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रिपोर्टर अंजू कुमारी
हरिद्वार (संवाददाता):
हरिद्वार के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार हो रही बिजली कटौती अब गंभीर समस्या का रूप लेती जा रही है। मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को ग्राम पंचायत धनपुरा-घिस्सुपुरा क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीणों ने पथरी स्थित बिजली सर्विस स्टेशन पहुंचकर अपना आक्रोश जताया और एसडीओ को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल बिजली व्यवस्था सुधारने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में अनियमित बिजली आपूर्ति की जा रही है, जिससे आमजन के साथ-साथ किसान वर्ग को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि जहां एक ओर शहरी क्षेत्रों और फैक्ट्रियों में निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बार-बार कटौती कर उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
इस समय क्षेत्र में गन्ने की बुवाई का सीजन चल रहा है, जिसके चलते किसानों को सिंचाई के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता होती है। लेकिन बिजली कटौती के कारण खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे फसल प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।

एक स्थानीय किसान ने बताया,
“
बिजली कभी दिन में जाती है तो कभी रात में। मजबूरी में हमें रात के समय खेतों में पानी लगाने जाना पड़ता है, जो बेहद खतरनाक होता है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि क्षेत्र में एक जंगली हाथी लंबे समय से घूम रहा है। ऐसे में रात के समय खेतों में जाना जोखिम भरा हो गया है। बिजली न होने की वजह से अंधेरे में काम करना पड़ता है, जिससे हादसे का डर बना रहता है। किसानों का कहना है कि बिजली विभाग की लापरवाही उनकी जान जोखिम में डाल रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद सलीम ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई-कई घंटे बिजली गुल रहती है।
“बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे, बुजुर्ग परेशान हैं और गर्मी में हालात और खराब हो गए हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि बिजली कटौती को तुरंत बंद किया जाए और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र के पास स्थित औद्योगिक इकाइयों को लगातार बिजली दी जा रही है, जबकि गांवों में कटौती की जा रही है। इससे ग्रामीण खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि बिजली की कमी है तो उसका भार सभी क्षेत्रों में समान रूप से बांटा जाना चाहिए, न कि केवल गांवों पर डाला जाए।
ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को लेकर एसडीओ को लिखित ज्ञापन सौंपा और मांग की कि:
- तुरंत रोस्टिंग (बिजली कटौती) बंद की जाए नियमित और पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए किसानों के लिए विशेष बिजली व्यवस्था की जाए रात के समय अनावश्यक कटौती न हो
ग्रामीणों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ बिजली की समस्या नहीं है, बल्कि उनकी आजीविका, फसल और जीवन से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर समाधान निकालना चाहिए।
इस समय भीषण गर्मी के चलते बिजली की जरूरत और अधिक बढ़ गई है। लगातार कटौती से लोगों को पीने के पानी, पंखा-कूलर चलाने और दैनिक कार्यों में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है, जिससे अभिभावकों में भी नाराजगी है।
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