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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)
हरिद्वार 2026। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन और माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन को लेकर हरिद्वार जिला प्रशासन ने तैयारियों में तेजी ला दी है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सभी विभागों, नगर निकायों और ग्राम पंचायतों को प्रमुख निष्पादन संकेतकों (Key Performance Indicators-KPI) की शत-प्रतिशत प्रविष्टि एवं समयबद्ध प्रतिवेदन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र को जनपद स्तर पर इस कार्य का नोडल अधिकारी नामित किया गया है। जिला प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वच्छतम पोर्टल पर सभी आवश्यक सूचनाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर अपलोड हों, ताकि राज्य स्तर पर समेकित रिपोर्ट समय से तैयार कर उच्चतम न्यायालय सशक्त निगरानी समिति (SCMC) को भेजी जा सके
मा० उच्चतम न्यायालय के आदेशों एवं उच्चतम न्यायालय सशक्त निगरानी समिति (एससीएमसी) द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में जारी निर्देशों के अनुपालन में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने जनपद स्तर पर प्रमुख निष्पादन संकेतकों (केपीआई) की प्रविष्टि एवं प्रतिवेदन के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के सफल एवं प्रभावी क्रियान्वयन के दृष्टिगत मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र को जनपद स्तर पर प्रमुख निष्पादन संकेतकों (केपीआई) की प्रविष्टि एवं प्रतिवेदन हेतु नोडल अधिकारी नामित किया है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन्हीं निर्देशों के तहत प्रत्येक जिले में प्रमुख निष्पादन संकेतकों (KPI) की ऑनलाइन प्रविष्टि और रिपोर्टिंग की व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सतत विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए सभी संबंधित विभागों को इसे सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगा।
मुख्य विकास अधिकारी बनाए गए नोडल अधिकारी
जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र को जनपद स्तर पर KPI प्रविष्टि एवं प्रतिवेदन कार्य का नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि—सभी विभागों से आवश्यक आंकड़े प्राप्त करें। प्राप्त सूचनाओं का सत्यापन सुनिश्चित करें। स्वच्छतम पोर्टल पर 100 प्रतिशत KPI प्रविष्टि कराएं। निर्धारित समय के भीतर राज्य सरकार को समेकित रिपोर्ट भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायतों तथा सभी ग्राम पंचायतों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित आंकड़ों का सत्यापन कर समय पर पोर्टल पर अपलोड करें। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी से जिले की समेकित रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है, इसलिए प्रत्येक विभागीय नोडल अधिकारी नियमित रूप से समीक्षा करें।
प्रशासन के अनुसार उच्चतम न्यायालय सशक्त निगरानी समिति (SCMC) द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार पूरा कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। 10 जुलाई 2026 से नामांकन और तैयारी शुरू। 16 और 17 जुलाई को स्वच्छतम पोर्टल का प्रशिक्षण। 18 से 20 जुलाई तक राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स द्वारा अधिकारियों को प्रशिक्षण। 21 जुलाई से 27 जुलाई 2026 तक सभी स्थानीय निकायों एवं जिला स्तर पर KPI प्रविष्टि और रिपोर्टिंग का कार्य जारी है।
28 से 30 जुलाई तक राज्य स्तर पर सत्यापन एवं समेकन। 31 जुलाई 2026 को समेकित रिपोर्ट SCMC को भेजी जाएगी। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने स्पष्ट किया कि यह मामला सीधे माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि—लंबित प्रविष्टियां तुरंत पूरी करें। सभी आंकड़ों का सत्यापन सुनिश्चित करें। निर्धारित समय सीमा में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें। विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा करें।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का उद्देश्य कचरा प्रबंधन प्रणाली को वैज्ञानिक और प्रभावी बनाना है। इसके माध्यम से—खुले में कचरा फेंकने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। नगर निकायों की जवाबदेही बढ़ेगी। ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण को बढ़ावा मिलेगा। स्वच्छ शहर एवं स्वच्छ गांव की दिशा में बेहतर परिणाम मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी स्थानीय निकाय समयबद्ध तरीके से KPI रिपोर्टिंग करेंगे तो योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। जिला प्रशासन का कहना है कि KPI आधारित निगरानी व्यवस्था से प्रत्येक विभाग के कार्यों का मूल्यांकन अधिक पारदर्शी होगा। साथ ही भविष्य की योजनाओं और बजट निर्धारण में भी इन आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। मुख्य विकास अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समन्वय बनाकर कार्य करें ताकि हरिद्वार जनपद राज्य स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सके।
हरिद्वार जिला प्रशासन ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर तैयारियों में तेजी लाते हुए सभी विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारी सौंप दी है। मुख्य विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाकर KPI प्रविष्टि और रिपोर्टिंग प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से पूरा करने पर जोर दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन होगा, बल्कि स्वच्छ और बेहतर हरिद्वार के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
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