हरिद्वार के बेलड़ा गांव में स्वच्छता व्यवस्था का अध्ययन करते भगवानपुर के ग्राम प्रधान और स्वयं सहायता समूह की महिलाएंहरिद्वार के बेलड़ा गांव में स्वच्छता व्यवस्था का अध्ययन करते भगवानपुर के ग्राम प्रधान और स्वयं सहायता समूह की महिलाएं

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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

रुड़की। हरिद्वार जनपद के विकास खंड रुड़की की ग्राम पंचायत बेलड़ा ने ग्रामीण स्वच्छता और सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है। 3 सितंबर 2026 को विकास खंड भगवानपुर के विभिन्न ग्राम प्रधानों का दल बेलड़ा पहुंचा और यहां संचालित दैनिक सफाई व्यवस्था का अध्ययन किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं से स्वच्छता व्यवस्था के संचालन, कचरा प्रबंधन और जनभागीदारी से जुड़े अनुभव साझा किए। जिला पंचायत राज अधिकारी मो. मुस्तफा खान ने बताया कि बेलड़ा में स्वच्छता व्यवस्था को नियमित गतिविधि से आगे बढ़ाकर सामुदायिक सहभागिता से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसी व्यवस्था को समझने के लिए भगवानपुर विकासखंड के ग्राम प्रधानों ने बेलड़ा का दौरा किया।

जिला पंचायत राज अधिकारी मो. मुस्तफा खान ने अवगत कराया कि हरिद्वार जनपद के विकास खंड रुड़की स्थित ग्राम पंचायत बेलड़ा ने 03 सितंबर 2026 को ग्रामीण स्वच्छता और सामुदायिक आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल पेश की, जब विकास खंड भगवानपुर के विभिन्न ग्राम प्रधान बेलड़ा की दैनिक सफाई व्यवस्था के सफल मॉडल का अध्ययन करने यहाँ पहुँचे।पंचायत भवन के प्रांगण में सुबह से ही सीखने और साझा करने का विशेष उत्साह था। भगवानपुर से आए ग्राम प्रधानों के इस दल का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि बेलड़ा ने किस तरह स्वच्छता को केवल एक नियमित सरकारी कार्य न रखकर एक जीवंत जन-आंदोलन का रूप दे दिया है। संवाद के केंद्र में थीं गाँव के स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी कर्मठ महिलाएँ, जिन्होंने अपने अनुशासन और लगन के बल पर पूरे गाँव के कायाकल्प की कमान संभाल रखी है।

समूह की दीदियों ने बेहद व्यवस्थित और व्यावहारिक ढंग से आगंतुक प्रधानों के समक्ष अपनी दैनिक कार्यप्रणाली का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैसे सूर्योदय के साथ ही गाँव के प्रत्येक वार्ड और गली के लिए कचरा संग्रहण का रूट चार्ट सक्रिय हो जाता है। घर-घर जाकर गीले और सूखे कचरे का प्राथमिक पृथक्करण, नालियों की निरंतर निकासी, और सार्वजनिक मार्गों पर नियमित झाड़ू लगाने की व्यवस्था को किस प्रकार रोस्टर के आधार पर संचालित किया जाता है, इसकी बिंदुवार जानकारी साझा की गई। महिलाओं ने बताया कि शुरुआती दौर में ग्रामीणों की आदतों को बदलना आसान नहीं था, लेकिन चौपाल बैठकों और निरंतर जन-जागरूकता के जरिए उन्होंने हर परिवार को इस अभियान का अभिन्न हिस्सा बना दिया।

हरिद्वार के बेलड़ा गांव में स्वच्छता व्यवस्था का अध्ययन करते भगवानपुर के ग्राम प्रधान और स्वयं सहायता समूह की महिलाएं

पंचायत भवन में हुआ अनुभवों का आदान-प्रदान

बेलड़ा के पंचायत भवन परिसर में भगवानपुर से आए ग्राम प्रधानों का स्वागत किया गया। अध्ययन दौरे का उद्देश्य गांव की दैनिक सफाई व्यवस्था को समझना और उसके प्रभावी संचालन के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी हासिल करना था। एकत्रित गीले कचरे से जैविक खाद तैयार करने और सूखे कचरे के सुरक्षित निस्तारण की तकनीकी बारीकियों को भी उन्होंने खुलकर समझाया। अध्ययन के दौरान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने घर-घर से कचरा एकत्र करने की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया गया है।

दैनिक सफाई व्यवस्था के तहत गांव की गलियों और वार्डों में कचरा संग्रहण की व्यवस्था बनाई गई है। इसके साथ ही नालियों की नियमित सफाई और सार्वजनिक मार्गों पर झाड़ू लगाने जैसे कार्य भी निर्धारित व्यवस्था के अनुसार किए जाते हैं। प्रतिनिधिमंडल को यह भी बताया गया कि गीले कचरे से जैविक खाद तैयार करने तथा सूखे कचरे के सुरक्षित निस्तारण की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ ग्रामीण स्तर पर संसाधनों के उपयोग की संभावनाओं को बढ़ावा मिलता है।

भगवानपुर से आए ग्राम प्रधानों ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने सफाई व्यवस्था के संचालन में महिलाओं के अनुशासन, मेहनत और प्रबंधन क्षमता को महत्वपूर्ण बताया। महिलाओं ने प्रतिनिधिमंडल को यह भी जानकारी दी कि सफाई कार्यों के लिए आवश्यक संसाधनों और उपकरणों के रखरखाव पर किस तरह ध्यान दिया जाता है। इसके अलावा ग्रामीणों से सहयोग प्राप्त करने और स्वच्छता व्यवस्था को लगातार बनाए रखने के अनुभव भी साझा किए गए। अध्ययन दौरे के दौरान ग्राम प्रधानों ने केवल जानकारी ही हासिल नहीं की, बल्कि बेलड़ा गांव की गलियों में जाकर मौके पर सफाई व्यवस्था का निरीक्षण भी किया।

यह अध्ययन दौरा केवल एक गांव की सफाई व्यवस्था को देखने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण स्तर पर स्वच्छता, सामुदायिक भागीदारी और महिला समूहों की भूमिका पर अनुभव साझा करने का अवसर भी बना। भगवानपुर के ग्राम प्रधानों ने बेलड़ा की व्यवस्था की सराहना करते हुए अपने-अपने गांवों में भी स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने और दैनिक सफाई व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम करने की बात कही। ग्राम पंचायत बेलड़ा की इस पहल से यह संकेत मिलता है कि स्थानीय समुदाय, ग्राम पंचायत और स्वयं सहायता समूह मिलकर ग्रामीण स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। खासतौर पर महिलाओं की भागीदारी से स्वच्छता अभियान को नियमित गतिविधियों के साथ-साथ सामुदायिक जिम्मेदारी से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

बेलड़ा में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने जिस तरह दैनिक सफाई व्यवस्था के संचालन और ग्रामीणों की भागीदारी से जुड़े अनुभव साझा किए, वह ग्रामीण क्षेत्रों में महिला समूहों की बढ़ती भूमिका को भी सामने लाता है। भगवानपुर के ग्राम प्रधानों ने बेलड़ा के अनुभवों को उपयोगी बताते हुए इसे अपने गांवों में अपनाने की संभावनाओं पर चर्चा की। ऐसे अध्ययन दौरों के माध्यम से एक ग्राम पंचायत में किए जा रहे प्रभावी प्रयासों की जानकारी अन्य पंचायतों तक पहुंचाई जा सकती है। कुल मिलाकर, बेलड़ा का यह अध्ययन दौरा ग्रामीण स्वच्छता, जनभागीदारी और स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को लेकर अनुभव साझा करने का अवसर बना। स्थानीय स्तर पर तैयार इस व्यवस्था को दूसरे गांवों में उनकी जरूरत और परिस्थितियों के अनुसार अपनाने की संभावनाएं भी सामने आईं।

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By ATHAR

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