“ऋषिकेश में प्रेसवार्ता के दौरान जगद्गुरु पर दुष्प्रचार को लेकर बयान देते हिंदू शक्ति संगठन अध्यक्ष राघवेंद्र भटनागर”“ऋषिकेश में प्रेसवार्ता के दौरान जगद्गुरु पर दुष्प्रचार को लेकर बयान देते हिंदू शक्ति संगठन अध्यक्ष राघवेंद्र भटनागर”

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ऋषिकेश में हाल ही में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के प्रवचन को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दुष्प्रचार पर हिंदू शक्ति संगठन भड़क उठा है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राघवेंद्र भटनागर ने इसे सुनियोजित प्रयास बताते हुए कहा कि जगद्गुरु के शब्दों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना सनातन धर्म का अपमान है।

पिछले कुछ समय से देशभर में धार्मिक प्रवचनों के अंश को सोशल मीडिया पर काटकर अलग संदर्भ में प्रस्तुत किए जाने की घटनाएँ बढ़ी हैं। इससे न केवल धार्मिक विद्वानों की छवि प्रभावित होती है, बल्कि समुदायों में अनावश्यक तनाव भी पैदा होता है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य भारत के प्रतिष्ठित संतों में से एक माने जाते हैं। उनके प्रवचन देश-विदेश के करोड़ों अनुयायियों तक पहुँचते हैं। ऐसे में उनके बयान को संदर्भ से हटाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया जाना विवाद का कारण बना।

शनिवार को रेलवे रोड स्थित एक होटल में हिंदू शक्ति संगठन ने प्रेसवार्ता आयोजित की। प्रदेश अध्यक्ष राघवेंद्र भटनागर ने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य एक प्रवचन के दौरान “वाइफ” शब्द के पश्चिमी संदर्भ पर टिप्पणी कर रहे थे। लेकिन इस टिप्पणी को कुछ तत्वों द्वारा जानबूझकर काटकर गलत अर्थ में सोशल मीडिया पर पेश किया जा रहा है। भटनागर ने स्पष्ट कहा कि जगद्गुरु का उद्देश्य सामाजिक

एवं सांस्कृतिक चेतना जगाना था, लेकिन विरोधी मानसिकता वाले लोग इसे सनातन संस्कृति पर आघात की तरह गलत रंग दे रहे हैं। संगठन के अनुसार, जगद्गुरु पश्चिमी जीवनशैली के प्रभावों पर चर्चा कर रहे थे और “wife” शब्द का उदाहरण केवल सांस्कृतिक तुलना बताने के लिए दिया गया था।

जनता व्यापार संस्कृति पर असर

ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक गतिविधियों और कथाओं का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में किसी भी धार्मिक प्रवचन से जुड़े विवाद का सीधा असर स्थानीय समुदाय पर पड़ता है।

  • जनता पर असर: सोशल मीडिया पर वायरल हो रही क्लिप को लेकर कई लोग भ्रम की स्थिति में आ गए। हिंदू संगठनों द्वारा इसका विरोध किए जाने के बाद स्थिति स्पष्ट होने लगी।
  • व्यापार: धार्मिक पर्यटन ऋषिकेश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। विवादित घटनाएँ कभी-कभी यात्री संख्या को प्रभावित कर सकती हैं।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: प्रवचनों में गलतफहमी फैलने से अनुयायियों में असंतोष और अविश्वास की भावना पैदा हो सकती है।
  • संगठन की अपील के बाद कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी वीडियो को उसके मूल संदर्भ में देखने की सलाह दी।

यह पहली बार नहीं है जब किसी संत या धार्मिक वक्ता की टिप्पणी को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से वायरल किया गया हो।

  • पिछले वर्षों में भी कई धार्मिक हस्तियों के बयान को संदर्भ से हटाकर गलत अर्थ में प्रसारित किया गया था
  • कई विशेषज्ञ इस बढ़ती प्रवृत्ति को डिजिटल मीडिया की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक मानते हैं।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के नाम पर फैलाए जा रहे दुष्प्रचार को लेकर हिंदू शक्ति संगठन का विरोध इस बात की ओर संकेत करता है कि धार्मिक प्रवचनों के गलत अर्थ निकालना समाज के लिए हानिकारक है।
जनता से अपील है कि किसी भी वीडियो या बयान को बिना सत्यापन के आगे न बढ़ाएँ और उसे संपूर्ण संदर्भ में देखकर ही अपनी राय बनाएं।

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By ATHAR

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