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IIT रुड़की में बुधवार को युवा आपदा मित्र योजना के अंतर्गत सात दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस प्रशिक्षण में उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से आए 50 NCC कैडेट्स भाग ले रहे हैं, जिन्हें खोज-बचाव, प्राथमिक उपचार और अग्नि सुरक्षा की तकनीक सिखाई जाएगी।
भारत आपदाओं के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील देशों में शामिल है। भूकंप, बादल फटना, भूस्खलन, जंगल की आग और बाढ़ जैसी घटनाएँ लगातार जीवन और संपत्ति को नुकसान पहुँचाती हैं। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारें लंबे समय से समुदाय स्तर पर आपदा तैयारी बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और गृह मंत्रालय द्वारा संचालित युवा आपदा मित्र योजना इसी कड़ी का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें राहत व बचाव कार्यों के लिए तैयार किया जाता है।
यह प्रशिक्षण आज 27 नवंबर 2025 से IIT रुड़की परिसर में शुरू हुआ और 3 दिसंबर 2025 तक चलेगा।
कार्यक्रम का उद्घाटन 10 बटालियन एनसीसी रुड़की के कर्नल एस. चक्रवर्ती ने किया।
इसमें पिथौरागढ़, चम्पावत, लोहाघाट और अल्मोड़ा से 10 UK और 38 बटालियन के 25 बालक व 25 बालिका कैडेट्स (कुल 50) शामिल हैं।
प्रशिक्षण में निम्न विषय शामिल हैं—
- आपदा खोज एवं बचाव तकनीक
- प्राथमिक उपचार
- अग्नि सुरक्षा नियम
- भीड़ प्रबंधन
- आपदा पूर्व तैयारी के तरीके
आपदा की स्थिति में सबसे पहले प्रतिक्रिया स्थानीय समुदाय से ही आती है। ऐसे में प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता—
- राहत कार्यों की रफ्तार बढ़ाएगी
- गाँवों और दूरस्थ क्षेत्रों में मदद पहुँचाने में सहायक होगी
- जागरूकता फैलाकर जीवन और संपत्ति की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगी
IIT रुड़की जैसे तकनीकी संस्थान में यह प्रशिक्षण युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी विकसित करेगा।

उत्तराखंड में विगत वर्षों में केदारनाथ त्रासदी, बादल फटना, भूकंप और जंगल की आग जैसी घटनाएँ सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार—
- राज्य के 70% से अधिक क्षेत्र भूकंप की संभावित उच्च श्रेणी में आते हैं
- हर वर्ष हजारों लोग आपदा से प्रभावित होते हैं
इस तरह का कौशल प्रशिक्षण ऐसे जोखिम वाले राज्यों में बेहद आवश्यक है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को आपदा के समय त्वरित और सक्षम प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करेगा। जागरूक और प्रशिक्षित समुदाय ही बड़े जोखिमों के प्रभाव को कम कर सकते हैं।
आपदा से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है—तैयारी और सतर्कता।
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