पिरान कलियर पुलिस द्वारा इमाम साहब इंटर कॉलेज में साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियानपिरान कलियर पुलिस द्वारा इमाम साहब इंटर कॉलेज में साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान

रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

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हरिद्वार 2026। साइबर अपराधों से बचाव और विद्यार्थियों को इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से पिरान कलियर पुलिस ने इमाम साहब इंटर कॉलेज में विशेष जागरूकता अभियान चलाया। साइबर सुरक्षा अभियान 2.0 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन ठगी, साइबर बुलिंग, व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और डिजिटल माध्यमों का सावधानीपूर्वक उपयोग करने के बारे में जानकारी दी गई।

पुलिस मुख्यालय एवं वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार उत्तराखंड में 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2026 तक राज्यव्यापी साइबर सुरक्षा अभियान 2.0 संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में 14 अक्टूबर को कोतवाली पिरान कलियर की पुलिस टीम ने इमाम साहब इंटर कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। अभियान का उद्देश्य साइबर अपराधों की रोकथाम के साथ-साथ लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि इंटरनेट का उपयोग करते समय छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर कई प्रकार के ऑनलाइन जोखिमों से बचा जा सकता है। पुलिस टीम ने व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सतर्कता बरतने, अनजान लोगों के संदेशों और लिंक पर भरोसा न करने तथा सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की सलाह दी।

उत्तराखंड में चलाए जा रहे साइबर सुरक्षा अभियान 2.0 के अंतर्गत साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने और साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण पर जोर दिया जा रहा है। अभियान के तहत स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता गतिविधियां आयोजित कर विद्यार्थियों को ऑनलाइन सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जा रही है।

पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधों से संबंधित राष्ट्रीय पोर्टल और अन्य व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई तथा पात्र पीड़ितों की धनराशि वापस कराने के प्रयास भी अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं।

डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ पढ़ाई, संवाद, भुगतान और मनोरंजन के लिए इंटरनेट पर निर्भरता भी बढ़ी है। ऐसे में बच्चों और किशोरों के लिए यह समझना जरूरी है कि ऑनलाइन दुनिया में व्यक्तिगत जानकारी किस तरह सुरक्षित रखी जाए और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कैसे की जाए। इसी उद्देश्य से पिरान कलियर पुलिस ने विद्यार्थियों के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया।

पिरान कलियर पुलिस द्वारा इमाम साहब इंटर कॉलेज में साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान

व्यक्तिगत जानकारी और पासवर्ड सुरक्षित रखने की सलाह

इमाम साहब इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस टीम ने समझाया कि मोबाइल नंबर, घर का पता, विद्यालय से संबंधित जानकारी, पासवर्ड और अन्य निजी विवरण इंटरनेट पर साझा करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी निजी जानकारी साझा करने से परेशानी हो सकती है। सोशल मीडिया पर नए लोगों से बातचीत करते समय सतर्क रहना और किसी के कहने पर अपनी गोपनीय जानकारी उपलब्ध नहीं कराना जरूरी है।

ऑनलाइन खातों की सुरक्षा के लिए मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का इस्तेमाल करना उपयोगी होता है। जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां दो-स्तरीय प्रमाणीकरण जैसी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई जा सकती है। इसके अलावा मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों को अपडेट रखना तथा उनकी सुरक्षा सेटिंग्स की नियमित जांच करना भी महत्वपूर्ण है। पुलिस की ओर से विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि किसी भी वेबसाइट या ऐप पर अपनी जानकारी दर्ज करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें। किसी अनजान व्यक्ति की ओर से मांगे गए ओटीपी, बैंकिंग विवरण या अन्य गोपनीय जानकारी को साझा न करें।

कार्यक्रम में ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के तरीकों पर भी चर्चा की गई। विद्यार्थियों को समझाया गया कि साइबर ठग कई बार आकर्षक ऑफर, इनाम, नौकरी, छात्रवृत्ति या किसी जरूरी सूचना का झांसा देकर लोगों से निजी जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में जल्दबाजी करने के बजाय संदेश भेजने वाले की पहचान और सूचना की सत्यता जांचना जरूरी है। अनजान नंबरों से आए लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध फाइल डाउनलोड करने या किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर ऐप इंस्टॉल करने से बचना चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक, सरकारी विभाग या किसी प्रतिष्ठित संस्था का कर्मचारी बताकर गोपनीय जानकारी मांगता है, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। केवल फोन कॉल, संदेश या सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर किसी व्यक्ति पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। पुलिस की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसे खतरों की पहचान करने और ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान सावधानी बरतने के लिए तैयार करना है।

जागरूकता कार्यक्रम में साइबर बुलिंग यानी इंटरनेट या डिजिटल माध्यमों के जरिए किसी को परेशान करने, अपमानित करने, धमकाने अथवा उसकी निजी जानकारी का अनुचित इस्तेमाल करने जैसे विषयों पर भी जानकारी दी गई।

विद्यार्थियों को बताया गया कि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना, धमकी भरे संदेश भेजना या किसी की तस्वीर अथवा निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करना गंभीर समस्या बन सकता है। ऑनलाइन किसी को परेशान करने वाली गतिविधियों को नजरअंदाज करने के बजाय उचित तरीके से रिपोर्ट करना जरूरी है।

यदि किसी विद्यार्थी को ऑनलाइन धमकी, अपमानजनक संदेश या लगातार परेशान किए जाने का सामना करना पड़े, तो उसे चुप रहने के बजाय माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद वयस्क को जानकारी देनी चाहिए। संबंधित संदेशों और स्क्रीनशॉट जैसे उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखना भी शिकायत करने में मददगार हो सकता है। पुलिस का जागरूकता अभियान विद्यार्थियों को यह समझाने की दिशा में महत्वपूर्ण है कि डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ किया जाए और किसी भी तरह की ऑनलाइन परेशानी सामने आने पर सहायता लेने में संकोच न किया जाए।

साइबर अपराध होने पर शिकायत करना जरूरी

साइबर अपराध की स्थिति में समय पर शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे जल्द से जल्द संबंधित बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को सूचना देने के साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए। ऑनलाइन शिकायत के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

शिकायत करते समय लेनदेन का विवरण, संदिग्ध फोन नंबर, संदेश, स्क्रीनशॉट और अन्य उपलब्ध जानकारी सुरक्षित रखना उपयोगी होता है। समय पर सूचना देने से संबंधित एजेंसियों को मामले की जांच और संभावित वित्तीय नुकसान को रोकने के प्रयास करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, धनराशि की वापसी मामले की परिस्थितियों और संबंधित प्रक्रिया पर निर्भर करती है। विद्यार्थियों को यह समझना भी जरूरी है कि साइबर अपराध का शिकार होने पर शर्म या डर के कारण शिकायत टालनी नहीं चाहिए। समय रहते अभिभावक, शिक्षक और संबंधित अधिकारियों की सहायता लेना बेहतर कदम है।

इमाम साहब इंटर कॉलेज में आयोजित इस जागरूकता अभियान के दौरान कोतवाली पिरान कलियर के उपनिरीक्षक योगेश कुमार, पुलिसकर्मी, कॉलेज के प्रधानाचार्य और शिक्षकगण मौजूद रहे। पुलिस टीम ने विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया। विद्यालयों में इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को केवल किताबी जानकारी तक सीमित न रखकर व्यावहारिक जीवन में डिजिटल सुरक्षा अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। आज विद्यार्थी ऑनलाइन कक्षाओं, शैक्षणिक सामग्री, सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा की बुनियादी जानकारी उनके लिए उपयोगी है।

पिरान कलियर पुलिस का यह कार्यक्रम राज्यव्यापी साइबर सुरक्षा अभियान 2.0 का हिस्सा रहा। अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को ऑनलाइन खतरों की पहचान, निजी जानकारी की सुरक्षा और साइबर अपराध की स्थिति में शिकायत करने के तरीकों के प्रति जागरूक किया गया।

डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठाने के साथ सुरक्षा नियमों का पालन करना भी जरूरी है। अनजान लिंक से बचना, गोपनीय जानकारी साझा न करना, मजबूत पासवर्ड रखना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देना सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इमाम साहब इंटर कॉलेज में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के जरिए पुलिस ने विद्यार्थियों को जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने का संदेश दिया। साइबर सुरक्षा अभियान 2.0 के तहत राज्य में 15 अक्टूबर तक जागरूकता और संबंधित कार्रवाई जारी रहने की जानकारी दी गई है।

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By ATHAR

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