रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
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हरिद्वार। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में स्वच्छता एवं नशामुक्ति को लेकर जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। ‘स्वच्छता ही सेवा, स्वच्छता ही संस्कार’ और ‘नशामुक्त भारत’ के संकल्प के साथ विश्वविद्यालय परिसर से आसपास के स्थानीय क्षेत्रों तक जागरूकता रैली निकाली गई। अभियान में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, एनसीसी और एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारियों तथा छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर स्वच्छ और स्वस्थ समाज का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने विश्वविद्यालय परिवार को स्वच्छ पर्यावरण और नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प दिलाकर किया। इस अवसर पर प्रति-कुलपति साध्वी देवप्रिया भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया।
अभियान के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर से आसपास के स्थानीय क्षेत्रों तक स्वच्छता एवं नशामुक्ति जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में एनसीसी एवं एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारियों तथा छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता की। विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं स्वयंसेवकों ने बैनर, पोस्टर एवं नारों के माध्यम से आमजन को स्वच्छता अपनाने, सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने तथा नशे से दूर रहने का संदेश दिया। रैली में ‘स्वच्छता ही सेवा’, ‘स्वच्छता ही संस्कार’ एवं ‘नशामुक्त भारत—स्वस्थ भारत’ जैसे संदेशों के माध्यम से जनजागरूकता का प्रसार किया गया।
स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील
कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि स्वच्छता अभियान आयोजित करने का उद्देश्य आमजन में साफ-सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल एक दिन का कार्य नहीं है, बल्कि इसे अपनी दिनचर्या और व्यवहार में शामिल करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्य के लिए प्रशासन पर निर्भर रहना उचित नहीं है। नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने में योगदान देना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाना और साफ-सफाई बनाए रखना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। आचार्य बालकृष्ण ने अभियान के माध्यम से लोगों को स्वच्छता के प्रति अपनी भूमिका समझने और नियमित रूप से इस दिशा में प्रयास करने का संदेश दिया।
पतंजलि विश्वविद्यालय की प्रति-कुलपति साध्वी देवप्रिया ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ देश से ही समृद्धशाली राष्ट्र की परिकल्पना साकार हो सकती है। उन्होंने कहा कि गंदगी से मुक्त वातावरण लोगों को कई तरह की बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है। उन्होंने स्वच्छता को केवल व्यक्तिगत आदत तक सीमित न रखते हुए सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, जब नागरिक अपने आसपास के वातावरण को साफ रखने के लिए आगे आएंगे, तभी स्वच्छ समाज के निर्माण की दिशा में व्यापक बदलाव संभव होगा।
रैली के कुलपति आचार्य बालकृष्ण जी के साथ पतंजलि विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों, पश्चात विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों, एनसीसी एवं एनएसएस कार्यक्रम अधिकारियों, छात्र-छात्राओं तथा स्वयंसेवकों ने स्वच्छता अभियान में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया तथा स्थानीय क्षेत्र में स्वच्छता कार्य में श्रमदान किया। इस दौरान कचरा एवं अपशिष्ट एकत्र कर साफ-सफाई की गई तथा स्थानीय नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। अभियान में प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विज्ञान, दर्शन, संस्कृत, पत्रकारिता एवं जनसंचार तथा आयुर्वेद सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
रैली के जरिए स्थानीय लोगों को किया जागरूक
अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर से आसपास के स्थानीय क्षेत्रों तक जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में एनसीसी और एनएसएस से जुड़े कार्यक्रम अधिकारियों के साथ विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।
विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने बैनर, पोस्टर तथा नारों के माध्यम से लोगों को स्वच्छता अपनाने, सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाने और नशे से दूर रहने का संदेश दिया। रैली के दौरान ‘स्वच्छता ही सेवा’, ‘स्वच्छता ही संस्कार’ और ‘नशामुक्त भारत—स्वस्थ भारत’ जैसे संदेशों के जरिए जनजागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया। इस गतिविधि के माध्यम से विश्वविद्यालय परिवार ने स्थानीय नागरिकों को स्वच्छता अभियान से जुड़ने और अपने क्षेत्र को साफ रखने में सहयोग करने के लिए प्रेरित किया।
जागरूकता रैली के बाद विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने स्थानीय क्षेत्र में स्वच्छता अभियान के तहत श्रमदान किया। इस दौरान कचरा और अपशिष्ट एकत्र कर सफाई की गई। साथ ही लोगों को आसपास सफाई बनाए रखने के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। अभियान में प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विज्ञान, दर्शन, संस्कृत, पत्रकारिता एवं जनसंचार तथा आयुर्वेद सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। सामूहिक श्रमदान के जरिए यह संदेश दिया गया कि स्वच्छता के लिए जागरूकता के साथ-साथ व्यक्तिगत भागीदारी भी जरूरी है। विश्वविद्यालय परिवार की इस सहभागिता का उद्देश्य स्वच्छता को व्यवहार में उतारना और स्थानीय स्तर पर लोगों को इसके लिए प्रेरित करना रहा।
स्वच्छता अभियान के साथ नशामुक्त भारत का संदेश भी प्रमुखता से दिया गया। विद्यार्थियों ने नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति आमजन को जागरूक किया और विशेष रूप से युवाओं से नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की। अभियान में बताया गया कि स्वच्छ वातावरण के साथ स्वस्थ और नशामुक्त जीवन भी सशक्त समाज के निर्माण के लिए जरूरी है। युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने का संदेश रैली तथा जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान महात्मा गांधी के स्वच्छता, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े आदर्शों को याद किया गया। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के सादगी, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के विचारों का स्मरण किया गया। विश्वविद्यालय के इस सामूहिक अभियान के माध्यम से स्वच्छता को जीवन का संस्कार, सेवा को सामाजिक दायित्व और नशामुक्ति को स्वस्थ समाज की आवश्यकता के रूप में अपनाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का समापन स्वच्छ, स्वस्थ और नशामुक्त समाज के निर्माण में निरंतर योगदान देने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
अभियान में प्रो. मयंक अग्रवाल, डीन-मानविकी; डॉ. सत्येंद्र मित्तल, निदेशक-दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम; डॉ. ऋत्विक बिसारिया, डीन-अकादमिक एवं शोध; डॉ. ए.के. सिंह, परीक्षा नियंत्रक; डॉ. श्रीकृष्ण चंडक, डीन-योग विज्ञान और डॉ. निर्विकार, उप-कुलसचिव सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। गांधी और शास्त्री जयंती पर आयोजित इस अभियान में रैली, श्रमदान और जागरूकता गतिविधियों के जरिए स्वच्छता तथा नशामुक्ति का संदेश स्थानीय लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। विश्वविद्यालय परिवार ने स्वच्छ और स्वस्थ समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी जारी रखने का संकल्प भी लिया।
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