हरिद्वार के रुड़की से माउंट त्रिशूल अभियान रवाना, 7,120 मीटर ऊंची चोटी पर भारतीय सेना की चुनौतीपूर्ण चढ़ाईहरिद्वार के रुड़की से माउंट त्रिशूल अभियान रवाना, 7,120 मीटर ऊंची चोटी पर भारतीय सेना की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई

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रिपोर्टर (सचिन शर्मा)

हरिद्वार 2026। भारतीय सेना के कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स की ओर से माउंट त्रिशूल के लिए पर्वतारोहण अभियान की शुरुआत रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से हुई। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में अभियान दल को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। माउंट त्रिशूल की ऊंचाई 7,120 मीटर यानी करीब 23,360 फीट है और इसे गढ़वाल हिमालय की चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटियों में शामिल किया जाता है। अभियान का उद्देश्य केवल पर्वतारोहण की उपलब्धि हासिल करना नहीं है, बल्कि अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में शारीरिक क्षमता, मानसिक मजबूती, तकनीकी दक्षता, अनुशासन और टीम भावना की परीक्षा लेना भी है। अभियान दल ने चढ़ाई से पहले ऊंचाई वाले वातावरण के अनुकूलन, शारीरिक प्रशिक्षण और पर्वतारोहण तकनीकों को लेकर विशेष तैयारी की है।

माउंट त्रिशूल अभियान को रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से औपचारिक रूप से रवाना किया गया। कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें सेंट्रल कमांड के GOC-in-C लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, इंजीनियर-इन-चीफ़ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला और बंगाल सैपर्स एंड मिलिट्री सर्वे के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया शामिल रहे। इसके अलावा कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स के कई अनुभवी अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इन अधिकारियों ने अभियान दल के सदस्यों से बातचीत की और उनके प्रशिक्षण तथा अभियान की तैयारियों के बारे में जानकारी ली।

रुड़की से माउंट त्रिशूल अभियान रवाना, 7,120 मीटर की चोटी पर भारतीय सेना की चुनौती

इस समारोह में सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिनमें सेंट्रल कमांड के GOC-in-C लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, इंजीनियर-इन-चीफ़ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला और बंगाल सैपर्स एंड मिलिट्री सर्वे के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया शामिल थे। कॉर्प्स ऑफ़ इंजीनियर्स के कई अनुभवी अधिकारी, जो पर्वतारोहण में अपनी उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं, भी इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने अभियान दल के साथ बातचीत की। गढ़वाल हिमालय में 7,120 मीटर (23,360 फ़ीट) की ऊंचाई पर स्थित माउंट त्रिशूल, अत्यधिक ऊंचाई, मुश्किल रास्तों और अनिश्चित मौसम की चुनौतियों का एक कठिन मिश्रण पेश करता है। यह अभियान टीम की शारीरिक सहनशक्ति, तकनीकी दक्षता, मानसिक मज़बूती और ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण माहौल में प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता की परीक्षा लेगा।

सभा को संबोधित करते हुए, लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने अभियान टीम की शारीरिक फ़िटनेस, मानसिक मज़बूती और टीम भावना (esprit de corps) के उच्च स्तर की सराहना की। उन्होंने सैपर्स की रोमांच और पर्वतारोहण उपलब्धियों की शानदार विरासत पर प्रकाश डाला और नेतृत्व, सहनशक्ति, अनुशासन, टीम वर्क और सोच-समझकर जोखिम उठाने जैसे गुणों को विकसित करने में ऐसे अभियानों के महत्व को रेखांकित किया। ये गुण सैन्य तैयारी में, खासकर ऊंचाई वाले इलाकों में, महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

कॉर्प्स के अनुभवी पर्वतारोहियों की मौजूदगी ने इस मौके की अहमियत को और बढ़ा दिया, जो कॉर्प्स ऑफ़ इंजीनियर्स के भीतर रोमांच, साहस और पेशेवर उत्कृष्टता की स्थायी परंपरा को दर्शाता है। समारोह का समापन टीम लीडर को औपचारिक ‘एक्सपेडिशन फ़्लैग’ सौंपने के साथ हुआ। इसके साथ ही टीम को बेस कैंप की यात्रा और उसके बाद माउंट त्रिशूल पर चढ़ाई के लिए औपचारिक रूप से रवाना किया गया। यह अभियान ‘कोर ऑफ़ इंजीनियर्स’ की पर्वतारोहण की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाता है और सबसे कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय सेना के साहस, दृढ़ता, टीमवर्क और उत्कृष्टता की भावना को दर्शाता है।

रुड़की बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से माउंट त्रिशूल पर्वतारोहण अभियान को हरी झंडी दिखाते भारतीय सेना के अधिकारी

समारोह के अंतिम चरण में अभियान टीम के लीडर को औपचारिक ‘एक्सपेडिशन फ्लैग’ सौंपा गया। इसके साथ ही अभियान दल को बेस कैंप की ओर रवाना किया गया। बेस कैंप पहुंचने के बाद टीम निर्धारित योजना के अनुसार माउंट त्रिशूल की चढ़ाई की दिशा में आगे बढ़ेगी। माउंट त्रिशूल अभियान भारतीय सेना के कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स की पर्वतारोहण परंपरा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। चुनौतीपूर्ण पर्वतीय परिस्थितियों में यह अभियान जवानों की शारीरिक क्षमता के साथ उनके धैर्य, अनुशासन, नेतृत्व और टीमवर्क की भी परीक्षा लेगा।

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By ATHAR

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