हरिद्वार में 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन की तैयारियों को लेकर हुई समन्वयकों और स्वयंसेवकों की बैठकहरिद्वार में 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन के विशेष आयोजन की तैयारियों को लेकर समन्वयकों और स्वयंसेवकों की बैठक आयोजित की गई।

रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

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हरिद्वार । 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन के विशेष आयोजन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। सम्मेलन को सुव्यवस्थित, गरिमापूर्ण और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से बुधवार को प्रदर्शन कला विभाग में समन्वयकों, अतिरिक्त समन्वयकों और स्वयंसेवकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सम्मेलन से जुड़ी तैयारियों और व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा संबंधित लोगों को उनकी जिम्मेदारियां सौंपी गईं। विशेष आयोजन के लिए गठित स्पेशल इवेंट ग्रुप की ओर से सम्मेलन की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। बैठक में कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्तरों पर आवश्यक समन्वय, व्यवस्थाओं की निगरानी और जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर चर्चा हुई।

इस दौरान स्वामी आर्षदेव ने समन्वयकों, अतिरिक्त समन्वयकों और स्वयंसेवकों से अपने दायित्वों का निर्वहन कर्तव्यनिष्ठा, प्रतिबद्धता और सेवा भावना के साथ करने का आह्वान किया। बैठक में स्पेशल इवेंट ग्रुप के मुख्य संयोजक स्वामी आर्षदेव जी एवं संयोजक डॉ. गौतम के मार्गदर्शन में विभिन्न व्यवस्थाओं पर विचार-विमर्श किया गया। स्वामी आर्षदेश जी ने मंच संचालन, मंच सज्जा, अतिथि स्वागत एवं अभिनंदन, तिलक, शंखनाद, दीप प्रज्वलन, कुलगीत, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रगान, उद्घाटन सत्र, अतिथि सम्मान, आशीर्वचन एवं संबोधन से संबंधित व्यवस्थाओं पर चर्चा करते हुए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में भरतनाट्यम, कथक, शास्त्रीय गायन, वादन एवं लोकनृत्य की प्रस्तुतियों के समन्वय, समय-निर्धारण एवं मंच व्यवस्था पर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक के दौरान समन्वयकों, अतिरिक्त समन्वयकों और स्वयंसेवकों को उनकी जिम्मेदारियां सौंपी गईं। आयोजन के दौरान निर्धारित दायित्वों को समय पर पूरा करने और आपसी समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया। स्वयंसेवकों की भूमिका किसी भी बड़े आयोजन में महत्वपूर्ण होती है। वे कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न कार्यों को व्यवस्थित करने में सहयोग करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वयंसेवकों को उनके दायित्वों के संबंध में जानकारी दी गई।

समन्वयकों और अतिरिक्त समन्वयकों को भी अपने-अपने स्तर पर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए तैयार रहने को कहा गया। बैठक में आयोजन के दौरान कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की परेशानी न आने देने के लिए आपसी सहयोग पर जोर दिया गया। बैठक में स्वामी आर्षदेव ने स्वयंसेवकों और समन्वयकों को संबोधित करते हुए सेवा कार्यों को कर्तव्यनिष्ठा, प्रतिबद्धता और प्रीतिपूर्वक करने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि किसी भी आयोजन की सफलता के लिए केवल व्यवस्थाएं तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनसे जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का अपने दायित्व के प्रति गंभीर और जिम्मेदार होना भी आवश्यक है। स्वयंसेवकों और समन्वयकों से आयोजन के दौरान सहयोग और सेवा भावना के साथ काम करने का आह्वान किया गया। विदित रहे कि अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन में देश और विदेश से विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 3000 मूर्धन्य विद्वान एवं शोध छात्र-छात्राओं के प्रतिभाग करने की संभावना है।

52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन के विशेष आयोजन को लेकर कार्यक्रम को समयबद्ध तरीके से संचालित करने की तैयारी की जा रही है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सम्मेलन के दौरान निर्धारित कार्यक्रम और व्यवस्थाएं तय समय के अनुसार संचालित हों। इसके लिए समन्वयकों और स्वयंसेवकों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। कार्यक्रम से जुड़े दायित्वों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करने का उद्देश्य भी यही है कि आयोजन के दौरान जिम्मेदारियों को लेकर किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति न बने।

आयोजन की गरिमा बनाए रखने पर जोर

अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन का विशेष आयोजन गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए बैठक में सभी संबंधित लोगों को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया। बैठक में प्रदर्शन कला विभाग की मुख्य समन्वयक डॉ. अल्का गिरी, संयोजक डॉ. चंद्रमोहन मिश्र, डॉ. अर्चना तिवारी एवं डॉ. अश्विनी जी, योग विभाग की संयोजिका डॉ. आरती पाल तथा डीएनवाईटी के संयोजक डॉ. नयन विश्वास जी उपस्थित रहे।

स्पेशल इवेंट ग्रुप द्वारा की जा रही तैयारियों का उद्देश्य सम्मेलन के विशेष आयोजन को व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराना है। इसके लिए कार्यक्रम से जुड़े लोगों के बीच नियमित समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। सम्मेलन जैसे आयोजन में स्वयंसेवकों की भूमिका व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण होती है। स्वयंसेवकों को सौंपे गए दायित्वों के माध्यम से कार्यक्रम के विभिन्न कार्यों में सहयोग लिया जाएगा।

स्वयंसेवक छात्राओं में एम.एससी. प्रथम वर्ष की छात्रा स्नेहा, बी.ए. तृतीय वर्ष की छात्रा राशि, एम.ए. द्वितीय वर्ष की छात्रा प्रियंका, बी.ए. दर्शन, प्रथम वर्ष की छात्रा भक्ति, बी.ए. द्वितीय वर्ष की छात्रा अंजलि रावत, बी.एन.वाई.एस. द्वितीय वर्ष की छात्रा अंशिका, एम.ए. दर्शन की छात्रा पुनीता, बी.एन.वाई.एस. पंचम वर्ष की छात्रा श्रुति तथा स्वयंसेवक छात्रों में बी.एन.वाई.एस. प्रथम बैच के छात्र अभ्युदय, बी.ए. दर्शन, प्रथम वर्ष के छात्र अभेदानंद, एम.ए. द्वितीय वर्ष के छात्र प्रिंस, बी.ए. द्वितीय वर्ष के छात्र रुद्र प्रताप सिंह आदि ने समिति प्रभारियों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।

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By ATHAR

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