रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामीरामपुर तिराहा शहीद स्थल पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

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हरिद्वार 2026। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों की स्मृति को संरक्षित करने और उनके योगदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुजफ्फरनगर स्थित रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कई घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर राज्य आंदोलन के शहीदों को नमन किया। उन्होंने घोषणा की कि जिन राज्य आंदोलनकारियों की प्रतिमाएं अब तक स्थापित नहीं हुई हैं, उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांव या निवास क्षेत्र में उपयुक्त स्थान पर लगाई जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा स्थित राज्य अतिथि गृह के उच्चीकरण, स्मारक परिसर में पुस्तकालय को ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने और संग्रहालय के विस्तार की भी घोषणा की। संग्रहालय में उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों, वेशभूषा और लोक संस्कृति से जुड़ी सामग्री को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य आंदोलनकारियों के पुनः चिन्हीकरण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की बात भी कही गई।

रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

शुक्रवार को रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुए आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण आंदोलनकारियों के लंबे संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। राज्य सरकार आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप प्रदेश के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें लगातार छठे वर्ष रामपुर तिराहा, खटीमा और अन्य शहीद स्थलों पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित करने का अवसर मिला है। उन्होंने राज्य आंदोलन के बलिदानियों की स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देश की रक्षा में सर्वाेच्च बलिदान देने वाले उत्तराखण्ड के वीर सैनिकों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित करने का निर्णय पहले ही लिया है। इसी भावना के अनुरूप राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों की स्मृतियों को भी भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा कांड के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों और बलिदानियों के सपनों के अनुरूप राज्य के निर्माण के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों और बलिदानियों के आशीर्वाद से उन्हें लगातार छठे वर्ष रामपुर तिराहा सहित खटीमा एवं अन्य शहीद स्थलों पर श्रद्धासुमन अर्पित करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

राज्य अतिथि गृह, ई-लाइब्रेरी और संग्रहालय का होगा विकास

रामपुर तिराहा स्थित राज्य अतिथि गृह के उच्चीकरण की घोषणा भी कार्यक्रम के प्रमुख बिंदुओं में शामिल रही। इसके अलावा स्मारक परिसर में स्थित पुस्तकालय को आधुनिक सुविधाओं से युक्त ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे पाठकों और शोधार्थियों को डिजिटल माध्यम से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सकेगा। संग्रहालय के विस्तार की योजना के तहत उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य यंत्रों और लोक संस्कृति से संबंधित सामग्री को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे राज्य की सांस्कृतिक विरासत और राज्य आंदोलन के इतिहास को एक ही परिसर में समझने का अवसर मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 01 एवं 02 अक्टूबर 1994 की रात रामपुर तिराहा में शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जा रहे राज्य आंदोलनकारियों के साथ हुई घटना उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है। पृथक उत्तराखण्ड राज्य के लिए आंदोलनकारियों ने लंबा संघर्ष किया। खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा और श्रीनगर के श्री यंत्र टापू सहित विभिन्न स्थानों पर आंदोलनकारियों ने अपना बलिदान दिया। उनके संघर्ष और बलिदान के परिणामस्वरूप ही उत्तराखण्ड पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

रामपुर तिराहा के शहीदों को सम्मान गांवों में लगेंगी प्रतिमाएं

1 और 2 अक्टूबर 1994 की घटना को बताया पीड़ादायक अध्याय

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 और 2 अक्टूबर 1994 की रात रामपुर तिराहा में दिल्ली जा रहे राज्य आंदोलनकारियों के साथ हुई घटना उत्तराखंड के इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है। उन्होंने कहा कि पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने लंबे समय तक संघर्ष किया और विभिन्न स्थानों पर अपने प्राणों की आहुति दी। खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा और श्रीनगर के श्री यंत्र टापू सहित कई स्थान राज्य आंदोलन के संघर्ष और बलिदान के साक्षी रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंदोलनकारियों के संघर्ष के परिणामस्वरूप ही उत्तराखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। उन्होंने शहीदों के सपनों के अनुरूप प्रदेश के विकास की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के सम्मान तथा हितों के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को राजकीय सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। क्षैतिज आरक्षण के तहत लाभान्वित आश्रितों को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए गए हैं।

आश्रित प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए इन्हें तहसील स्तर पर जारी करने के आदेश दिए गए हैं। राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का गठन भी किया गया है। bमुख्यमंत्री के अनुसार राज्य पर्वों और जनपद एवं प्रदेश स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में आंदोलनकारियों को आमंत्रित कर सम्मानित किया जाता है। इसके साथ ही परिवहन निगम की बसों में उन्हें निःशुल्क यात्रा की सुविधा देने की व्यवस्था भी की गई है।

सड़कों और विद्यालयों के नाम शहीदों के नाम पर रखने की पहल

मुख्यमंत्री ने बताया कि शहीद राज्य आंदोलनकारियों के नाम पर प्रदेश की सड़कों और विद्यालयों का नाम रखने के संबंध में आदेश जारी किए जा चुके हैं। इससे स्थानीय स्तर पर शहीदों के योगदान को पहचान देने और उनकी स्मृतियों को जीवित रखने का प्रयास किया जा रहा है। रामपुर तिराहा के अलावा खटीमा, देहरादून और मसूरी स्थित शहीद स्थलों के पुनर्निर्माण और विस्तार की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इन स्थलों को बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित करने की योजना है, ताकि लोग वहां पहुंचकर राज्य आंदोलन के इतिहास और बलिदानियों के योगदान को जान सकें।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा कांड में शहीद हुए राज्य आंदोलनकारियों की प्रतिमाओं की स्थापना के कार्य का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रतिमा स्थापना के लिए 27 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई है।

रामपुर तिराहा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी

इस अवसर पर उन्होंने शहीद स्मारक के लिए भूमि दान करने वाले स्वर्गीय पंडित महावीर शर्मा के योगदान को भी याद किया और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। स्मारक परिसर का विकास और प्रतिमाओं की स्थापना राज्य आंदोलन के इतिहास को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदमों के रूप में सामने आए।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मंत्री कपिल देव अग्रवाल, विधान परिषद सदस्य वंदना वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, उत्तराखंड संस्कृति परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल, संस्कृति सचिव युगल किशोर पंत, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

रामपुर तिराहा में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शहीदों को याद करने के साथ उनके योगदान को संरक्षित करने से जुड़ी घोषणाएं भी की गईं। प्रतिमाओं की स्थापना, स्मारक परिसर के आधुनिकीकरण और आंदोलनकारियों के पुनः चिन्हीकरण जैसे विषयों पर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन योजनाओं की प्रगति स्पष्ट होगी।

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By ATHAR

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