्थिति में उचित सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना रहा। कार्यशालाओं में बच्चों को बताया गया कि उनकी सुरक्षा, सम्मान और अधिकार महत्वपूर्ण हैं। साथ ही उन्हें यह जानकारी दी गई कि किसी समस्या या खतरे की स्थिति में विश्वसनीय वयस्क, विद्यालय प्रशासन, पुलिस अथवा संबंधित सहायता सेवाओं से संपर्क करना चाहिए।

तीन विद्यालयों में आयोजित हुईं जागरूकता कार्यशालाएं

लक्सर कोतवाली क्षेत्र के अलग-अलग विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों को उनकी उम्र के अनुरूप सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई। पुलिस और न्यायिक अधिकारियों ने बच्चों को समझाया कि जागरूकता और समय पर सहायता मांगना कई मुश्किल परिस्थितियों से बचने में मदद कर सकता है।

कार्यशालाओं में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता, बच्चों के साथ होने वाले मानसिक और शारीरिक शोषण से सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और यातायात नियमों को प्रमुखता दी गई। विद्यार्थियों को रोजमर्रा के जीवन में सामने आने वाली परिस्थितियों को पहचानने और सुरक्षित व्यवहार अपनाने के बारे में भी जानकारी दी गई। कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल कानूनों की जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों में अपनी सुरक्षा को लेकर विश्वास बढ़ाना और उन्हें यह समझाना भी था कि किसी परेशानी को छिपाने के बजाय सही व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है।

कार्यशालाओं में मुख्य अतिथि के रूप में एडीजे लक्सर सुधीर कुमार, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ललिता सिंह, सिविल जज (जूनियर डिविजन) लक्सर पल्लवी गुप्ता और न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्सर लवल कुमार वर्मा उपस्थित रहे।

लक्सर के तीन विद्यालयों में ‘सुरक्षित बचपन’ जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की गईं। पुलिस और न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बाल अधिकार, पॉक्सो एक्ट, गुड टच-बैड टच, साइबर सुरक्षा और यातायात नियमों की जानकारी दी।

न्यायिक अधिकारियों की मौजूदगी में विद्यार्थियों को बच्चों की सुरक्षा और कानूनी अधिकारों से संबंधित विषयों की जानकारी दी गई। ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों और कानून से जुड़ी संस्थाओं के बीच संवाद को बढ़ावा देना तथा विद्यार्थियों को यह समझाना है कि जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता और संबंधित अधिकारियों से मदद ली जा सकती है। बाल अधिकारों की जानकारी बच्चों के साथ-साथ विद्यालयों और अभिभावकों के लिए भी उपयोगी होती है। इससे बच्चों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी समझने और किसी संभावित समस्या पर समय रहते ध्यान देने में मदद मिल सकती है।

कार्यशालाओं का एक प्रमुख विषय पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) रहा। यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने के लिए बनाया गया है। कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को इस कानून की बुनियादी जानकारी दी गई और बताया गया कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेना जरूरी है।

बच्चों को समझाया गया कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें असहज महसूस कराए, अनुचित व्यवहार करे या उनकी सुरक्षा को लेकर परेशानी पैदा करे, तो उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर महसूस नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में किसी भरोसेमंद अभिभावक, शिक्षक या संबंधित अधिकारी को जानकारी देना महत्वपूर्ण है। पॉक्सो अधिनियम के तहत बच्चों से जुड़े मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। ऐसे विषयों पर जागरूकता बच्चों को अपने अधिकार समझने और जरूरत पड़ने पर सहायता मांगने में मदद कर सकती है।

कार्यशालाओं के दौरान विद्यार्थियों को ‘गुड टच और बैड टच’ के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चों को समझाया गया कि उन्हें अपने शरीर की सुरक्षा और व्यक्तिगत सीमाओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्हें बताया गया कि यदि किसी का व्यवहार असहज लगे या कोई व्यक्ति अनुचित तरीके से छूने की कोशिश करे, तो वे वहां से हटने, स्पष्ट रूप से मना करने और किसी भरोसेमंद वयस्क को बताने का प्रयास कर सकते हैं। बच्चों को यह भी समझना जरूरी है कि ऐसी किसी घटना के लिए वे स्वयं जिम्मेदार नहीं होते और उन्हें मदद मांगने का पूरा अधिकार है। अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका भी ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण होती है। बच्चों की बात ध्यान से सुनना, उन्हें भरोसा देना और जरूरत पड़ने पर संबंधित सहायता उपलब्ध कराना उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

कार्यशालाओं में विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति भी जागरूक किया गया। डिजिटल माध्यमों और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग को देखते हुए बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा के बुनियादी नियमों की जानकारी देना महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को समझाया गया कि इंटरनेट पर अनजान लोगों से बातचीत करते समय सावधानी बरतें और अपनी निजी जानकारी, पासवर्ड, ओटीपी या अन्य संवेदनशील विवरण किसी के साथ साझा न करें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध संदेशों का जवाब देने या ऑनलाइन किसी व्यक्ति पर बिना जांच के भरोसा करने से बचना चाहिए। यदि किसी बच्चे को ऑनलाइन धमकी, परेशान करने वाले संदेश या संदिग्ध गतिविधि का सामना करना पड़े, तो उसे स्क्रीनशॉट जैसे उपलब्ध साक्ष्य सुरक्षित रखते हुए अभिभावक, शिक्षक या पुलिस से सहायता लेनी चाहिए। साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन करना डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रमों में कोतवाली लक्सर की ओर से उपनिरीक्षक ब्रह्मदत्त बिजल्वाण, उपनिरीक्षक यशवीर सिंह नेगी, उपनिरीक्षक बीरेन्द्र सिंह नेगी, महिला उपनिरीक्षक प्रियंका नेगी और अपर उपनिरीक्षक रंजीत नौटियाल अलग-अलग विद्यालयों में मौजूद रहे। पुलिसकर्मियों ने कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों तक सुरक्षा संबंधी जानकारी पहुंचाने में भागीदारी की। पुलिस और न्यायिक अधिकारियों की सहभागिता से बच्चों को बाल सुरक्षा, कानूनी अधिकारों और जिम्मेदार व्यवहार के विषयों को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के अनुरूप आयोजित किए गए। इसका प्रमुख उद्देश्य बच्चों के लिए सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण बनाने की दिशा में जागरूकता बढ़ाना रहा।

सुरक्षित बचपन’ कार्यशालाओं के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि उनकी सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि हैं। बाल अधिकारों, पॉक्सो अधिनियम, व्यक्तिगत सुरक्षा, साइबर जागरूकता और यातायात नियमों की जानकारी उन्हें संभावित खतरों को पहचानने और उचित सहायता लेने में मदद कर सकती है।

बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पुलिस और न्यायिक संस्थाओं के साथ-साथ अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। बच्चों के साथ भरोसेमंद संवाद, उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता उपलब्ध कराना सुरक्षित वातावरण बनाने के आवश्यक पहलू हैं। लक्सर क्षेत्र के तीन विद्यालयों में आयोजित इन कार्यशालाओं के जरिए विद्यार्थियों को अपने अधिकारों और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में सुरक्षा के प्रति समझ बढ़ाने और उन्हें जरूरत के समय सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है।

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By ATHAR

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