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रिपोर्टर (नसरा परवीन)
देहरादून/कालसी । उत्तराखंड के देहरादून जिले की कालसी तहसील के कचटा गांव में पत्नी की हत्या के मामले ने अब सामाजिक स्तर पर भी गंभीर रूप ले लिया है। घटना के बाद खत कोरू के 16 गांवों ने आरोपी पति के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उसके सामाजिक बहिष्कार का फैसला लिया है। ग्रामीणों की बैठक में तय किया गया कि आरोपी की जमानत कराने, मुकदमे में उसके पक्ष में गवाही देने या किसी भी तरह से उसकी मदद करने वाले व्यक्ति पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसे व्यक्ति को खत से भी बहिष्कृत करने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला ग्राम कचटा के मंदिर परिसर में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आरोपी मनोज और उसकी पत्नी नीलम उर्फ नीलू ने करीब डेढ़ वर्ष पहले प्रेम विवाह किया था। घरेलू विवाद के दौरान पत्नी की हत्या के आरोप में मनोज को राजस्व पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। बाद में उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेजे जाने की खबर सामने आई। अब क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस घटना के विरोध में एकजुटता दिखाते हुए आरोपी और उसकी मदद करने वालों के संबंध में सामाजिक स्तर पर निर्णय लिया है।
प्यार, घर से भागकर शादी और फिर अचानक रिश्ते में शक का ऐसा जहर घुला, जिसने महज 18 महीनों के भीतर हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। साथ जीने-मरने की कसमें खाकर शुरू हुआ नीलू और मनोज का रिश्ता खौफनाक मोड़ पर आकर खत्म हो गया, जो पीछे छोड़ गया है केवल बिखरे पड़े सपने और कभी न भरने वाला दर्द। प्राप्त मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कचटा गांव के मंदिर प्रांगण में खत कोरू के सदर स्याणा सुनील दत्त जोशी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इसमें क्षेत्र के 16 गांवों के लोगों ने हिस्सा लिया। बैठक में महिला की हत्या की घटना पर नाराजगी जताते हुए आरोपी के खिलाफ कड़ा सामाजिक रुख अपनाने पर सहमति बनी।
बैठक में निर्णय लिया गया कि आरोपी मनोज की जमानत कराने, उसके पक्ष में गवाही देने अथवा किसी अन्य तरीके से कानूनी मामले में सहायता करने वाले व्यक्ति पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही ऐसे व्यक्ति को खत से बाहर करने की बात भी कही गई। बैठक में यह भी तय किए जाने की जानकारी सामने आई कि आरोपी के परिवार, रिश्तेदारों और खत के किसी भी गांव के व्यक्ति को उसका साथ नहीं देना चाहिए। खत कोरू के विभिन्न गांवों में ब्याही गई बेटियों और उनके परिवारों से भी आरोपी की मदद नहीं करने की अपील की गई। ग्रामीणों ने इस निर्णय को महिला के खिलाफ हुई गंभीर घटना के विरोध में सामूहिक रुख के तौर पर पेश किया।
बैठक में आरोपी के सामाजिक बहिष्कार को लेकर भी फैसला लिया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ग्रामीणों ने कहा कि यदि अदालत से आरोपी दोषमुक्त भी हो जाता है, तब भी उसे खत कोरू में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह निर्णय ग्रामीणों की बैठक में लिया गया सामाजिक फैसला है। इसे न्यायालय की ओर से लगाया गया जुर्माना या कानूनी सजा नहीं समझा जाना चाहिए। आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले का निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा, जबकि खत के लोगों ने अपने स्तर पर सामाजिक बहिष्कार और सहायता करने वालों के लिए जुर्माने का प्रस्ताव तय किया है।
रिपोर्टों के अनुसार, घटना के दिन घर में दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर मनोज ने धारदार हथियार से पत्नी की गर्दन पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था। सूचना मिलने पर राजस्व पुलिस की टीम घटनास्थल पर पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद न्यायिक प्रक्रिया
घटना के बाद आरोपी मनोज की तलाश शुरू की गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसे गांव के पास जंगल या एक छानी में छिपे होने की सूचना मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया और जेल भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया संबंधित अधिकारियों के स्तर पर आगे बढ़ाई गई। सबसे पहले घटना के बारे में जानते हैं। वारदात 8 अक्तूबर की है। देहरादून के कालसी के कचटा गांव में किसी बात को लेकर शक की सूई ने पति-पत्नी के रिश्ते को इतना उलझाया कि खौफनाक अंत देखने वालों की रूह कांप गई।
बैठक में ग्रामीणों ने सरकार और कानून के माध्यम से आरोपी को कठोर सजा दिलाने की मांग करने का निर्णय भी लिया। ग्राम पंचायत कचटा के प्रधान संतू और ग्राम पंचायत बाढ़ौ के पूर्व प्रधान सीताराम चौहान ने कहा कि ऐसे मामलों में समाज की एकजुटता से महिलाओं के खिलाफ हिंसा के विरोध में स्पष्ट संदेश दिया जा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि महिला के साथ हुई घटना के खिलाफ पूरा क्षेत्र एकजुट है। बैठक में लिए गए फैसले का उद्देश्य आरोपी को सामाजिक समर्थन से दूर रखना और ऐसी घटनाओं के खिलाफ सामूहिक विरोध दर्ज कराना बताया गया।
महिला सुरक्षा और घरेलू हिंसा पर फिर चर्चा
कचटा गांव की घटना ने घरेलू विवादों के हिंसक रूप लेने और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सवालों को भी चर्चा में ला दिया है। पति-पत्नी के बीच मतभेद किसी भी परिवार में हो सकते हैं, लेकिन विवाद का हिंसा में बदलना गंभीर सामाजिक और कानूनी चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में समय रहते सहायता लेना, हिंसा की आशंका होने पर संबंधित अधिकारियों को सूचना देना और पीड़ित व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। परिवार और समुदाय की भूमिका भी अहम हो सकती है, विशेषकर तब जब किसी व्यक्ति को लगातार धमकी, हिंसा या असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा हो।
जिस ‘हाथ’ को थामकर नीलू अपना घर-परिवार छोड़कर आई थी, उसी हाथ ने दरांती से उसे मार डाला। कचटा निवासी आरोपी मनोज ने डेढ़ साल पहले ही नीलू से प्रेम विवाह किया था। शुरुआती दिनों में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन कुछ समय से शक के चलते मनोज और नीलू के रिश्ते में दरार पड़ने लगी थी। इस घटना में ग्रामीणों ने सामाजिक स्तर पर कड़ा निर्णय लेकर महिला के खिलाफ हुई हिंसा की निंदा की है। अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ खत कोरू की बैठक में लिए गए फैसले को लेकर भी चर्चा जारी है।
खत कोरू के 16 गांवों की बैठक में आरोपी की मदद करने वाले व्यक्ति पर ₹5 लाख जुर्माना लगाने और उसे सामाजिक रूप से बहिष्कृत करने का निर्णय क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। बैठक की अध्यक्षता खत कोरू के सदर स्याणा सुनील दत्त जोशी ने की। ग्रामीणों ने आरोपी को किसी भी तरह का समर्थन नहीं देने की अपील की है। कचटा गांव में पत्नी की हत्या के आरोप से शुरू हुआ यह मामला अब कानूनी कार्रवाई के साथ सामाजिक प्रतिक्रिया के कारण भी सुर्खियों में है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किए जाने की जानकारी सामने आ चुकी है। आगे की स्थिति न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित तथ्यों के आधार पर स्पष्ट होगी।
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